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जबलपुर से मुंबई और बेंगलुरु उड़ानों में कटौती, इंडिगो ने जारी किया नया शेड्यूल
Digital Desk
ईंधन लागत बढ़ने का असर हवाई सेवाओं पर, यात्रियों को किराया और उपलब्धता दोनों की चिंता
जबलपुर से हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले दिनों में कुछ मुश्किलें बढ़ सकती हैं। निजी विमानन कंपनी इंडिगो ने जबलपुर से मुंबई और बेंगलुरु के लिए संचालित अपनी उड़ानों के शेड्यूल में बदलाव करते हुए उड़ानों की संख्या कम करने का फैसला किया है। कंपनी की ओर से जारी नए शेड्यूल के अनुसार अब ये उड़ानें सप्ताह के चुनिंदा दिनों में ही संचालित होंगी। अब तक प्रतिदिन उपलब्ध रहने वाली कुछ सेवाएं सीमित कर दी गई हैं, जिससे यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना पहले से अधिक सावधानी से बनानी होगी।
एविएशन सेक्टर पर बढ़ती ईंधन लागत का असर लगातार दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव के कारण विमानन कंपनियों का परिचालन खर्च बढ़ा है। इसका असर अब छोटे और मध्यम शहरों को जोड़ने वाली घरेलू उड़ानों पर भी देखने को मिल रहा है। जबलपुर जैसे शहर, जहां हवाई यात्रा की मांग लगातार बढ़ रही थी, वहां भी उड़ानों में कटौती का निर्णय यात्रियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
इंडिगो द्वारा जारी नए शेड्यूल के मुताबिक 16 जून से 30 जून के बीच जबलपुर से मुंबई और बेंगलुरु की उड़ानों में बदलाव लागू रहेगा। पहले जहां मुंबई और बेंगलुरु के लिए नियमित उड़ानें संचालित हो रही थीं, वहीं अब उनकी संख्या घटा दी गई है। नए कार्यक्रम के अनुसार मुंबई से जबलपुर और जबलपुर से मुंबई की उड़ानें सप्ताह में केवल चार दिन संचालित होंगी। इसी तरह बेंगलुरु रूट पर भी उड़ानों की संख्या सीमित कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार अब जबलपुर से बेंगलुरु के लिए उड़ान सप्ताह में चार दिन सोमवार, बुधवार, शनिवार और रविवार को उपलब्ध रहेगी। वहीं मुंबई के लिए उड़ानें मंगलवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को संचालित की जाएंगी। इससे उन यात्रियों को विशेष रूप से परेशानी हो सकती है जो व्यवसाय, शिक्षा, चिकित्सा या अन्य जरूरी कारणों से नियमित रूप से इन शहरों की यात्रा करते हैं।
उड़ानों में कटौती का असर केवल समय-सारणी तक सीमित नहीं है। यात्रियों की जेब पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ने लगा है। विमानन कंपनियों ने कई रूटों पर किराए में बढ़ोतरी की है। जबलपुर से मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और इंदौर जाने वाले यात्रियों को अब पहले की तुलना में अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। कई मामलों में टिकट की कीमतों में चार हजार से आठ हजार रुपये तक का अंतर देखा जा रहा है। अचानक बढ़े किराए ने मध्यम वर्गीय यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है।
यात्रियों का कहना है कि पहले से सीमित विकल्पों वाले शहरों में उड़ानों की संख्या कम होने से टिकट मिलना भी कठिन हो सकता है। यदि किसी दिन की उड़ान रद्द हो जाए या सीटें भर जाएं तो यात्रियों को अगले उपलब्ध दिन का इंतजार करना पड़ सकता है। इससे व्यापारिक यात्राओं और जरूरी कामों पर भी असर पड़ सकता है। खासतौर पर दक्षिण भारत और महाराष्ट्र जाने वाले यात्रियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एयरलाइन कंपनियां लगातार बढ़ती परिचालन लागत से जूझ रही हैं। विमान ईंधन की कीमतें कुल खर्च का बड़ा हिस्सा होती हैं। जब ईंधन महंगा होता है तो कंपनियां लागत कम करने के लिए कम लाभ वाले रूटों पर उड़ानों की संख्या घटाने का विकल्प चुनती हैं। इसके अलावा विमान उपलब्धता, रखरखाव खर्च और यात्री भार भी किसी रूट के संचालन को प्रभावित करते हैं।
हालांकि विमानन कंपनियों का कहना है कि यह बदलाव स्थायी नहीं है। यदि आने वाले समय में यात्रियों की संख्या बढ़ती है और परिचालन लागत नियंत्रित होती है तो उड़ानों की संख्या फिर से बढ़ाई जा सकती है। एयरलाइन उद्योग लगातार बाजार की स्थिति और मांग का मूल्यांकन करता है और उसी आधार पर अपने नेटवर्क में बदलाव करता है। फिलहाल कंपनियां उन रूटों पर अधिक ध्यान दे रही हैं जहां यात्रियों की संख्या और राजस्व अपेक्षाकृत अधिक है।
जबलपुर शहर पिछले कुछ वर्षों में हवाई संपर्क के मामले में तेजी से विकसित हुआ है। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और इंदौर जैसे प्रमुख शहरों से सीधी उड़ानों ने यात्रियों को बड़ी सुविधा दी थी। ऐसे में उड़ानों की संख्या में कमी को लेकर स्थानीय व्यापारिक संगठनों और यात्रियों ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि बेहतर हवाई संपर्क किसी भी शहर के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए जरूरी होता है। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा की योजना पहले से बनाएं और टिकट समय रहते बुक कर लें। उड़ानों की सीमित उपलब्धता और बढ़ते किराए को देखते हुए अंतिम समय में टिकट लेना महंगा पड़ सकता है।
