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केला टेढ़ा क्यों होता है? इसके पीछे छिपा है गुरुत्वाकर्षण और सूरज की रोशनी का साइंस। जानें यहां
लाइफस्टाइल डेस्क
क्या आपने सोचा है केला हमेशा टेढ़ा ही क्यों होता है? जानिए गुरुत्वाकर्षण, रोशनी और ऑक्सिन हार्मोन से जुड़ा इसका वैज्ञानिक कारण।
केला दुनिया के सबसे लोकप्रिय फलों में से एक है। सुबह के नाश्ते से लेकर जिम की डाइट तक, लोग इसे हर दिन खाते हैं। इसके स्वाद और सेहत के फायदों के साथ-साथ इसका आकार भी लोगों का ध्यान खींचता है। अक्सर लोगों के मन में ये सवाल आता है कि आखिर केला हमेशा टेढ़ा क्यों होता है, सीधे क्यों नहीं बढ़ता। देखने में साधारण लगने वाली इस बात के पीछे एक दिलचस्प वैज्ञानिक प्रक्रिया छिपी हुई है। वैज्ञानिक इसे 'ऋणात्मक गुरुत्वाकर्षण प्रतिक्रिया' या नेगेटिव जियोट्रॉपिज्म से समझाते हैं। यह प्रक्रिया ही है जो केला उगते समय अपना आकार बदलता है और अंत में मुड़ा हुआ दिखाई देता है।
जानकारी के मुताबिक, केले की शुरुआत बाकी फलों की तरह सीधी नहीं होती। जब फल छोटे होते हैं, तो वे नीचे की ओर लटके रहते हैं। केले के बड़े गुच्छे को 'हैंड' कहा जाता है, और इनमें लगे छोटे फल शुरुआत में जमीन की तरफ झुके रहते हैं। लेकिन जैसे-जैसे इनका आकार बढ़ता है, पौधे के भीतर हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। ये हार्मोन केले को सूरज की रोशनी की तरफ बढ़ने का सिग्नल देते हैं। उधर, गुरुत्वाकर्षण फल को नीचे खींचता है और पौधे की प्राकृतिक प्रवृत्ति उसे रोशनी की दिशा में मोड़ने लगती है। इस खिंचाव के बीच, केला धीरे-धीरे मुड़ जाता है। अगर केले पर गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश का यह दबाव न होता, तो शायद उसका आकार बिलकुल अलग होता।
इस पूरी प्रक्रिया में 'ऑक्सिन' नाम का हार्मोन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह हार्मोन, जो पौधों की ग्रोथ को नियंत्रित करता है, केले के अलग-अलग हिस्सों में समान रूप से नहीं फैला होता। यदि फल के किसी हिस्से पर ज्यादा रोशनी पड़ती है, तो ऑक्सिन दूसरे हिस्से में जमा होने लगता है। इससे एक तरफ की कोशिकाएं तेजी से बढ़ती हैं, जबकि दूसरी तरफ की ग्रोथ सामान्य रहती है। यही असमान बढ़त केले को सीधा नहीं रहने देती, और उसका आकार मुड़ने लगता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यही कारण है कि केले में प्राकृतिक कर्व दिखाई देता है। इसी वजह से लगभग हर प्रकार का केला थोड़ा या ज्यादा टेढ़ा नजर आता है। हालांकि, अलग-अलग मौसम और खेती की परिस्थितियों के कारण इसका घुमाव थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है। कई वैज्ञानिक प्रयोगों में भी यह साबित हुआ है कि रोशनी की दिशा बदलने पर केले के बढ़ने का एंगल भी बदल जाता है। इसलिए, यह साधारण चीज भी अपने अंदर गहरा विज्ञान छुपाए हुए है।
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केला टेढ़ा क्यों होता है? इसके पीछे छिपा है गुरुत्वाकर्षण और सूरज की रोशनी का साइंस। जानें यहां
लाइफस्टाइल डेस्क
केला दुनिया के सबसे लोकप्रिय फलों में से एक है। सुबह के नाश्ते से लेकर जिम की डाइट तक, लोग इसे हर दिन खाते हैं। इसके स्वाद और सेहत के फायदों के साथ-साथ इसका आकार भी लोगों का ध्यान खींचता है। अक्सर लोगों के मन में ये सवाल आता है कि आखिर केला हमेशा टेढ़ा क्यों होता है, सीधे क्यों नहीं बढ़ता। देखने में साधारण लगने वाली इस बात के पीछे एक दिलचस्प वैज्ञानिक प्रक्रिया छिपी हुई है। वैज्ञानिक इसे 'ऋणात्मक गुरुत्वाकर्षण प्रतिक्रिया' या नेगेटिव जियोट्रॉपिज्म से समझाते हैं। यह प्रक्रिया ही है जो केला उगते समय अपना आकार बदलता है और अंत में मुड़ा हुआ दिखाई देता है।
जानकारी के मुताबिक, केले की शुरुआत बाकी फलों की तरह सीधी नहीं होती। जब फल छोटे होते हैं, तो वे नीचे की ओर लटके रहते हैं। केले के बड़े गुच्छे को 'हैंड' कहा जाता है, और इनमें लगे छोटे फल शुरुआत में जमीन की तरफ झुके रहते हैं। लेकिन जैसे-जैसे इनका आकार बढ़ता है, पौधे के भीतर हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। ये हार्मोन केले को सूरज की रोशनी की तरफ बढ़ने का सिग्नल देते हैं। उधर, गुरुत्वाकर्षण फल को नीचे खींचता है और पौधे की प्राकृतिक प्रवृत्ति उसे रोशनी की दिशा में मोड़ने लगती है। इस खिंचाव के बीच, केला धीरे-धीरे मुड़ जाता है। अगर केले पर गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश का यह दबाव न होता, तो शायद उसका आकार बिलकुल अलग होता।
इस पूरी प्रक्रिया में 'ऑक्सिन' नाम का हार्मोन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह हार्मोन, जो पौधों की ग्रोथ को नियंत्रित करता है, केले के अलग-अलग हिस्सों में समान रूप से नहीं फैला होता। यदि फल के किसी हिस्से पर ज्यादा रोशनी पड़ती है, तो ऑक्सिन दूसरे हिस्से में जमा होने लगता है। इससे एक तरफ की कोशिकाएं तेजी से बढ़ती हैं, जबकि दूसरी तरफ की ग्रोथ सामान्य रहती है। यही असमान बढ़त केले को सीधा नहीं रहने देती, और उसका आकार मुड़ने लगता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यही कारण है कि केले में प्राकृतिक कर्व दिखाई देता है। इसी वजह से लगभग हर प्रकार का केला थोड़ा या ज्यादा टेढ़ा नजर आता है। हालांकि, अलग-अलग मौसम और खेती की परिस्थितियों के कारण इसका घुमाव थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है। कई वैज्ञानिक प्रयोगों में भी यह साबित हुआ है कि रोशनी की दिशा बदलने पर केले के बढ़ने का एंगल भी बदल जाता है। इसलिए, यह साधारण चीज भी अपने अंदर गहरा विज्ञान छुपाए हुए है।
