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अडाणी एनर्जी का मुनाफा 124% बढ़ा, पहली तिमाही में ₹1,149 करोड़ पहुंचा
बिजनेस न्यूज
अप्रैल-जून में कंपनी का रेवेन्यू 42.4% बढ़कर ₹9,711 करोड़; ट्रांसमिशन, स्मार्ट मीटरिंग और एनर्जी सॉल्यूशंस कारोबार में मजबूत बढ़त
अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। अप्रैल से जून के दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 124% बढ़कर 1,149 करोड़ रुपए पहुंच गया। यानी एक साल में कंपनी का मुनाफा दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। कंपनी की कुल कमाई बढ़ने के साथ रेगुलेटरी डेफरल इनकम में आए सकारात्मक बदलाव का भी मुनाफे पर असर पड़ा। नतीजे सामने आने के बाद शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक में तेजी देखने को मिली।
पहली तिमाही में अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का ऑपरेशनल रेवेन्यू 9,711 करोड़ रुपए रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 6,819 करोड़ रुपए का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया था। इस हिसाब से सालाना आधार पर इसमें करीब 42.4% की बढ़ोतरी हुई है। ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार, बिजली वितरण कारोबार और नए एनर्जी प्रोजेक्ट्स से कंपनी की आय को मजबूती मिली। अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट में भी इस दौरान ग्रोथ दर्ज की गई।
ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी का EBITDA भी बढ़ा है। अप्रैल-जून तिमाही में EBITDA करीब 30% की बढ़ोतरी के साथ 3,008 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। हालांकि कंपनी के EBITDA मार्जिन में कुछ गिरावट देखने को मिली है। पिछले साल इसी तिमाही में मार्जिन 33.9% था, जो इस बार घटकर करीब 31% रह गया। यानी कंपनी का ऑपरेशनल मुनाफा बढ़ा, लेकिन रेवेन्यू के मुकाबले इसकी हिस्सेदारी थोड़ी कम हुई है।
कंपनी के नेट प्रॉफिट में आई तेज बढ़ोतरी के पीछे रेगुलेटरी डेफरल इनकम में हुआ बदलाव भी अहम रहा। पहली तिमाही में कंपनी ने 29 करोड़ रुपए की रेगुलेटरी डेफरल इनकम दर्ज की है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 504 करोड़ रुपए का रेगुलेटरी डेफरल खर्च उठाना पड़ा था। एक साल में खर्च की स्थिति से आय की तरफ आए इस बड़े बदलाव ने कंपनी के मुनाफे को सहारा दिया। यही वजह है कि नेट प्रॉफिट की ग्रोथ रेवेन्यू की तुलना में काफी ज्यादा रही।
पावर और यूटिलिटी सेक्टर में रेगुलेटरी डेफरल का सीधा संबंध बिजली दरों और नियामकीय व्यवस्था से होता है। कई बार कंपनियों की लागत बढ़ जाती है, लेकिन उसका पूरा असर तुरंत टैरिफ में शामिल नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में नियामक भविष्य में उस रकम को टैरिफ के जरिए वसूलने की अनुमति दे सकता है। इसे कंपनी अपने खातों में रेगुलेटरी डेफरल आय या खर्च के रूप में दर्ज करती है। इस आंकड़े में बड़ा बदलाव कंपनी के नेट प्रॉफिट को सीधे प्रभावित कर सकता है।
अडाणी एनर्जी के ट्रांसमिशन कारोबार ने पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया। इस सेगमेंट का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 52.4% बढ़कर 3,335.3 करोड़ रुपए पहुंच गया। भारत में बिजली की बढ़ती मांग और नए पावर प्रोजेक्ट्स के कारण ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है। रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स को राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय ग्रिड से जोड़ने के लिए भी नई लाइनों की जरूरत बढ़ी है। कंपनी इसी क्षेत्र में कई परियोजनाओं पर काम कर रही है।
डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस में भी कंपनी की आय बढ़ी, हालांकि इसकी रफ्तार ट्रांसमिशन कारोबार की तुलना में कम रही। इस सेगमेंट का रेवेन्यू करीब 5% बढ़कर 3,520.4 करोड़ रुपए हो गया। बिजली वितरण कंपनी के प्रमुख और स्थिर कारोबारों में शामिल है। इसमें उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने, नेटवर्क मेंटेनेंस, बिलिंग और दूसरी सेवाएं शामिल होती हैं। बिजली की घरेलू और औद्योगिक मांग में बदलाव का सीधा असर इस कारोबार की आय पर पड़ता है।
