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AI समिट विवाद पर देशभर में विरोध, भाजपा सड़कों पर उतरी; राहुल गांधी को काले झंडे
नेशनल न्यूज
AI समिट विवाद पर देशभर में विरोध, भाजपा सड़कों पर उतरी; राहुल गांधी को काले झंडे
नई दिल्ली में आयोजित AI समिट में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शन किए। राहुल गांधी के काफिले को भिवंडी में काले झंडे दिखाए गए, जबकि दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर नारेबाजी की गई।
विरोध प्रदर्शन उस घटना के बाद शुरू हुए, जब इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने 20 फरवरी को भारत मंडपम में आयोजित AI समिट के दौरान भारत-अमेरिका व्यापार मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मौजूद प्रतिनिधियों के सामने कुछ कार्यकर्ताओं ने टी-शर्ट और पोस्टर के जरिए विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया।
पुलिस के अनुसार प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने समिट में प्रवेश के लिए पूर्व पंजीकरण कराया था और बाद में कार्यक्रम स्थल के भीतर विरोध किया। मामले में कथित रूप से पुलिसकर्मियों के घायल होने और सार्वजनिक व्यवस्था बाधित होने की जांच की जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर विरोध को देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया, जबकि विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग के रूप में प्रस्तुत किया। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न शहरों में प्रदर्शन कर कांग्रेस नेतृत्व से माफी की मांग की।
महाराष्ट्र में मुलुंड क्षेत्र से गुजरते समय राहुल गांधी के काफिले के विरोध का घटनाक्रम भी चर्चा में रहा। वे एक न्यायालयी प्रक्रिया के सिलसिले में भिवंडी जा रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था के बीच विरोध शांतिपूर्वक नियंत्रित किया गया।
AI समिट, जिसमें अनेक देशों के प्रतिनिधि और तकनीकी कंपनियां शामिल हुईं, का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वैश्विक उपयोग और सहयोग को बढ़ावा देना बताया गया था। कार्यक्रम के दौरान हुए विरोध और उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रम ने इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को घरेलू राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजनीतिक असहमति का प्रदर्शन और उसके बाद की प्रतिक्रियाएं भारत की लोकतांत्रिक राजनीति की जटिलता को दर्शाती हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां समिट से जुड़े घटनाक्रम और संबंधित शिकायतों की जांच में जुटी हैं, जबकि राजनीतिक दल अपने-अपने रुख पर कायम हैं।
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