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जन्माष्टमी व्रत में शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाएं: दिनभर हाइड्रेट रहने के 7 आसान तरीके
लाइफ स्टाइल
निर्जला व्रत अलग है, लेकिन सामान्य व्रत में पानी और तरल पदार्थों की कमी से थकान, सिरदर्द और चक्कर जैसी परेशानी हो सकती है; जानें किन चीजों को डाइट में शामिल करें
जन्माष्टमी के व्रत में कई लोग पूरे दिन भोजन से परहेज करते हैं। कुछ लोग फलाहार करते हैं, जबकि कुछ परंपराओं में निर्जला व्रत भी रखा जाता है। ऐसे में शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना खास तौर पर जरूरी हो सकता है। अगर आपके व्रत में पानी और तरल पदार्थ लेने की अनुमति है, तो पूरे दिन एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेते रहना बेहतर तरीका हो सकता है। गर्म मौसम, ज्यादा पसीना आने या शारीरिक गतिविधि के दौरान तरल पदार्थों की जरूरत बढ़ सकती है।
1. दिन की शुरुआत पानी से करें
अगर व्रत में पानी पीना मान्य है तो व्रत शुरू करने से पहले पर्याप्त पानी पीना अच्छा विकल्प हो सकता है। इससे दिन की शुरुआत शरीर में पर्याप्त तरल के साथ होती है। हालांकि, थोड़े समय में बहुत ज्यादा पानी पीने की कोशिश न करें। जरूरत से ज्यादा पानी तेजी से पीना भी शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
2. सिर्फ प्यास लगने का इंतजार न करें
व्रत के दौरान लोग कई बार व्यस्तता या पूजा-पाठ में पानी पीना भूल जाते हैं। प्यास लगना शरीर में पानी की जरूरत का संकेत है, इसलिए पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी लेते रहना उपयोगी हो सकता है। बाहर जाना हो तो अपने साथ पानी की बोतल रखना भी आसान तरीका है।
3. नारियल पानी हो सकता है विकल्प
अगर आपकी व्रत परंपरा में नारियल पानी की अनुमति है, तो इसे तरल पदार्थों के विकल्प के तौर पर लिया जा सकता है। इसमें पानी के साथ कुछ इलेक्ट्रोलाइट्स भी होते हैं। लेकिन पैक्ड या फ्लेवर्ड ड्रिंक को नारियल पानी का विकल्प मानने से पहले उसका लेबल जरूर देखें, क्योंकि उनमें अतिरिक्त चीनी हो सकती है।
4. फलों से भी मिल सकता है पानी
तरबूज, खरबूजा, संतरा और खीरा जैसे पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर को तरल उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं। व्रत में फलाहार की अनुमति होने पर इन्हें डाइट में शामिल किया जा सकता है। फलों का सेवन जूस की बजाय पूरे फल के रूप में करना आमतौर पर ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे फाइबर भी मिलता है।
5. बहुत ज्यादा चाय-कॉफी से बचें
व्रत के दौरान थकान महसूस होने पर कुछ लोग बार-बार चाय या कॉफी लेते हैं। कैफीन वाली ड्रिंक्स को पानी का पूरा विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अगर आपको चाय या कॉफी पीने की आदत है तो मात्रा सीमित रखें और साथ में पर्याप्त पानी भी लेते रहें।
6. ज्यादा पसीना आए तो इलेक्ट्रोलाइट्स पर ध्यान दें
गर्मी में बाहर निकलने, लंबी पूजा या ज्यादा शारीरिक गतिविधि के कारण पसीना अधिक आ सकता है। ऐसे समय सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन पर भी ध्यान देना जरूरी हो सकता है। व्रत में इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक या अन्य विकल्प लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसमें इस्तेमाल सामग्री आपकी व्रत परंपरा के अनुसार स्वीकार्य है या नहीं।
7. व्रत खोलते समय भी जल्दबाजी न करें
पूरे दिन उपवास के बाद अचानक बहुत ज्यादा खाना या पीना पेट के लिए असहज हो सकता है। व्रत खोलते समय धीरे-धीरे पानी या उपयुक्त तरल पदार्थ लेकर फिर हल्का भोजन करना बेहतर हो सकता है। बहुत ज्यादा मीठे, तले या भारी भोजन से तुरंत शुरुआत करने से बचना भी उपयोगी है।
निर्जला व्रत में क्या करें?
अगर कोई व्यक्ति निर्जला व्रत रख रहा है तो सामान्य hydration वाली सलाह लागू नहीं होती, क्योंकि इस व्रत में पानी भी नहीं लिया जाता। ऐसी स्थिति में व्रत से पहले और बाद में शरीर में पानी की स्थिति का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, छोटे बच्चे या किसी बीमारी से जूझ रहे लोग लंबे समय तक बिना पानी के रहने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। डायबिटीज, किडनी या हृदय संबंधी बीमारी वाले लोगों के लिए लंबे समय तक भोजन या पानी से परहेज करना विशेष सावधानी का विषय हो सकता है।
डिहाइड्रेशन के इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
व्रत के दौरान बहुत ज्यादा प्यास, मुंह सूखना, चक्कर, कमजोरी, सिरदर्द, असामान्य थकान या पेशाब का बहुत कम होना शरीर में पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं। अगर लक्षण ज्यादा गंभीर हों, बेहोशी जैसी स्थिति बने या व्यक्ति पानी नहीं पी पा रहा हो, तो इसे केवल व्रत की सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी हो सकता है।
व्रत में Hydration का आसान फॉर्मूला
अगर व्रत में पानी पीने की अनुमति है तो दिनभर पानी + उपयुक्त तरल पदार्थ + पानी से भरपूर फल/खाद्य पदार्थ का संतुलन रखा जा सकता है। बहुत ज्यादा मीठे पेय और कैफीन पर निर्भर रहने के बजाय साधारण पानी को प्राथमिकता देना बेहतर है। सबसे जरूरी बात यह है कि व्रत की परंपरा और अपनी सेहत दोनों को ध्यान में रखकर खान-पान तय करें। हर व्यक्ति के लिए एक जैसी मात्रा या एक जैसा व्रत उपयुक्त नहीं होता।
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