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जबलपुर से मुंबई और बेंगलुरु उड़ानों में कटौती, इंडिगो ने जारी किया नया शेड्यूल
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जबलपुर से हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले दिनों में कुछ मुश्किलें बढ़ सकती हैं। निजी विमानन कंपनी इंडिगो ने जबलपुर से मुंबई और बेंगलुरु के लिए संचालित अपनी उड़ानों के शेड्यूल में बदलाव करते हुए उड़ानों की संख्या कम करने का फैसला किया है। कंपनी की ओर से जारी नए शेड्यूल के अनुसार अब ये उड़ानें सप्ताह के चुनिंदा दिनों में ही संचालित होंगी। अब तक प्रतिदिन उपलब्ध रहने वाली कुछ सेवाएं सीमित कर दी गई हैं, जिससे यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना पहले से अधिक सावधानी से बनानी होगी।
एविएशन सेक्टर पर बढ़ती ईंधन लागत का असर लगातार दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव के कारण विमानन कंपनियों का परिचालन खर्च बढ़ा है। इसका असर अब छोटे और मध्यम शहरों को जोड़ने वाली घरेलू उड़ानों पर भी देखने को मिल रहा है। जबलपुर जैसे शहर, जहां हवाई यात्रा की मांग लगातार बढ़ रही थी, वहां भी उड़ानों में कटौती का निर्णय यात्रियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
इंडिगो द्वारा जारी नए शेड्यूल के मुताबिक 16 जून से 30 जून के बीच जबलपुर से मुंबई और बेंगलुरु की उड़ानों में बदलाव लागू रहेगा। पहले जहां मुंबई और बेंगलुरु के लिए नियमित उड़ानें संचालित हो रही थीं, वहीं अब उनकी संख्या घटा दी गई है। नए कार्यक्रम के अनुसार मुंबई से जबलपुर और जबलपुर से मुंबई की उड़ानें सप्ताह में केवल चार दिन संचालित होंगी। इसी तरह बेंगलुरु रूट पर भी उड़ानों की संख्या सीमित कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार अब जबलपुर से बेंगलुरु के लिए उड़ान सप्ताह में चार दिन सोमवार, बुधवार, शनिवार और रविवार को उपलब्ध रहेगी। वहीं मुंबई के लिए उड़ानें मंगलवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को संचालित की जाएंगी। इससे उन यात्रियों को विशेष रूप से परेशानी हो सकती है जो व्यवसाय, शिक्षा, चिकित्सा या अन्य जरूरी कारणों से नियमित रूप से इन शहरों की यात्रा करते हैं।
उड़ानों में कटौती का असर केवल समय-सारणी तक सीमित नहीं है। यात्रियों की जेब पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ने लगा है। विमानन कंपनियों ने कई रूटों पर किराए में बढ़ोतरी की है। जबलपुर से मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और इंदौर जाने वाले यात्रियों को अब पहले की तुलना में अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। कई मामलों में टिकट की कीमतों में चार हजार से आठ हजार रुपये तक का अंतर देखा जा रहा है। अचानक बढ़े किराए ने मध्यम वर्गीय यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है।
यात्रियों का कहना है कि पहले से सीमित विकल्पों वाले शहरों में उड़ानों की संख्या कम होने से टिकट मिलना भी कठिन हो सकता है। यदि किसी दिन की उड़ान रद्द हो जाए या सीटें भर जाएं तो यात्रियों को अगले उपलब्ध दिन का इंतजार करना पड़ सकता है। इससे व्यापारिक यात्राओं और जरूरी कामों पर भी असर पड़ सकता है। खासतौर पर दक्षिण भारत और महाराष्ट्र जाने वाले यात्रियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एयरलाइन कंपनियां लगातार बढ़ती परिचालन लागत से जूझ रही हैं। विमान ईंधन की कीमतें कुल खर्च का बड़ा हिस्सा होती हैं। जब ईंधन महंगा होता है तो कंपनियां लागत कम करने के लिए कम लाभ वाले रूटों पर उड़ानों की संख्या घटाने का विकल्प चुनती हैं। इसके अलावा विमान उपलब्धता, रखरखाव खर्च और यात्री भार भी किसी रूट के संचालन को प्रभावित करते हैं।
हालांकि विमानन कंपनियों का कहना है कि यह बदलाव स्थायी नहीं है। यदि आने वाले समय में यात्रियों की संख्या बढ़ती है और परिचालन लागत नियंत्रित होती है तो उड़ानों की संख्या फिर से बढ़ाई जा सकती है। एयरलाइन उद्योग लगातार बाजार की स्थिति और मांग का मूल्यांकन करता है और उसी आधार पर अपने नेटवर्क में बदलाव करता है। फिलहाल कंपनियां उन रूटों पर अधिक ध्यान दे रही हैं जहां यात्रियों की संख्या और राजस्व अपेक्षाकृत अधिक है।
जबलपुर शहर पिछले कुछ वर्षों में हवाई संपर्क के मामले में तेजी से विकसित हुआ है। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और इंदौर जैसे प्रमुख शहरों से सीधी उड़ानों ने यात्रियों को बड़ी सुविधा दी थी। ऐसे में उड़ानों की संख्या में कमी को लेकर स्थानीय व्यापारिक संगठनों और यात्रियों ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि बेहतर हवाई संपर्क किसी भी शहर के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए जरूरी होता है। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा की योजना पहले से बनाएं और टिकट समय रहते बुक कर लें। उड़ानों की सीमित उपलब्धता और बढ़ते किराए को देखते हुए अंतिम समय में टिकट लेना महंगा पड़ सकता है।