स्मार्ट मीटरिंग कारोबार में कंपनी ने सबसे तेज ग्रोथ में से एक दर्ज की है। इस सेगमेंट का रेवेन्यू सालाना आधार पर 200% से ज्यादा बढ़कर करीब 346.9 करोड़ रुपए पहुंच गया। देशभर में पारंपरिक बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने का काम तेजी से चल रहा है। स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत का डिजिटल डेटा उपलब्ध होता है और बिलिंग प्रक्रिया ज्यादा ऑटोमेटेड हो सकती है। अडाणी एनर्जी इस तेजी से बढ़ते बाजार में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है।
कंपनी के एनर्जी सॉल्यूशंस प्लेटफॉर्म ने भी पहली तिमाही में बड़ी छलांग लगाई है। इस कारोबार से मिलने वाला रेवेन्यू नौ गुना से ज्यादा बढ़कर करीब 1,906.8 करोड़ रुपए हो गया। यह बढ़ोतरी कंपनी की कुल रेवेन्यू ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती दिखाई दे रही है। पारंपरिक ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार के अलावा कंपनी नए एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट पर भी फोकस बढ़ा रही है। आने वाले समय में यह बिजनेस कंपनी की आय में बड़ी हिस्सेदारी जोड़ सकता है।
भारत में बिजली की मांग लगातार बढ़ने के कारण पावर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े निवेश की जरूरत बन रही है। शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और बढ़ती घरेलू खपत इसके प्रमुख कारण हैं। इसके साथ सौर और पवन ऊर्जा की उत्पादन क्षमता भी तेजी से बढ़ाई जा रही है। नई रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं से पैदा बिजली को मांग वाले इलाकों तक पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क जरूरी है। इससे इस सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर बन रहे हैं।
तिमाही नतीजों के बाद अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयर में भी हलचल देखने को मिली। कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 3% की तेजी के साथ 1,781.2 रुपए के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि ऊपरी स्तर पर यह तेजी पूरी तरह कायम नहीं रह सकी। दिन का कारोबार समाप्त होने तक शेयर करीब 1,737 रुपए पर बंद हुआ। निवेशकों की नजर अब कंपनी की आने वाली तिमाहियों की कमाई और नए प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर रहेगी।
कंपनी के नतीजों में नेट प्रॉफिट की 124% बढ़ोतरी बड़ा आंकड़ा है, लेकिन इसके साथ रेगुलेटरी डेफरल में हुए बदलाव को भी समझना जरूरी है। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 42.4% बढ़ा, जबकि EBITDA में करीब 30% की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले साल 504 करोड़ रुपए के रेगुलेटरी डेफरल खर्च की तुलना में इस बार 29 करोड़ रुपए की आय रही। यानी इस मद में सालाना आधार पर करीब 533 करोड़ रुपए का सकारात्मक अंतर आया। इसका असर सीधे कंपनी के अंतिम मुनाफे पर दिखाई दिया।
आने वाली तिमाहियों में स्मार्ट मीटरिंग कंपनी के लिए महत्वपूर्ण ग्रोथ बिजनेस बना रह सकता है। देश में करोड़ों पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया चल रही है। इस कारोबार में केवल मीटर लगाने का काम नहीं होता, बल्कि डेटा मैनेजमेंट, डिजिटल बिलिंग, कम्युनिकेशन सिस्टम और लंबे समय तक नेटवर्क संचालन भी शामिल है। बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिलने से कंपनियों को कई वर्षों तक आय का स्रोत मिल सकता है। अडाणी एनर्जी ने इसी सेगमेंट में पहली तिमाही में 200% से ज्यादा ग्रोथ दर्ज की है।
30 जून को समाप्त तिमाही में कंपनी के अलग-अलग कारोबारों की रफ्तार अलग-अलग रही। ट्रांसमिशन सेगमेंट 52.4% बढ़ा, जबकि डिस्ट्रीब्यूशन में करीब 5% की वृद्धि दर्ज हुई। स्मार्ट मीटरिंग कारोबार में 200% से ज्यादा की छलांग लगी और एनर्जी सॉल्यूशंस प्लेटफॉर्म का रेवेन्यू नौ गुना से ज्यादा बढ़ गया। कुल ऑपरेशनल रेवेन्यू पिछले साल के 6,819 करोड़ रुपए से बढ़कर 9,711 करोड़ रुपए हो गया। कंपनी अब पावर ट्रांसमिशन के साथ डिजिटल और स्मार्ट एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी तेजी से अपना कारोबार बढ़ा रही है।
