परिमल नाथवानी कौन हैं? जिनकी जीत ने झारखंड राज्यसभा चुनाव में बदल दिया पूरा समीकरण

झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने अपनी सीट सुरक्षित रखी, लेकिन दूसरी सीट पर जो नतीजा सामने आया उसने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हराकर राज्यसभा पहुंचने का रास्ता बना लिया। इस जीत के साथ ही परिमल नाथवानी चौथी बार संसद के उच्च सदन में पहुंचेंगे। चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की होने लगी कि आखिर परिमल नाथवानी कौन हैं और उन्होंने ऐसा क्या किया कि इंडिया गठबंधन की गणित ही बिगड़ गई।

गुरुवार शाम जैसे ही मतगणना पूरी हुई, तस्वीर साफ हो गई। परिमल नाथवानी को 28 वोट मिले जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा 20 वोटों पर सिमट गए। आंकड़ों ने साफ संकेत दिया कि कहीं न कहीं क्रॉस वोटिंग हुई है। क्योंकि विधानसभा में मौजूद विधायकों की संख्या के हिसाब से इंडिया गठबंधन के पास बेहतर स्थिति मानी जा रही थी। चुनाव नतीजे सामने आने के बाद गठबंधन के भीतर भी सवाल उठने लगे कि आखिर वोट किस तरफ चले गए।

परिमल नाथवानी का नाम झारखंड की राजनीति में नया नहीं है। मूल रूप से गुजरात से आने वाले नाथवानी लंबे समय से उद्योग और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं। उन्हें देश के बड़े कॉर्पोरेट समूहों में से एक रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी के रूप में भी जाना जाता है। राजनीति में उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति की रही है जिनके संबंध अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं से रहे हैं। यही वजह है कि वे कई बार अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में समर्थन जुटाने में सफल रहे हैं।

नाथवानी पहली बार वर्ष 2008 में झारखंड से राज्यसभा पहुंचे थे। उस समय भी उनका चुनाव काफी चर्चा में रहा था। इसके बाद उन्होंने राज्य की राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में अपनी सक्रिय मौजूदगी बनाए रखी। झारखंड में खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कई कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी देखने को मिलती रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले डेढ़ दशक में उन्होंने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत संपर्क विकसित किए हैं, जिसका फायदा उन्हें समय-समय पर मिला।

इस बार का चुनाव इसलिए भी खास रहा क्योंकि परिमल नाथवानी किसी राजनीतिक दल के अधिकृत उम्मीदवार नहीं थे। वे निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें एनडीए का समर्थन प्राप्त था। दूसरी तरफ कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा इंडिया गठबंधन की ओर से चुनाव लड़ रहे थे। विधानसभा में गठबंधन के आंकड़े मजबूत माने जा रहे थे, इसलिए शुरुआती आकलनों में मुकाबला कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दे रहा था। लेकिन मतदान के बाद समीकरण बदलते नजर आए।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मतदान के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग ने चुनाव का रुख पूरी तरह बदल दिया। झारखंड विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन मिलकर इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं। बावजूद इसके कांग्रेस उम्मीदवार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका। चुनाव परिणाम आने के बाद राजद और माले के कुछ विधायकों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी दल ने खुलकर जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।

परिणाम घोषित होने के बाद परिमल नाथवानी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने इसे भावुक क्षण बताते हुए कहा कि राज्यसभा सदस्य के रूप में चौथी बार सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने झारखंड को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि यहीं से उनकी संसदीय यात्रा शुरू हुई थी और एक बार फिर राज्य का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व का भी आभार जताया।

झारखंड की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिणाम सिर्फ एक राज्यसभा सीट की जीत-हार नहीं है। इसके राजनीतिक संदेश भी काफी व्यापक हैं। चुनाव ने यह दिखाया है कि विधानसभा में संख्या बल हमेशा अंतिम नतीजे की गारंटी नहीं होता। यदि राजनीतिक एकजुटता में कहीं कमजोरी हो या विधायकों के बीच मतभेद हों तो चुनावी परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं।

राज्यसभा चुनाव के बाद अब सबसे बड़ा सवाल इंडिया गठबंधन के भीतर उठ रहा है। आखिर वह कौन से विधायक थे जिन्होंने अपेक्षित लाइन से हटकर मतदान किया। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। वहीं परिमल नाथवानी की जीत ने यह भी साबित कर दिया है कि झारखंड की राजनीति में उनकी पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है।

