बड़ा मंगल 2026: अधिक मास के दुर्लभ संयोग से बढ़ा धार्मिक उत्साह, श्रद्धालुओं ने की विशेष पूजा

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पांचवें बड़े मंगल पर हनुमान मंदिरों में उमड़ी भीड़, भंडारों और सेवा कार्यों से दिनभर गूंजा भक्तिमय माहौल

ज्येष्ठ माह के पावन मंगलवार को उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में बड़े मंगल का पांचवां पर्व श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाया गया। इस वर्ष बड़े मंगल का महत्व सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक माना जा रहा है, क्योंकि अधिक मास के दुर्लभ संयोग के कारण बड़े मंगल की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा संयोग बहुत कम देखने को मिलता है, इसलिए इस बार श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। मंगलवार सुबह से ही प्रमुख हनुमान मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए लंबी कतारें लग गईं। कई स्थानों पर भक्त तड़के ही मंदिर पहुंच गए और भगवान हनुमान के दर्शन कर विशेष अनुष्ठानों में भाग लिया। लखनऊ, अयोध्या, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और आसपास के कई शहरों में बड़े मंगल को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। मंदिरों को फूलों और आकर्षक रोशनी से सजाया गया था। सुबह मंगला आरती के साथ धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई और दिनभर भक्ति का माहौल बना रहा। मंदिर परिसरों में हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ, सुंदरकांड और विशेष पूजा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान को सिंदूर, चमेली का तेल, नारियल, लड्डू और बूंदी का भोग अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।

धार्मिक विद्वानों का कहना है कि ज्येष्ठ माह के मंगलवारों का विशेष संबंध भगवान हनुमान की आराधना से माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि बड़े मंगल के अवसर पर लाखों लोग व्रत रखते हैं और पूरे दिन धार्मिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। इस वर्ष अधिक मास के कारण बड़े मंगल की संख्या बढ़ने से भक्तों को अतिरिक्त अवसर प्राप्त हुए हैं। मंगलवार को कई स्थानों पर सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से विशाल भंडारों का आयोजन भी किया गया। गर्मी के मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं और राहगीरों के लिए शीतल जल, शरबत, फल और भोजन की व्यवस्था की गई। शहरों की सड़कों और मंदिरों के आसपास सेवा शिविर लगाए गए, जहां स्वयंसेवक दिनभर लोगों की सहायता करते नजर आए। कई स्थानों पर चिकित्सा सहायता केंद्र और विश्राम स्थल भी बनाए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

बड़े मंगल की परंपरा विशेष रूप से अवध क्षेत्र में काफी लोकप्रिय मानी जाती है। इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा कई सौ वर्षों पुरानी है और समय के साथ इसका स्वरूप और व्यापक होता गया। आज यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक सहभागिता और सेवा भावना का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। बड़े मंगल के अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ आकर सेवा कार्यों में भाग लेते हैं और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं। इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है। मंदिर प्रबंधन समितियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार अधिक लोग पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। कई परिवारों ने पूरे बड़े मंगल क्रम के दौरान व्रत रखने और नियमित रूप से हनुमान मंदिर जाने का संकल्प लिया है। युवाओं और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भी धार्मिक आयोजनों की एक प्रमुख विशेषता बनकर सामने आई है।

धार्मिक जानकारों का मानना है कि आधुनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच लोगों का आध्यात्मिकता की ओर झुकाव बढ़ रहा है। बड़े मंगल जैसे पर्व न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और सकारात्मक सोच का संदेश भी देते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष इस पर्व का महत्व बढ़ता जा रहा है और अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ रहे हैं। शाम के समय अधिकांश मंदिरों में विशेष आरती और भजन संध्या का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और भगवान हनुमान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। मंदिर परिसरों में देर रात तक भक्तों की आवाजाही बनी रही और पूरा वातावरण भक्ति रस में डूबा नजर आया।

भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग भी पूरी तरह सतर्क रहा। प्रमुख मंदिरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई थी। यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन का कहना है कि बड़े मंगल की आगामी तिथियों पर भी इसी तरह की व्यवस्थाएं जारी रहेंगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। धार्मिक संगठनों का मानना है कि बड़े मंगल की शेष तिथियों पर भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मंदिरों में पहुंचेगी। ऐसे में मंदिर समितियां पहले से ही तैयारियों में जुटी हुई हैं। अधिक मास के इस दुर्लभ संयोग ने बड़े मंगल 2026 को विशेष बना दिया है और श्रद्धालुओं के बीच इसकी चर्चा लगातार बनी हुई है।

