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रतलाम ट्रिपल मर्डर: तीन दोषियों को तिहरा आजीवन कारावास
Digital Desk
रतलाम कोर्ट ने राजीव नगर ट्रिपल मर्डर केस में तीन आरोपियों को तिहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मास्टरमाइंड दिलीप देवल 2020 में एनकाउंटर में मारा गया था।
रतलाम की सप्तम अपर सत्र न्यायालय ने छोटी दीपावली की रात हुए राजीव नगर ट्रिपल मर्डर केस में आखिरकार फैसला सुना दिया। न्यायाधीश राजेश नामदेव की कोर्ट ने तीन दोषियों — अनुराग उर्फ बॉबी (33), गोलू उर्फ गौरव (29) और लाला भाबोर (27) — को हत्या और लूट के मामले में तिहरे आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड दिलीप देवल घटना के महज नौ दिन बाद पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था।
25 नवंबर 2020 की रात — छोटी दीपावली — रतलाम के राजीव नगर इलाके में गोविंद सोलंकी, उनकी पत्नी शारदा और बेटी दिव्या की उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। तीनों के सिर में गोलियां मारी गई थीं। वारदात का खुलासा अगली सुबह तब हुआ जब ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाली किराएदार नर्स ज्वेलिका को अपनी एक्टिवा स्कूटी बाहर नहीं मिली। स्कूटी के बारे में पूछने जब वह मकान मालिक के कमरे में गई तो अंदर का मंजर देख दंग रह गई — तीनों शव जमीन पर पड़े थे।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो इंद्रा नगर के नूरी गेस्ट हाउस तक धागा पहुंचा। वहां के फुटेज के आधार पर सबसे पहले अनुराग उर्फ बॉबी को पकड़ा गया, जिसने पूछताछ में दिलीप देवल, लाला भाबोर और गोलू बिलवाल का नाम लिया। बाकी दोनों भी जल्द गिरफ्त में आ गए। मुख्य आरोपी दिलीप देवल को पकड़ने गई पुलिस टीम पर उसने फायरिंग की, जवाबी कार्रवाई में 4 दिसंबर 2020 को वह मारा गया।
कोर्ट में सजा का आधार बना वैज्ञानिक साक्ष्य। अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार के मुताबिक 111 भौतिक वस्तुएं, 210 दस्तावेज और 33 गवाह पेश किए गए। आरोपियों के कपड़ों और चप्पलों पर मृतकों का डीएनए मिला। भागने में इस्तेमाल स्कूटी के हैंडल पर लाला का डीएनए पाया गया। बैलेस्टिक जांच ने साबित किया कि दिलीप के घर से बरामद पिस्टल से ही गोलियां दागी गई थीं।
दिलीप देवल की आपराधिक पृष्ठभूमि कोई सामान्य नहीं थी। वह गुजरात के दाहोद में हत्या के मामले में जेल में बंद था और पैरोल से फरार होकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे रतलाम में रह रहा था। उसने छोटी दीपावली की रात इसलिए चुनी थी ताकि पटाखों के शोर में गोलियों की आवाज दब जाए। पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने 18 मई 2020 को रतलाम के कस्तूरबा नगर में भी एक और हत्या की थी।
एनकाउंटर के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिलीप देवल को 'नरपिशाच' करार दिया था। तीनों जीवित आरोपी 2 दिसंबर 2020 से जेल में हैं और अब कोर्ट के फैसले के बाद उनकी सजा पक्की हो गई है।
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रतलाम ट्रिपल मर्डर: तीन दोषियों को तिहरा आजीवन कारावास
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रतलाम की सप्तम अपर सत्र न्यायालय ने छोटी दीपावली की रात हुए राजीव नगर ट्रिपल मर्डर केस में आखिरकार फैसला सुना दिया। न्यायाधीश राजेश नामदेव की कोर्ट ने तीन दोषियों — अनुराग उर्फ बॉबी (33), गोलू उर्फ गौरव (29) और लाला भाबोर (27) — को हत्या और लूट के मामले में तिहरे आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड दिलीप देवल घटना के महज नौ दिन बाद पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था।
25 नवंबर 2020 की रात — छोटी दीपावली — रतलाम के राजीव नगर इलाके में गोविंद सोलंकी, उनकी पत्नी शारदा और बेटी दिव्या की उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। तीनों के सिर में गोलियां मारी गई थीं। वारदात का खुलासा अगली सुबह तब हुआ जब ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाली किराएदार नर्स ज्वेलिका को अपनी एक्टिवा स्कूटी बाहर नहीं मिली। स्कूटी के बारे में पूछने जब वह मकान मालिक के कमरे में गई तो अंदर का मंजर देख दंग रह गई — तीनों शव जमीन पर पड़े थे।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो इंद्रा नगर के नूरी गेस्ट हाउस तक धागा पहुंचा। वहां के फुटेज के आधार पर सबसे पहले अनुराग उर्फ बॉबी को पकड़ा गया, जिसने पूछताछ में दिलीप देवल, लाला भाबोर और गोलू बिलवाल का नाम लिया। बाकी दोनों भी जल्द गिरफ्त में आ गए। मुख्य आरोपी दिलीप देवल को पकड़ने गई पुलिस टीम पर उसने फायरिंग की, जवाबी कार्रवाई में 4 दिसंबर 2020 को वह मारा गया।
कोर्ट में सजा का आधार बना वैज्ञानिक साक्ष्य। अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार के मुताबिक 111 भौतिक वस्तुएं, 210 दस्तावेज और 33 गवाह पेश किए गए। आरोपियों के कपड़ों और चप्पलों पर मृतकों का डीएनए मिला। भागने में इस्तेमाल स्कूटी के हैंडल पर लाला का डीएनए पाया गया। बैलेस्टिक जांच ने साबित किया कि दिलीप के घर से बरामद पिस्टल से ही गोलियां दागी गई थीं।
दिलीप देवल की आपराधिक पृष्ठभूमि कोई सामान्य नहीं थी। वह गुजरात के दाहोद में हत्या के मामले में जेल में बंद था और पैरोल से फरार होकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे रतलाम में रह रहा था। उसने छोटी दीपावली की रात इसलिए चुनी थी ताकि पटाखों के शोर में गोलियों की आवाज दब जाए। पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने 18 मई 2020 को रतलाम के कस्तूरबा नगर में भी एक और हत्या की थी।
एनकाउंटर के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिलीप देवल को 'नरपिशाच' करार दिया था। तीनों जीवित आरोपी 2 दिसंबर 2020 से जेल में हैं और अब कोर्ट के फैसले के बाद उनकी सजा पक्की हो गई है।
