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चीन ओपन में पीवी सिंधु का सफर खत्म, चार मैच पॉइंट गंवाकर चेन युफेई से हारीं
स्पोर्ट्स डेस्क
तीन गेम तक चला कड़ा मुकाबला, 89 मिनट में युफेई ने दर्ज की जीत
पिछले सप्ताह जापान ओपन सुपर-750 का खिताब जीतने के बाद शानदार लय में नजर आ रहीं भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु का चीन ओपन सुपर-1000 में अभियान प्री-क्वार्टर फाइनल में थम गया। गुरुवार को चांगझोउ में खेले गए महिला सिंगल्स मुकाबले में सिंधु को चीन की वर्ल्ड नंबर-4 चेन युफेई ने तीन गेम तक चले संघर्षपूर्ण मैच में 16-21, 22-20, 21-18 से हराया। करीब एक घंटे 29 मिनट चले मुकाबले में सिंधु ने पहला गेम अपने नाम कर मजबूत शुरुआत की थी। दूसरे गेम में भी वह मैच जीतने की स्थिति तक पहुंच गईं और उनके पास मुकाबला खत्म करने के चार मैच पॉइंट थे, लेकिन भारतीय खिलाड़ी इन मौकों को जीत में नहीं बदल सकीं। यहीं से मुकाबले का रुख बदल गया और घरेलू दर्शकों के सामने खेल रहीं युफेई ने वापसी करते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली।
पहले गेम में सिंधु ने शुरुआत से ही आक्रामक बैडमिंटन खेला। लंबी रैलियों के साथ उन्होंने कोर्ट के दोनों किनारों का इस्तेमाल किया और युफेई को लगातार दबाव में रखा। भारतीय खिलाड़ी ने नेट के पास भी नियंत्रण बनाए रखा और मौका मिलते ही तेज स्मैश से अंक निकाले। युफेई ने बीच-बीच में वापसी की कोशिश की, लेकिन सिंधु ने अपनी बढ़त हाथ से नहीं जाने दी। उन्होंने पहला गेम 21-16 से जीतकर मुकाबले में 1-0 की बढ़त बना ली। जापान ओपन की खिताबी जीत के बाद जिस आत्मविश्वास के साथ सिंधु चीन पहुंची थीं, उसका असर शुरुआती गेम में साफ नजर आया।
दूसरा गेम मुकाबले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा साबित हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए लंबी रैलियां देखने को मिलीं। सिंधु ने दबाव के बावजूद बढ़त बनाई और मुकाबले को खत्म करने के करीब पहुंच गईं। उनके पास चार मैच पॉइंट आए, लेकिन चेन युफेई ने हर बार खुद को मुकाबले में बनाए रखा। सिंधु इन मौकों पर निर्णायक अंक हासिल नहीं कर सकीं। युफेई ने लगातार दबाव बनाते हुए स्कोर बराबर किया और फिर अतिरिक्त अंकों तक पहुंचे गेम को 22-20 से अपने नाम कर लिया। इस गेम के साथ मुकाबला 1-1 की बराबरी पर आ गया।
चार मैच पॉइंट गंवाना सिंधु के लिए भारी पड़ा। दूसरी तरफ युफेई का आत्मविश्वास बढ़ गया और निर्णायक तीसरे गेम में मुकाबला फिर बेहद करीबी रहा। दोनों खिलाड़ियों ने लंबी रैलियों में एक-दूसरे की फिटनेस और धैर्य की परीक्षा ली। सिंधु ने कई बार अंतर कम किया, लेकिन अंतिम हिस्से में चीनी खिलाड़ी ने अहम अंकों पर बेहतर नियंत्रण रखा। स्कोर जब निर्णायक स्थिति में पहुंचा तो युफेई ने गलतियां कम कीं और 21-18 से तीसरा गेम जीतते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया।
इस हार के साथ सिंधु का चीन ओपन सुपर-1000 में सफर समाप्त हो गया। हालांकि हाल के टूर्नामेंटों में उनका प्रदर्शन भारतीय बैडमिंटन के लिए अहम माना जा रहा है। जापान ओपन सुपर-750 में खिताबी सफलता हासिल करने के बाद उनसे चीन में भी लंबा सफर तय करने की उम्मीद थी। चांगझोउ में वह प्री-क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं, लेकिन चेन युफेई के खिलाफ मिले निर्णायक मौकों को भुना नहीं पाने के कारण उन्हें बाहर होना पड़ा।
चेन युफेई के खिलाफ यह मुकाबला इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि वह अपने घरेलू कोर्ट पर खेल रही थीं। वर्ल्ड नंबर-4 चीनी खिलाड़ी ने पहला गेम गंवाने के बाद जिस तरह वापसी की, उसमें उनका अनुभव दिखाई दिया। खासकर दूसरे गेम में मैच पॉइंट बचाना मुकाबले का टर्निंग पॉइंट रहा। सिंधु के पास सीधे दो गेम में मुकाबला समाप्त करने का अवसर था, लेकिन युफेई ने लगातार चार मैच पॉइंट बचाकर मुकाबले को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया।
सिंधु की हार के बीच गुरुवार को क्रिकेट से जुड़ी एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आई। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने 2027 में होने वाले वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल के आयोजन स्थल और तारीखों की घोषणा कर दी है। WTC 2027 का खिताबी मुकाबला लंदन के ऐतिहासिक द ओवल मैदान पर 9 से 13 जून के बीच खेला जाएगा। इसके साथ एक रिजर्व डे की व्यवस्था किए जाने की संभावना भी टूर्नामेंट की खेल परिस्थितियों के अनुसार रहेगी।