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21 Jun 2026 By दैनिक जागरण

परिमल नाथवानी कौन हैं? जिनकी जीत ने झारखंड राज्यसभा चुनाव में बदल दिया पूरा समीकरण

झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने अपनी सीट सुरक्षित रखी, लेकिन दूसरी सीट पर जो नतीजा सामने आया उसने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हराकर राज्यसभा पहुंचने का रास्ता बना लिया। इस जीत के साथ ही परिमल नाथवानी चौथी बार संसद के उच्च सदन में पहुंचेंगे। चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की होने लगी कि आखिर परिमल नाथवानी कौन हैं और उन्होंने ऐसा क्या किया कि इंडिया गठबंधन की गणित ही बिगड़ गई।

गुरुवार शाम जैसे ही मतगणना पूरी हुई, तस्वीर साफ हो गई। परिमल नाथवानी को 28 वोट मिले जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा 20 वोटों पर सिमट गए। आंकड़ों ने साफ संकेत दिया कि कहीं न कहीं क्रॉस वोटिंग हुई है। क्योंकि विधानसभा में मौजूद विधायकों की संख्या के हिसाब से इंडिया गठबंधन के पास बेहतर स्थिति मानी जा रही थी। चुनाव नतीजे सामने आने के बाद गठबंधन के भीतर भी सवाल उठने लगे कि आखिर वोट किस तरफ चले गए।

परिमल नाथवानी का नाम झारखंड की राजनीति में नया नहीं है। मूल रूप से गुजरात से आने वाले नाथवानी लंबे समय से उद्योग और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं। उन्हें देश के बड़े कॉर्पोरेट समूहों में से एक रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी के रूप में भी जाना जाता है। राजनीति में उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति की रही है जिनके संबंध अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं से रहे हैं। यही वजह है कि वे कई बार अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में समर्थन जुटाने में सफल रहे हैं।

नाथवानी पहली बार वर्ष 2008 में झारखंड से राज्यसभा पहुंचे थे। उस समय भी उनका चुनाव काफी चर्चा में रहा था। इसके बाद उन्होंने राज्य की राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में अपनी सक्रिय मौजूदगी बनाए रखी। झारखंड में खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कई कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी देखने को मिलती रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले डेढ़ दशक में उन्होंने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत संपर्क विकसित किए हैं, जिसका फायदा उन्हें समय-समय पर मिला।

इस बार का चुनाव इसलिए भी खास रहा क्योंकि परिमल नाथवानी किसी राजनीतिक दल के अधिकृत उम्मीदवार नहीं थे। वे निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें एनडीए का समर्थन प्राप्त था। दूसरी तरफ कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा इंडिया गठबंधन की ओर से चुनाव लड़ रहे थे। विधानसभा में गठबंधन के आंकड़े मजबूत माने जा रहे थे, इसलिए शुरुआती आकलनों में मुकाबला कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दे रहा था। लेकिन मतदान के बाद समीकरण बदलते नजर आए।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मतदान के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग ने चुनाव का रुख पूरी तरह बदल दिया। झारखंड विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन मिलकर इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं। बावजूद इसके कांग्रेस उम्मीदवार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका। चुनाव परिणाम आने के बाद राजद और माले के कुछ विधायकों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी दल ने खुलकर जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।

परिणाम घोषित होने के बाद परिमल नाथवानी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने इसे भावुक क्षण बताते हुए कहा कि राज्यसभा सदस्य के रूप में चौथी बार सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने झारखंड को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि यहीं से उनकी संसदीय यात्रा शुरू हुई थी और एक बार फिर राज्य का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व का भी आभार जताया।

झारखंड की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिणाम सिर्फ एक राज्यसभा सीट की जीत-हार नहीं है। इसके राजनीतिक संदेश भी काफी व्यापक हैं। चुनाव ने यह दिखाया है कि विधानसभा में संख्या बल हमेशा अंतिम नतीजे की गारंटी नहीं होता। यदि राजनीतिक एकजुटता में कहीं कमजोरी हो या विधायकों के बीच मतभेद हों तो चुनावी परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं।

राज्यसभा चुनाव के बाद अब सबसे बड़ा सवाल इंडिया गठबंधन के भीतर उठ रहा है। आखिर वह कौन से विधायक थे जिन्होंने अपेक्षित लाइन से हटकर मतदान किया। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। वहीं परिमल नाथवानी की जीत ने यह भी साबित कर दिया है कि झारखंड की राजनीति में उनकी पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/election/who-is-parimal-nathwani-whose-victory-changed-the-entire-equation/article-56565

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