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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव विश्लेषण
सीए अखिलेश जैन
धन्यवाद, पश्चिम बंगाल, धन्यवाद
धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद ..... न केवल धन्यवाद, बारम्बार धन्यवाद, हार्दिक बधाइयाँ आपके दूरदृष्टिपूर्ण, साहसिक सुविचारित व स्पष्ट जनादेश के लिए, एक बार फिर से बधाई व धन्यवाद, वास्तव में पश्चिम बंगाल की माताओं, बहनों, बेटियों, मतदाताओं, कार्यकर्ताओं, चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न कराने में जी-जान से जुटे शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों, चुनाव आयोग, सुरक्षा बलों, न्याय का झण्डा बुलन्द कर लोकतंत्र को जड़ों को मजबूती प्रदान करने वाले ज्ञात/अज्ञात सभी महानुभावों, विशिष्ट जनों, दैवीय शक्तियों के साथ-साथ भारत के संविधान निर्माताओं को जिन्होंने सत्ता को असली चाबी मतदाताओं को सोंपी है। विवेकपूर्ण, साहासिक व दूरदृष्टिपूर्ण निर्णय कि जितनी भी प्रशंसा की जावे वो छोटी ही प्रतीत होती है।
जब सत्ता की असली बागड़ोर संविधान निर्माताओं ने मतदाताओं को सौंपी है, तो जिस प्रकार हर अंधेरी रात की समय-सीमा समाप्ति के साथ-साथ सूर्योदय निश्चित है उसी प्रकार निरंकुश, अत्याचारी, भ्रष्टाचारी, दुराचारी, सनातन विरोधी, माताओं-बहनों -बेटियों, जो साक्षात् देवी रूप हैं, को सुरक्षा प्रदान करने में अक्षम, लोकतंत्र का उपहास उड़ाने वाली, देश की आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक प्रगति में बाधक सत्ता का अन्त होना भी सुनिश्चित ही था।
चुनाव प्रारम्भ होने की बेला से चुनाव आयोग की चुनाव सम्पन्न होने की अधिसूचना जारी होने तक का मतदाताओं, कार्यकर्ताओं का समीप से अध्ययन करने का अवसर प्राप्त हुआ, मतदाताओं, कार्यकर्ताओं की मानसिक स्थिति को पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ। मतदाताओं, कार्यकर्ताओं से संवाद में चुनाव परिणामों की तस्वीर स्पष्ट परिलक्षित हो रही थी, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मतदान की तिथि तक का समय एक कल्प की तरह लम्बा लग रहा है।
इतनी बेसब्री मतदान के लिए, 90% से अधिक का मतदान, ऐसा प्रतीत हो रहा है, जैसे मतदाताओं में मतदान की होड़ लग गई हो, देश-विदेश में बैठे पश्चिम बंगाल के मतदाता लाईन लगाकर, बेखौफ, मतदान के लिए जोश, जुनुन के साथ लाईन में लग गये, 40 डिग्री सेंटीग्रेट का तापमान पर महिलाओं ने शत-प्रतिशत मतदान का निर्णय कर लिया। चाहे शहर हो, देहात हो, छोटा सा गांव, कस्बा, सूदूर जंगल में छोटी सी बस्ती हो, हर जगह शत-प्रतिशत मतदान की होड़ लगी थी, अगर आप इस मतदान के जोश की भावनाओं को समझ सकें तो चुनाव परिणाम मतदान की लाईन देखने मात्र से ही स्पष्ट था। मतदाताओं में राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के प्रति विद्रोह, आक्रोश की ज्वाला धधक रही थी, जो उन्होंने मतदान शत-प्रतिशत करने को ठान कर अपने अन्तर्मन की ज्वाला को शान्त करने का मार्ग बनाया। ऐसा क्यों?
सत्तारूढ़ दल के प्रति इतना आक्रोश क्यो?
2-3 विधायकों वाली पार्टी 77 विधायकों तक पहुंचती है, फिर सीधे 207 विधायकों पर पहुँचती है। ऐसी स्वीकार्यता में बढ़ोत्तरी क्यो?
राजनैतिक विश्लेशकों का उत्तर भी बहुत स्पष्ट है व बहुत आसान है -कि SIR के कारण 90 लाख से अधिक घुसपैठिये मतदान प्रक्रिया से बाहर हो गये, सनातन का विरोध कर ध्रुवीकरण करने के प्रयासों से आम मतदाता चिढ़ गया था, आतंक, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, गुण्डागर्दी, महिलाओं के प्रति अपराधों का बड़ता ग्राफ, बेरोजगारी, तुष्टीकरण व भविष्य अंधकारमय देख रहा था आम मतदाता। केंद्रीय बलों की उपस्थिति के कारण आम मतदाता वोट डालने का साहस कर पाया, इत्यादि, इत्यादि ......
