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फर्जी Susie Wiles से संपर्क में आए ब्रिटिश PM एंडी बर्नहम
अंतराष्ट्रीय न्यूज
व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ बनकर भेजे गए मैसेज का जवाब दिया, शक होने पर मामला सामने आया; ब्रिटिश दूतावास ने अमेरिका को जानकारी दी
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम कथित तौर पर ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आ गए, जो खुद को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स बताकर संदेश भेज रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, बर्नहम ने उस व्यक्ति के साथ कुछ मैसेज का आदान-प्रदान भी किया, लेकिन बातचीत के दौरान उन्हें शक हो गया कि सामने वाला वास्तव में वाइल्स नहीं है। मामला सामने आने के बाद ब्रिटिश सरकार में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी। ब्रिटिश दूतावास ने इस बारे में वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस को भी जानकारी दी। ब्रिटेन सरकार ने मामले पर सार्वजनिक तौर पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की है और डाउनिंग स्ट्रीट ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर टिप्पणी करने से इनकार किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, बर्नहम और फर्जी पहचान इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के बीच बातचीत बहुत लंबी नहीं थी। मामले से जुड़े एक अधिकारी ने इसे केवल कुछ संदेशों तक सीमित बताया और कहा कि बातचीत में कोई संवेदनशील या महत्वपूर्ण जानकारी साझा नहीं हुई। हालांकि ब्रिटिश अधिकारियों ने घटना को हल्के में नहीं लिया। वजह यह है कि संपर्क उस व्यक्ति ने किया था, जिसने खुद को अमेरिकी राष्ट्रपति के बेहद करीबी अधिकारी के रूप में पेश किया था। ऐसे मामलों में सिर्फ बातचीत की सामग्री ही नहीं, बल्कि यह भी देखा जाता है कि किसी बाहरी व्यक्ति ने वरिष्ठ राजनीतिक लोगों तक पहुंच कैसे बनाई।
यह घटना सुसी वाइल्स के नाम से पहले सामने आ चुके एक ऐसे ही मामले की याद दिलाती है। 2025 में अमेरिकी अधिकारियों ने उन संदेशों और कॉल की जांच शुरू की थी, जिनमें एक व्यक्ति खुद को वाइल्स बताकर अमेरिकी सांसदों, गवर्नरों और बड़े कारोबारी लोगों से संपर्क कर रहा था। FBI की जांच में सामने आया था कि संदिग्ध व्यक्ति वाइल्स के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। कुछ मामलों में कथित तौर पर पैसे से जुड़े अनुरोध भी किए गए थे। अमेरिकी अधिकारियों ने उस समय यह भी जांच की थी कि वाइल्स के संपर्कों तक पहुंच कैसे बनाई गई।
पुराने मामले में यह भी बताया गया था कि वाइल्स के निजी फोन के संपर्कों से जुड़ी जानकारी कथित तौर पर प्रभावित हुई थी। इसके बाद ऐसे लोगों को संदेश भेजे गए, जो सामान्य परिस्थितियों में उनसे सीधे संपर्क कर सकते थे। कुछ लोगों को बातचीत के तरीके और संदेशों की भाषा से संदेह हुआ। रिपोर्टों में बताया गया कि फर्जी संदेश वाइल्स के सामान्य संचार अंदाज से अलग थे और कुछ जगहों पर ऐसे सवाल पूछे गए जिनसे सामने वाले को शक हुआ। उस समय अमेरिकी एजेंसियां यह पता लगाने में लगी थीं कि इसके पीछे कौन था और उसका मकसद क्या था।
बर्नहम से जुड़ा नया मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि वह 20 जुलाई 2026 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने हैं। ब्रिटेन सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, बर्नहम ने उसी दिन प्रधानमंत्री पद संभाला था। इससे पहले वह ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रह चुके हैं और जून 2026 में मेकरफील्ड से सांसद चुने गए थे। 16 जुलाई को वह लेबर पार्टी के नेता बने और चार दिन बाद प्रधानमंत्री पद संभाला।
रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि बर्नहम से संपर्क करने वाला व्यक्ति वही था जो पहले वाइल्स के नाम से अमेरिकी नेताओं और कारोबारियों को निशाना बना रहा था या यह अलग मामला है। यही सवाल अब जांच के लिहाज से अहम है। अगर दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध निकलता है तो यह सिर्फ अमेरिकी अधिकारियों तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि दूसरे देशों के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ब्रिटिश अधिकारियों ने भी बातचीत की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
घटना की जानकारी ब्रिटिश दूतावास की ओर से व्हाइट हाउस तक पहुंचाए जाने के बाद अमेरिकी पक्ष भी पुराने मामले के संदर्भ में इसे देख रहा है। वाइल्स के नाम से पहले हुए कथित फर्जी संपर्कों की जांच में FBI पहले ही शामिल रही है। अमेरिकी रिपोर्टों में यह सामने आया था कि संदिग्ध व्यक्ति ने वाइल्स की पहचान का इस्तेमाल कर प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश की थी। कुछ संदेशों में भाषा और बातचीत के तरीके में अंतर भी पकड़ा गया था। अब बर्नहम से जुड़े संपर्क ने उस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