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02 Jun 2026 By Vaishnavi.J

बड़ा मंगल 2026: अधिक मास के दुर्लभ संयोग से बढ़ा धार्मिक उत्साह, श्रद्धालुओं ने की विशेष पूजा

राशिफल

ज्येष्ठ माह के पावन मंगलवार को उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में बड़े मंगल का पांचवां पर्व श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाया गया। इस वर्ष बड़े मंगल का महत्व सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक माना जा रहा है, क्योंकि अधिक मास के दुर्लभ संयोग के कारण बड़े मंगल की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा संयोग बहुत कम देखने को मिलता है, इसलिए इस बार श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। मंगलवार सुबह से ही प्रमुख हनुमान मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए लंबी कतारें लग गईं। कई स्थानों पर भक्त तड़के ही मंदिर पहुंच गए और भगवान हनुमान के दर्शन कर विशेष अनुष्ठानों में भाग लिया। लखनऊ, अयोध्या, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और आसपास के कई शहरों में बड़े मंगल को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। मंदिरों को फूलों और आकर्षक रोशनी से सजाया गया था। सुबह मंगला आरती के साथ धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई और दिनभर भक्ति का माहौल बना रहा। मंदिर परिसरों में हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ, सुंदरकांड और विशेष पूजा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान को सिंदूर, चमेली का तेल, नारियल, लड्डू और बूंदी का भोग अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।

धार्मिक विद्वानों का कहना है कि ज्येष्ठ माह के मंगलवारों का विशेष संबंध भगवान हनुमान की आराधना से माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि बड़े मंगल के अवसर पर लाखों लोग व्रत रखते हैं और पूरे दिन धार्मिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। इस वर्ष अधिक मास के कारण बड़े मंगल की संख्या बढ़ने से भक्तों को अतिरिक्त अवसर प्राप्त हुए हैं। मंगलवार को कई स्थानों पर सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से विशाल भंडारों का आयोजन भी किया गया। गर्मी के मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं और राहगीरों के लिए शीतल जल, शरबत, फल और भोजन की व्यवस्था की गई। शहरों की सड़कों और मंदिरों के आसपास सेवा शिविर लगाए गए, जहां स्वयंसेवक दिनभर लोगों की सहायता करते नजर आए। कई स्थानों पर चिकित्सा सहायता केंद्र और विश्राम स्थल भी बनाए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

बड़े मंगल की परंपरा विशेष रूप से अवध क्षेत्र में काफी लोकप्रिय मानी जाती है। इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा कई सौ वर्षों पुरानी है और समय के साथ इसका स्वरूप और व्यापक होता गया। आज यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक सहभागिता और सेवा भावना का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। बड़े मंगल के अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ आकर सेवा कार्यों में भाग लेते हैं और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं। इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है। मंदिर प्रबंधन समितियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार अधिक लोग पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। कई परिवारों ने पूरे बड़े मंगल क्रम के दौरान व्रत रखने और नियमित रूप से हनुमान मंदिर जाने का संकल्प लिया है। युवाओं और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भी धार्मिक आयोजनों की एक प्रमुख विशेषता बनकर सामने आई है।

धार्मिक जानकारों का मानना है कि आधुनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच लोगों का आध्यात्मिकता की ओर झुकाव बढ़ रहा है। बड़े मंगल जैसे पर्व न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और सकारात्मक सोच का संदेश भी देते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष इस पर्व का महत्व बढ़ता जा रहा है और अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ रहे हैं। शाम के समय अधिकांश मंदिरों में विशेष आरती और भजन संध्या का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और भगवान हनुमान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। मंदिर परिसरों में देर रात तक भक्तों की आवाजाही बनी रही और पूरा वातावरण भक्ति रस में डूबा नजर आया।

भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग भी पूरी तरह सतर्क रहा। प्रमुख मंदिरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई थी। यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन का कहना है कि बड़े मंगल की आगामी तिथियों पर भी इसी तरह की व्यवस्थाएं जारी रहेंगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। धार्मिक संगठनों का मानना है कि बड़े मंगल की शेष तिथियों पर भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मंदिरों में पहुंचेगी। ऐसे में मंदिर समितियां पहले से ही तैयारियों में जुटी हुई हैं। अधिक मास के इस दुर्लभ संयोग ने बड़े मंगल 2026 को विशेष बना दिया है और श्रद्धालुओं के बीच इसकी चर्चा लगातार बनी हुई है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/bada-mangal-2026-religious-enthusiasm-increased-due-to-the-rare/article-54753

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