पर एक और अति महत्वपूर्ण तर्क भी मतदाताओं को शांत नहीं बैठने दे रहा था, वो था, ममता सरकार में पश्चिम बंगाल मोदी सरकार के विकसित भारत@ 2047 व 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दौड़ में शामिल नहीं हो रहा था, और अगर सरकार न बदली होती तो पश्चिम बंगाल भविष्य में भारत के नक्शे पर गरीब, बीमारू व उन्नति के पैमाने पर मार्ग के किनारे पर दुखी, लाचार सा खड़ा मिलता, बच्चों का भविष्य क्या होता, बच्चों को रोजी-रोटी की तलाश में देशभर में भटकना पड़ता और बेरोजगारी दर बढ़ते ही अपराध चरम पर पहुँच जाता अर्थात राज्य का आर्थिक ढांचा चरमराते ही भविष्य अंधकारमय हो जावेगा। भारी निराशा हावी थी, एफडीआई पश्चिम बंगाल का रास्ता भूल चुका था। इंवेस्टमेंट ने पश्चिम बंगाल से अपना नाता तोड़ लिया था।
देशी विदेशी पर्यटक, धार्मिक पर्यटन, राज्य से निर्यात, कृषि, औद्योगिक उत्पादन, शिक्षा, स्वास्थ्य, अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा सब हाँसिये पर जा चुका था। केन्द्रीय योजनाओं के लिए ममता सरकार दरवाजे बंद कर चुकी थी, इस प्रकार के प्रश्नों से न केवल पश्चिम बंगाल का नुकसान हो रहा था, बल्कि जिस तरह शरीर का कोई एक अंग बीमार हो जावे तो पूरा शरीर बीमार हो जाता है, उसी प्रकार देश के एक राज्य का प्रगति की दौड़ में पिछड़ना पूरे देश की प्रगति में घातक सिद्ध होता है। इसी कारण पश्चिम बंगाल के मतदाता, कार्यकर्ता, माताऐं-बहनें-बेटियाँ बहुत आदर के पात्र हैं जिन्होंने समय रहते सटीक निर्णय कर राज्य की बागड़ोर श्री नरेन्द्र मोदी जी को सोंप कर न केवल पश्चिम बंगाल को बर्बादी से बचा लिया बल्कि विकसित भारत@ 2047 व 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए खुले दिल से अपना सहयोग, समर्थन व आशीर्वाद प्रदान किया। अब श्री नरेन्द्र मोदी जी की जिम्मेदारी इस विश्वास को पूरा करने के लिए और भी अधिक बड़ गई है। आने वाली राज्य सरकार को जनता की भावनाओं, अपेक्षाओं व विश्वास को केन्द्र मे रख कर बिना थके-बिना रुके चहुमुखी विकास के लिए अत्यधिक प्रयास करने होंगे।
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव विश्लेषण
सीए अखिलेश जैन
धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद ..... न केवल धन्यवाद, बारम्बार धन्यवाद, हार्दिक बधाइयाँ आपके दूरदृष्टिपूर्ण, साहसिक सुविचारित व स्पष्ट जनादेश के लिए, एक बार फिर से बधाई व धन्यवाद, वास्तव में पश्चिम बंगाल की माताओं, बहनों, बेटियों, मतदाताओं, कार्यकर्ताओं, चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न कराने में जी-जान से जुटे शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों, चुनाव आयोग, सुरक्षा बलों, न्याय का झण्डा बुलन्द कर लोकतंत्र को जड़ों को मजबूती प्रदान करने वाले ज्ञात/अज्ञात सभी महानुभावों, विशिष्ट जनों, दैवीय शक्तियों के साथ-साथ भारत के संविधान निर्माताओं को जिन्होंने सत्ता को असली चाबी मतदाताओं को सोंपी है। विवेकपूर्ण, साहासिक व दूरदृष्टिपूर्ण निर्णय कि जितनी भी प्रशंसा की जावे वो छोटी ही प्रतीत होती है।
जब सत्ता की असली बागड़ोर संविधान निर्माताओं ने मतदाताओं को सौंपी है, तो जिस प्रकार हर अंधेरी रात की समय-सीमा समाप्ति के साथ-साथ सूर्योदय निश्चित है उसी प्रकार निरंकुश, अत्याचारी, भ्रष्टाचारी, दुराचारी, सनातन विरोधी, माताओं-बहनों -बेटियों, जो साक्षात् देवी रूप हैं, को सुरक्षा प्रदान करने में अक्षम, लोकतंत्र का उपहास उड़ाने वाली, देश की आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक प्रगति में बाधक सत्ता का अन्त होना भी सुनिश्चित ही था।
चुनाव प्रारम्भ होने की बेला से चुनाव आयोग की चुनाव सम्पन्न होने की अधिसूचना जारी होने तक का मतदाताओं, कार्यकर्ताओं का समीप से अध्ययन करने का अवसर प्राप्त हुआ, मतदाताओं, कार्यकर्ताओं की मानसिक स्थिति को पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ। मतदाताओं, कार्यकर्ताओं से संवाद में चुनाव परिणामों की तस्वीर स्पष्ट परिलक्षित हो रही थी, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मतदान की तिथि तक का समय एक कल्प की तरह लम्बा लग रहा है।
इतनी बेसब्री मतदान के लिए, 90% से अधिक का मतदान, ऐसा प्रतीत हो रहा है, जैसे मतदाताओं में मतदान की होड़ लग गई हो, देश-विदेश में बैठे पश्चिम बंगाल के मतदाता लाईन लगाकर, बेखौफ, मतदान के लिए जोश, जुनुन के साथ लाईन में लग गये, 40 डिग्री सेंटीग्रेट का तापमान पर महिलाओं ने शत-प्रतिशत मतदान का निर्णय कर लिया। चाहे शहर हो, देहात हो, छोटा सा गांव, कस्बा, सूदूर जंगल में छोटी सी बस्ती हो, हर जगह शत-प्रतिशत मतदान की होड़ लगी थी, अगर आप इस मतदान के जोश की भावनाओं को समझ सकें तो चुनाव परिणाम मतदान की लाईन देखने मात्र से ही स्पष्ट था। मतदाताओं में राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के प्रति विद्रोह, आक्रोश की ज्वाला धधक रही थी, जो उन्होंने मतदान शत-प्रतिशत करने को ठान कर अपने अन्तर्मन की ज्वाला को शान्त करने का मार्ग बनाया। ऐसा क्यों?