फर्जी Susie Wiles से संपर्क में आए ब्रिटिश PM एंडी बर्नहम
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम कथित तौर पर ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आ गए, जो खुद को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स बताकर संदेश भेज रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, बर्नहम ने उस व्यक्ति के साथ कुछ मैसेज का आदान-प्रदान भी किया, लेकिन बातचीत के दौरान उन्हें शक हो गया कि सामने वाला वास्तव में वाइल्स नहीं है। मामला सामने आने के बाद ब्रिटिश सरकार में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी। ब्रिटिश दूतावास ने इस बारे में वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस को भी जानकारी दी। ब्रिटेन सरकार ने मामले पर सार्वजनिक तौर पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की है और डाउनिंग स्ट्रीट ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर टिप्पणी करने से इनकार किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, बर्नहम और फर्जी पहचान इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के बीच बातचीत बहुत लंबी नहीं थी। मामले से जुड़े एक अधिकारी ने इसे केवल कुछ संदेशों तक सीमित बताया और कहा कि बातचीत में कोई संवेदनशील या महत्वपूर्ण जानकारी साझा नहीं हुई। हालांकि ब्रिटिश अधिकारियों ने घटना को हल्के में नहीं लिया। वजह यह है कि संपर्क उस व्यक्ति ने किया था, जिसने खुद को अमेरिकी राष्ट्रपति के बेहद करीबी अधिकारी के रूप में पेश किया था। ऐसे मामलों में सिर्फ बातचीत की सामग्री ही नहीं, बल्कि यह भी देखा जाता है कि किसी बाहरी व्यक्ति ने वरिष्ठ राजनीतिक लोगों तक पहुंच कैसे बनाई।
यह घटना सुसी वाइल्स के नाम से पहले सामने आ चुके एक ऐसे ही मामले की याद दिलाती है। 2025 में अमेरिकी अधिकारियों ने उन संदेशों और कॉल की जांच शुरू की थी, जिनमें एक व्यक्ति खुद को वाइल्स बताकर अमेरिकी सांसदों, गवर्नरों और बड़े कारोबारी लोगों से संपर्क कर रहा था। FBI की जांच में सामने आया था कि संदिग्ध व्यक्ति वाइल्स के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। कुछ मामलों में कथित तौर पर पैसे से जुड़े अनुरोध भी किए गए थे। अमेरिकी अधिकारियों ने उस समय यह भी जांच की थी कि वाइल्स के संपर्कों तक पहुंच कैसे बनाई गई।
पुराने मामले में यह भी बताया गया था कि वाइल्स के निजी फोन के संपर्कों से जुड़ी जानकारी कथित तौर पर प्रभावित हुई थी। इसके बाद ऐसे लोगों को संदेश भेजे गए, जो सामान्य परिस्थितियों में उनसे सीधे संपर्क कर सकते थे। कुछ लोगों को बातचीत के तरीके और संदेशों की भाषा से संदेह हुआ। रिपोर्टों में बताया गया कि फर्जी संदेश वाइल्स के सामान्य संचार अंदाज से अलग थे और कुछ जगहों पर ऐसे सवाल पूछे गए जिनसे सामने वाले को शक हुआ। उस समय अमेरिकी एजेंसियां यह पता लगाने में लगी थीं कि इसके पीछे कौन था और उसका मकसद क्या था।
बर्नहम से जुड़ा नया मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि वह 20 जुलाई 2026 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने हैं। ब्रिटेन सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, बर्नहम ने उसी दिन प्रधानमंत्री पद संभाला था। इससे पहले वह ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रह चुके हैं और जून 2026 में मेकरफील्ड से सांसद चुने गए थे। 16 जुलाई को वह लेबर पार्टी के नेता बने और चार दिन बाद प्रधानमंत्री पद संभाला।
रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि बर्नहम से संपर्क करने वाला व्यक्ति वही था जो पहले वाइल्स के नाम से अमेरिकी नेताओं और कारोबारियों को निशाना बना रहा था या यह अलग मामला है। यही सवाल अब जांच के लिहाज से अहम है। अगर दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध निकलता है तो यह सिर्फ अमेरिकी अधिकारियों तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि दूसरे देशों के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ब्रिटिश अधिकारियों ने भी बातचीत की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
घटना की जानकारी ब्रिटिश दूतावास की ओर से व्हाइट हाउस तक पहुंचाए जाने के बाद अमेरिकी पक्ष भी पुराने मामले के संदर्भ में इसे देख रहा है। वाइल्स के नाम से पहले हुए कथित फर्जी संपर्कों की जांच में FBI पहले ही शामिल रही है। अमेरिकी रिपोर्टों में यह सामने आया था कि संदिग्ध व्यक्ति ने वाइल्स की पहचान का इस्तेमाल कर प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश की थी। कुछ संदेशों में भाषा और बातचीत के तरीके में अंतर भी पकड़ा गया था। अब बर्नहम से जुड़े संपर्क ने उस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
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