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शनिवार के उपाय: शनि शांति और सकारात्मकता के पारंपरिक तरीके
धर्म डेस्क
शनिवार को शनि देव की पूजा का धार्मिक महत्व, पीपल के पेड़ की पूजा और परिक्रमा की परंपरा को निभाना विषेश माना जाता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। कई लोग इस दिन कुछ सरल उपाय करके शनि दोष, साढ़ेसाती और जीवन की बाधाओं को कम करने की कामना करते हैं।
पीपल के पेड़ की पूजा
शनिवार सुबह पीपल के पेड़ को स्पर्श कर उसकी जड़ में जल चढ़ाया जाता है और सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है। मान्यता है कि शाम को 7 बार परिक्रमा करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
शनिदेव को अर्पण
स्नान के बाद सरसों का तेल, काले तिल और नीले फूल अर्पित कर “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप किया जाता है। इसे अनुशासन और धैर्य बढ़ाने का प्रतीकात्मक अभ्यास भी माना जाता है।
जरूरतमंदों को काले तिल, कं
दान और सेवा
बल, जूते-चप्पल या भोजन दान करने की परंपरा है। सेवा और दान को सामाजिक सहानुभूति और करुणा बढ़ाने का माध्यम माना जाता है।
हनुमान जी की उपासना
शनिवार को हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ भी किया जाता है। गुड़ और चने का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा प्रचलित है।
कुछ लोग शनिवार रात को मुख्य द्वार पर लौंग और कपूर जलाते हैं। वहीं काले घोड़े को चना खिलाना या काला कोयला प्रवाहित करना भी लोक-मान्यताओं का हिस्सा है।
क्या न करें
मान्यता के अनुसार शनिवार को बाल-नाखून काटने और लोहे की वस्तु खरीदने से परहेज किया जाता है।
नोट: ये उपाय आस्था और परंपरा पर आधारित हैं। इन्हें सकारात्मक सोच, अनुशासन और सेवा भाव के साथ करने पर लोग मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास महसूस करते हैं।
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