द ओवल लगातार दूसरी बार वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल की मेजबानी करेगा। इससे पहले 2023 का WTC फाइनल भी इसी मैदान पर खेला गया था। उस मुकाबले में भारत और ऑस्ट्रेलिया आमने-सामने थे। ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय टीम को हराकर वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम किया था। अब 2027 में एक बार फिर टेस्ट क्रिकेट की दो शीर्ष टीमें इसी मैदान पर विश्व चैंपियन बनने के लिए उतरेंगी।
2027 का WTC फाइनल ऐतिहासिक लिहाज से भी खास होगा। उस वर्ष टेस्ट क्रिकेट अपने 150 साल पूरे करेगा। पहला आधिकारिक टेस्ट मुकाबला 1877 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया था। ऐसे में टेस्ट क्रिकेट की डेढ़ सदी पूरी होने वाले साल में होने वाला वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल इस प्रारूप के लिए विशेष आयोजन माना जा रहा है।
इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड को आने वाले तीन WTC फाइनल की मेजबानी भी दी गई है। जानकारी के अनुसार 2027 के साथ 2029 और 2031 के वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल भी इंग्लैंड में आयोजित किए जाएंगे। हालांकि बाद के दोनों फाइनल के लिए संबंधित मैदानों और विस्तृत कार्यक्रम को लेकर आगे और जानकारी जारी की जाएगी।
वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप की शुरुआत टेस्ट क्रिकेट को एक व्यवस्थित वैश्विक प्रतियोगिता का स्वरूप देने के उद्देश्य से की गई थी। इसमें निर्धारित चक्र के दौरान अलग-अलग टेस्ट सीरीज से टीमों को अंक मिलते हैं और अंक प्रतिशत के आधार पर शीर्ष दो टीमें फाइनल में पहुंचती हैं। इंग्लैंड के मैदान अब तक WTC फाइनल के प्रमुख आयोजन स्थल रहे हैं। 2021 में पहला फाइनल साउथैम्प्टन में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ था, जबकि 2023 में भारत और ऑस्ट्रेलिया द ओवल में आमने-सामने थे।
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चीन ओपन में पीवी सिंधु का सफर खत्म, चार मैच पॉइंट गंवाकर चेन युफेई से हारीं
स्पोर्ट्स डेस्क
पिछले सप्ताह जापान ओपन सुपर-750 का खिताब जीतने के बाद शानदार लय में नजर आ रहीं भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु का चीन ओपन सुपर-1000 में अभियान प्री-क्वार्टर फाइनल में थम गया। गुरुवार को चांगझोउ में खेले गए महिला सिंगल्स मुकाबले में सिंधु को चीन की वर्ल्ड नंबर-4 चेन युफेई ने तीन गेम तक चले संघर्षपूर्ण मैच में 16-21, 22-20, 21-18 से हराया। करीब एक घंटे 29 मिनट चले मुकाबले में सिंधु ने पहला गेम अपने नाम कर मजबूत शुरुआत की थी। दूसरे गेम में भी वह मैच जीतने की स्थिति तक पहुंच गईं और उनके पास मुकाबला खत्म करने के चार मैच पॉइंट थे, लेकिन भारतीय खिलाड़ी इन मौकों को जीत में नहीं बदल सकीं। यहीं से मुकाबले का रुख बदल गया और घरेलू दर्शकों के सामने खेल रहीं युफेई ने वापसी करते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली।
पहले गेम में सिंधु ने शुरुआत से ही आक्रामक बैडमिंटन खेला। लंबी रैलियों के साथ उन्होंने कोर्ट के दोनों किनारों का इस्तेमाल किया और युफेई को लगातार दबाव में रखा। भारतीय खिलाड़ी ने नेट के पास भी नियंत्रण बनाए रखा और मौका मिलते ही तेज स्मैश से अंक निकाले। युफेई ने बीच-बीच में वापसी की कोशिश की, लेकिन सिंधु ने अपनी बढ़त हाथ से नहीं जाने दी। उन्होंने पहला गेम 21-16 से जीतकर मुकाबले में 1-0 की बढ़त बना ली। जापान ओपन की खिताबी जीत के बाद जिस आत्मविश्वास के साथ सिंधु चीन पहुंची थीं, उसका असर शुरुआती गेम में साफ नजर आया।
दूसरा गेम मुकाबले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा साबित हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए लंबी रैलियां देखने को मिलीं। सिंधु ने दबाव के बावजूद बढ़त बनाई और मुकाबले को खत्म करने के करीब पहुंच गईं। उनके पास चार मैच पॉइंट आए, लेकिन चेन युफेई ने हर बार खुद को मुकाबले में बनाए रखा। सिंधु इन मौकों पर निर्णायक अंक हासिल नहीं कर सकीं। युफेई ने लगातार दबाव बनाते हुए स्कोर बराबर किया और फिर अतिरिक्त अंकों तक पहुंचे गेम को 22-20 से अपने नाम कर लिया। इस गेम के साथ मुकाबला 1-1 की बराबरी पर आ गया।