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अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। अप्रैल से जून के दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 124% बढ़कर 1,149 करोड़ रुपए पहुंच गया। यानी एक साल में कंपनी का मुनाफा दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। कंपनी की कुल कमाई बढ़ने के साथ रेगुलेटरी डेफरल इनकम में आए सकारात्मक बदलाव का भी मुनाफे पर असर पड़ा। नतीजे सामने आने के बाद शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक में तेजी देखने को मिली।
पहली तिमाही में अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का ऑपरेशनल रेवेन्यू 9,711 करोड़ रुपए रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 6,819 करोड़ रुपए का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया था। इस हिसाब से सालाना आधार पर इसमें करीब 42.4% की बढ़ोतरी हुई है। ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार, बिजली वितरण कारोबार और नए एनर्जी प्रोजेक्ट्स से कंपनी की आय को मजबूती मिली। अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट में भी इस दौरान ग्रोथ दर्ज की गई।
ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी का EBITDA भी बढ़ा है। अप्रैल-जून तिमाही में EBITDA करीब 30% की बढ़ोतरी के साथ 3,008 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। हालांकि कंपनी के EBITDA मार्जिन में कुछ गिरावट देखने को मिली है। पिछले साल इसी तिमाही में मार्जिन 33.9% था, जो इस बार घटकर करीब 31% रह गया। यानी कंपनी का ऑपरेशनल मुनाफा बढ़ा, लेकिन रेवेन्यू के मुकाबले इसकी हिस्सेदारी थोड़ी कम हुई है।
कंपनी के नेट प्रॉफिट में आई तेज बढ़ोतरी के पीछे रेगुलेटरी डेफरल इनकम में हुआ बदलाव भी अहम रहा। पहली तिमाही में कंपनी ने 29 करोड़ रुपए की रेगुलेटरी डेफरल इनकम दर्ज की है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 504 करोड़ रुपए का रेगुलेटरी डेफरल खर्च उठाना पड़ा था। एक साल में खर्च की स्थिति से आय की तरफ आए इस बड़े बदलाव ने कंपनी के मुनाफे को सहारा दिया। यही वजह है कि नेट प्रॉफिट की ग्रोथ रेवेन्यू की तुलना में काफी ज्यादा रही।
पावर और यूटिलिटी सेक्टर में रेगुलेटरी डेफरल का सीधा संबंध बिजली दरों और नियामकीय व्यवस्था से होता है। कई बार कंपनियों की लागत बढ़ जाती है, लेकिन उसका पूरा असर तुरंत टैरिफ में शामिल नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में नियामक भविष्य में उस रकम को टैरिफ के जरिए वसूलने की अनुमति दे सकता है। इसे कंपनी अपने खातों में रेगुलेटरी डेफरल आय या खर्च के रूप में दर्ज करती है। इस आंकड़े में बड़ा बदलाव कंपनी के नेट प्रॉफिट को सीधे प्रभावित कर सकता है।
अडाणी एनर्जी के ट्रांसमिशन कारोबार ने पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया। इस सेगमेंट का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 52.4% बढ़कर 3,335.3 करोड़ रुपए पहुंच गया। भारत में बिजली की बढ़ती मांग और नए पावर प्रोजेक्ट्स के कारण ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है। रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स को राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय ग्रिड से जोड़ने के लिए भी नई लाइनों की जरूरत बढ़ी है। कंपनी इसी क्षेत्र में कई परियोजनाओं पर काम कर रही है।
डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस में भी कंपनी की आय बढ़ी, हालांकि इसकी रफ्तार ट्रांसमिशन कारोबार की तुलना में कम रही। इस सेगमेंट का रेवेन्यू करीब 5% बढ़कर 3,520.4 करोड़ रुपए हो गया। बिजली वितरण कंपनी के प्रमुख और स्थिर कारोबारों में शामिल है। इसमें उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने, नेटवर्क मेंटेनेंस, बिलिंग और दूसरी सेवाएं शामिल होती हैं। बिजली की घरेलू और औद्योगिक मांग में बदलाव का सीधा असर इस कारोबार की आय पर पड़ता है।