सत्तारूढ़ दल के प्रति इतना आक्रोश क्यो?
2-3 विधायकों वाली पार्टी 77 विधायकों तक पहुंचती है, फिर सीधे 207 विधायकों पर पहुँचती है। ऐसी स्वीकार्यता में बढ़ोत्तरी क्यो?
राजनैतिक विश्लेशकों का उत्तर भी बहुत स्पष्ट है व बहुत आसान है -कि SIR के कारण 90 लाख से अधिक घुसपैठिये मतदान प्रक्रिया से बाहर हो गये, सनातन का विरोध कर ध्रुवीकरण करने के प्रयासों से आम मतदाता चिढ़ गया था, आतंक, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, गुण्डागर्दी, महिलाओं के प्रति अपराधों का बड़ता ग्राफ, बेरोजगारी, तुष्टीकरण व भविष्य अंधकारमय देख रहा था आम मतदाता। केंद्रीय बलों की उपस्थिति के कारण आम मतदाता वोट डालने का साहस कर पाया, इत्यादि, इत्यादि ......
पर एक और अति महत्वपूर्ण तर्क भी मतदाताओं को शांत नहीं बैठने दे रहा था, वो था, ममता सरकार में पश्चिम बंगाल मोदी सरकार के विकसित भारत@ 2047 व 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दौड़ में शामिल नहीं हो रहा था, और अगर सरकार न बदली होती तो पश्चिम बंगाल भविष्य में भारत के नक्शे पर गरीब, बीमारू व उन्नति के पैमाने पर मार्ग के किनारे पर दुखी, लाचार सा खड़ा मिलता, बच्चों का भविष्य क्या होता, बच्चों को रोजी-रोटी की तलाश में देशभर में भटकना पड़ता और बेरोजगारी दर बढ़ते ही अपराध चरम पर पहुँच जाता अर्थात राज्य का आर्थिक ढांचा चरमराते ही भविष्य अंधकारमय हो जावेगा। भारी निराशा हावी थी, एफडीआई पश्चिम बंगाल का रास्ता भूल चुका था। इंवेस्टमेंट ने पश्चिम बंगाल से अपना नाता तोड़ लिया था।
देशी विदेशी पर्यटक, धार्मिक पर्यटन, राज्य से निर्यात, कृषि, औद्योगिक उत्पादन, शिक्षा, स्वास्थ्य, अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा सब हाँसिये पर जा चुका था। केन्द्रीय योजनाओं के लिए ममता सरकार दरवाजे बंद कर चुकी थी, इस प्रकार के प्रश्नों से न केवल पश्चिम बंगाल का नुकसान हो रहा था, बल्कि जिस तरह शरीर का कोई एक अंग बीमार हो जावे तो पूरा शरीर बीमार हो जाता है, उसी प्रकार देश के एक राज्य का प्रगति की दौड़ में पिछड़ना पूरे देश की प्रगति में घातक सिद्ध होता है। इसी कारण पश्चिम बंगाल के मतदाता, कार्यकर्ता, माताऐं-बहनें-बेटियाँ बहुत आदर के पात्र हैं जिन्होंने समय रहते सटीक निर्णय कर राज्य की बागड़ोर श्री नरेन्द्र मोदी जी को सोंप कर न केवल पश्चिम बंगाल को बर्बादी से बचा लिया बल्कि विकसित भारत@ 2047 व 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए खुले दिल से अपना सहयोग, समर्थन व आशीर्वाद प्रदान किया। अब श्री नरेन्द्र मोदी जी की जिम्मेदारी इस विश्वास को पूरा करने के लिए और भी अधिक बड़ गई है। आने वाली राज्य सरकार को जनता की भावनाओं, अपेक्षाओं व विश्वास को केन्द्र मे रख कर बिना थके-बिना रुके चहुमुखी विकास के लिए अत्यधिक प्रयास करने होंगे।