चार मैच पॉइंट गंवाना सिंधु के लिए भारी पड़ा। दूसरी तरफ युफेई का आत्मविश्वास बढ़ गया और निर्णायक तीसरे गेम में मुकाबला फिर बेहद करीबी रहा। दोनों खिलाड़ियों ने लंबी रैलियों में एक-दूसरे की फिटनेस और धैर्य की परीक्षा ली। सिंधु ने कई बार अंतर कम किया, लेकिन अंतिम हिस्से में चीनी खिलाड़ी ने अहम अंकों पर बेहतर नियंत्रण रखा। स्कोर जब निर्णायक स्थिति में पहुंचा तो युफेई ने गलतियां कम कीं और 21-18 से तीसरा गेम जीतते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया।
इस हार के साथ सिंधु का चीन ओपन सुपर-1000 में सफर समाप्त हो गया। हालांकि हाल के टूर्नामेंटों में उनका प्रदर्शन भारतीय बैडमिंटन के लिए अहम माना जा रहा है। जापान ओपन सुपर-750 में खिताबी सफलता हासिल करने के बाद उनसे चीन में भी लंबा सफर तय करने की उम्मीद थी। चांगझोउ में वह प्री-क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं, लेकिन चेन युफेई के खिलाफ मिले निर्णायक मौकों को भुना नहीं पाने के कारण उन्हें बाहर होना पड़ा।
चेन युफेई के खिलाफ यह मुकाबला इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि वह अपने घरेलू कोर्ट पर खेल रही थीं। वर्ल्ड नंबर-4 चीनी खिलाड़ी ने पहला गेम गंवाने के बाद जिस तरह वापसी की, उसमें उनका अनुभव दिखाई दिया। खासकर दूसरे गेम में मैच पॉइंट बचाना मुकाबले का टर्निंग पॉइंट रहा। सिंधु के पास सीधे दो गेम में मुकाबला समाप्त करने का अवसर था, लेकिन युफेई ने लगातार चार मैच पॉइंट बचाकर मुकाबले को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया।
सिंधु की हार के बीच गुरुवार को क्रिकेट से जुड़ी एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आई। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने 2027 में होने वाले वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल के आयोजन स्थल और तारीखों की घोषणा कर दी है। WTC 2027 का खिताबी मुकाबला लंदन के ऐतिहासिक द ओवल मैदान पर 9 से 13 जून के बीच खेला जाएगा। इसके साथ एक रिजर्व डे की व्यवस्था किए जाने की संभावना भी टूर्नामेंट की खेल परिस्थितियों के अनुसार रहेगी।
द ओवल लगातार दूसरी बार वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल की मेजबानी करेगा। इससे पहले 2023 का WTC फाइनल भी इसी मैदान पर खेला गया था। उस मुकाबले में भारत और ऑस्ट्रेलिया आमने-सामने थे। ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय टीम को हराकर वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम किया था। अब 2027 में एक बार फिर टेस्ट क्रिकेट की दो शीर्ष टीमें इसी मैदान पर विश्व चैंपियन बनने के लिए उतरेंगी।
2027 का WTC फाइनल ऐतिहासिक लिहाज से भी खास होगा। उस वर्ष टेस्ट क्रिकेट अपने 150 साल पूरे करेगा। पहला आधिकारिक टेस्ट मुकाबला 1877 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया था। ऐसे में टेस्ट क्रिकेट की डेढ़ सदी पूरी होने वाले साल में होने वाला वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल इस प्रारूप के लिए विशेष आयोजन माना जा रहा है।
इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड को आने वाले तीन WTC फाइनल की मेजबानी भी दी गई है। जानकारी के अनुसार 2027 के साथ 2029 और 2031 के वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल भी इंग्लैंड में आयोजित किए जाएंगे। हालांकि बाद के दोनों फाइनल के लिए संबंधित मैदानों और विस्तृत कार्यक्रम को लेकर आगे और जानकारी जारी की जाएगी।
वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप की शुरुआत टेस्ट क्रिकेट को एक व्यवस्थित वैश्विक प्रतियोगिता का स्वरूप देने के उद्देश्य से की गई थी। इसमें निर्धारित चक्र के दौरान अलग-अलग टेस्ट सीरीज से टीमों को अंक मिलते हैं और अंक प्रतिशत के आधार पर शीर्ष दो टीमें फाइनल में पहुंचती हैं। इंग्लैंड के मैदान अब तक WTC फाइनल के प्रमुख आयोजन स्थल रहे हैं। 2021 में पहला फाइनल साउथैम्प्टन में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ था, जबकि 2023 में भारत और ऑस्ट्रेलिया द ओवल में आमने-सामने थे।