स्मार्ट मीटरिंग कारोबार में कंपनी ने सबसे तेज ग्रोथ में से एक दर्ज की है। इस सेगमेंट का रेवेन्यू सालाना आधार पर 200% से ज्यादा बढ़कर करीब 346.9 करोड़ रुपए पहुंच गया। देशभर में पारंपरिक बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने का काम तेजी से चल रहा है। स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत का डिजिटल डेटा उपलब्ध होता है और बिलिंग प्रक्रिया ज्यादा ऑटोमेटेड हो सकती है। अडाणी एनर्जी इस तेजी से बढ़ते बाजार में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है।
कंपनी के एनर्जी सॉल्यूशंस प्लेटफॉर्म ने भी पहली तिमाही में बड़ी छलांग लगाई है। इस कारोबार से मिलने वाला रेवेन्यू नौ गुना से ज्यादा बढ़कर करीब 1,906.8 करोड़ रुपए हो गया। यह बढ़ोतरी कंपनी की कुल रेवेन्यू ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती दिखाई दे रही है। पारंपरिक ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार के अलावा कंपनी नए एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट पर भी फोकस बढ़ा रही है। आने वाले समय में यह बिजनेस कंपनी की आय में बड़ी हिस्सेदारी जोड़ सकता है।
भारत में बिजली की मांग लगातार बढ़ने के कारण पावर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े निवेश की जरूरत बन रही है। शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और बढ़ती घरेलू खपत इसके प्रमुख कारण हैं। इसके साथ सौर और पवन ऊर्जा की उत्पादन क्षमता भी तेजी से बढ़ाई जा रही है। नई रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं से पैदा बिजली को मांग वाले इलाकों तक पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क जरूरी है। इससे इस सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर बन रहे हैं।
तिमाही नतीजों के बाद अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयर में भी हलचल देखने को मिली। कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 3% की तेजी के साथ 1,781.2 रुपए के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि ऊपरी स्तर पर यह तेजी पूरी तरह कायम नहीं रह सकी। दिन का कारोबार समाप्त होने तक शेयर करीब 1,737 रुपए पर बंद हुआ। निवेशकों की नजर अब कंपनी की आने वाली तिमाहियों की कमाई और नए प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर रहेगी।
कंपनी के नतीजों में नेट प्रॉफिट की 124% बढ़ोतरी बड़ा आंकड़ा है, लेकिन इसके साथ रेगुलेटरी डेफरल में हुए बदलाव को भी समझना जरूरी है। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 42.4% बढ़ा, जबकि EBITDA में करीब 30% की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले साल 504 करोड़ रुपए के रेगुलेटरी डेफरल खर्च की तुलना में इस बार 29 करोड़ रुपए की आय रही। यानी इस मद में सालाना आधार पर करीब 533 करोड़ रुपए का सकारात्मक अंतर आया। इसका असर सीधे कंपनी के अंतिम मुनाफे पर दिखाई दिया।
आने वाली तिमाहियों में स्मार्ट मीटरिंग कंपनी के लिए महत्वपूर्ण ग्रोथ बिजनेस बना रह सकता है। देश में करोड़ों पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया चल रही है। इस कारोबार में केवल मीटर लगाने का काम नहीं होता, बल्कि डेटा मैनेजमेंट, डिजिटल बिलिंग, कम्युनिकेशन सिस्टम और लंबे समय तक नेटवर्क संचालन भी शामिल है। बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिलने से कंपनियों को कई वर्षों तक आय का स्रोत मिल सकता है। अडाणी एनर्जी ने इसी सेगमेंट में पहली तिमाही में 200% से ज्यादा ग्रोथ दर्ज की है।
30 जून को समाप्त तिमाही में कंपनी के अलग-अलग कारोबारों की रफ्तार अलग-अलग रही। ट्रांसमिशन सेगमेंट 52.4% बढ़ा, जबकि डिस्ट्रीब्यूशन में करीब 5% की वृद्धि दर्ज हुई। स्मार्ट मीटरिंग कारोबार में 200% से ज्यादा की छलांग लगी और एनर्जी सॉल्यूशंस प्लेटफॉर्म का रेवेन्यू नौ गुना से ज्यादा बढ़ गया। कुल ऑपरेशनल रेवेन्यू पिछले साल के 6,819 करोड़ रुपए से बढ़कर 9,711 करोड़ रुपए हो गया। कंपनी अब पावर ट्रांसमिशन के साथ डिजिटल और स्मार्ट एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी तेजी से अपना कारोबार बढ़ा रही है।
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