पूर्वांचल में बदल रहा भूमिहार राजनीति का समीकरण? अतुल राय–अजय राय की मुलाकात से बढ़ी सकती है बीजेपी की टेंशन

Digital Desk

उत्तर प्रदेश मे 2027 के चुनाव को देखते हुए बहुत से जातीय समीकरण तेज़ी से बनते बदलते दिख रहे है। जहाँ ब्राह्मण और ठाकुर विधायक और सांसदों की मीटिंग मीडिया चर्चा मे रही है। वही अब लगता है पूर्वांचल मे भूमिहार नेता एक मंच पे आने वाले है। इसकी शुरुवात घोसी के पूर्व संसद अतुल राय ने कर दी है।

इस बात को बल तब और मिला जब अतुल राय के सोशल मीडिया पोस्ट पर एक पिक्चर पोस्ट की जिस्मे वो वाराणसी लोक सभा सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर देने वाले अजय राय से लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल मे मुलाक़ात कर उनकी तबीयत का हाल चाल लिया। अतुल, जिन्नोहोने 2017 मे आपने पहेल ही चुनाव मे समाजवादी पार्टी के दिग्गज ओम प्रकाश सिंह को तीसरे पायदान पे दाखिल दिया था, ने अजय राय को एक जूजाहरू और दिशा के विपरीत चलने मे संकोच ना करने वाले नेता बताया।
 
सियासी गलियारो मैं अतुल राय और अजय राय को चीर प्रतिदावंदी के रूप मैं देखा जाता रहा है । लेकिन अब लगता है, ये दोनों नेता जो कहीं ना कहीं पूर्वांचल मे एक साथ आते हुए दिखाई देते है। इनकी मुलाक़ात को भूमिहार नेता को एक मंच पे आने के रूप मे देखा जा रहा है।  
 
5 बार विधायक रहे अजय राय का राजनीति अनुभव करीब ४० साल का है। वही करीं ४५ साल के अतुल राय की कर राजनीतिक अनुभव करीब १० साल का है। अतुल राय की ऊर्जा और युवा वर्ग मैं लोकप्रियता, अजय राय का राजनीतिक अनुभव और समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी कई नेताओं मे अच्छी पकड़ से इस जोड़ी को बहुत ही मजबूत बनाता है।
 
पूर्वांचल की भूमिहार पॉलिटिक्स
 
पूर्वांचल में बीजेपी अभी भी कृष्णानंद राय के जाने के बाद, और मनोज सिन्हा के कश्मीर का गवर्नर बनाये जाने के बाद जो जगह ख़ाली हुई है, उसको भर नहीं पाई है. बीजेपी की स्थिति वाराणसी को छोड़ के किसी भी ज़िले में ठीक नहीं है। ग़ाज़ीपुर बीजेपी के एक भी विधायक नहीं है, यहाँ भूमिहार वोटर क़रीब 2 लाख है। बलिया, जहाँ भूमिहार वोटर क़रीब 1.5 लाख है, की 7 सीटों मैं बीजेपी के पास 2 सीट है । मऊ भूमिहार वोटर 1.5 लाख बीजेपी के पास 4 मैं से 1 सीट है। वही आजमगढ़ मे जीरो सीट है। भूमिहार वोटर 80 हज़ार है. ये वाही इलाका है जहाँ अतुल राय आज कल काफ़ी ऐक्टिव है. और ना सिर्फ़ भूमिहार वोटर्स मैं उनकी अच्छी पकड़ है बल्कि वो युवा और मुस्लिम और पिछड़े वर्ग मे अच्छी पकड़ है। अतुल को आज भी लोग कोरोना महामारी के दौरान उनके मेडिकल सहायत के लिए याद करते है।
 
हालाकि वाराणसी मैं बीजेपी के पास 7 की 7 सीटे है. लेकिन कैसे 2024 के लोक सभा चुनाव मैं भूमिहार वोटर्स ने अजय को वोट किया। और जीत का अंतर 1.5 लाख कर दिया. अगर अतुल अगले लोक सभा मैं अजय राय के पक्ष मैं खुल कर आए तो ये अंदर और भी कम हो सकता है, या शायद जीत मैं बदल सकता गई।
 
अतुल राय ने 2019 की लोक सभा चुनाव मे बीजेपी की लहर मैं अपना चुनाव 50% से जायदा वोट ले के जीता था। उनकी पकड़ ना सिर्फ़ भूमिहार वोटर्स मे है, बल्कि मुस्लिम, पिछड़ा, यूथ मे भी। हरिश्चंद्र, बीचयू और यूपी कॉलेज में भी उनकी मजबूत पकड़ है.
 
मुख़्तार अंसारी से दुश्मनी
 
भूमिहार जाति होने के अलाव दोनों को पूर्वांचल के बाहुबली रहे मुख़्तार अंसारी से दुश्मनी एक पाले मैं लाती है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो अतुल राय ने मुख़्तार अंसारी नए बेटे अफ़ज़ल अंसारी के बेटे का टिकट काट के चुनाव लड़ा और जीता। उनके जेल जाने के पीछे भी मुख्तार के शूटर अंगद राइ की भूमिका को कोर्ट ने संज्ञान मैं लेते हुए उनने बारी किया।
 
वाही अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय के की हत्या मैं भी मुख़्तार अंसारी को उम्र क़ैद की सजा हुई.
 
दोनों के साथ आने से पूर्वांचल की भूमिहार वोट बैंक कंसोलिडेट हो सकता है. आने वाले समय मे क्या अतुल और अजय और भूमिहार नेताओ को साथ जोड़ने मे सफल होते है या नहीं, ये देखना बाक़ी है। और इनसे जुड़ी भविष्य की राजनीति क्या होगी ये भी चर्चा का विषय है। सवाल है भी है की क्या अतुल विधान सभा का चुनाव लड़ेंगे या परिवार के किसी सदस्य को लड़वाँयेगे।


पूर्वांचल मे राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे है। देखा दिलचस्प हो की भूमिहार वोट बैंक किस पाले मे गिरता है।

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14 May 2026 By दैनिक जागरण

पूर्वांचल में बदल रहा भूमिहार राजनीति का समीकरण? अतुल राय–अजय राय की मुलाकात से बढ़ी सकती है बीजेपी की टेंशन

Digital Desk

इस बात को बल तब और मिला जब अतुल राय के सोशल मीडिया पोस्ट पर एक पिक्चर पोस्ट की जिस्मे वो वाराणसी लोक सभा सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर देने वाले अजय राय से लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल मे मुलाक़ात कर उनकी तबीयत का हाल चाल लिया। अतुल, जिन्नोहोने 2017 मे आपने पहेल ही चुनाव मे समाजवादी पार्टी के दिग्गज ओम प्रकाश सिंह को तीसरे पायदान पे दाखिल दिया था, ने अजय राय को एक जूजाहरू और दिशा के विपरीत चलने मे संकोच ना करने वाले नेता बताया।
 
सियासी गलियारो मैं अतुल राय और अजय राय को चीर प्रतिदावंदी के रूप मैं देखा जाता रहा है । लेकिन अब लगता है, ये दोनों नेता जो कहीं ना कहीं पूर्वांचल मे एक साथ आते हुए दिखाई देते है। इनकी मुलाक़ात को भूमिहार नेता को एक मंच पे आने के रूप मे देखा जा रहा है।  
 
5 बार विधायक रहे अजय राय का राजनीति अनुभव करीब ४० साल का है। वही करीं ४५ साल के अतुल राय की कर राजनीतिक अनुभव करीब १० साल का है। अतुल राय की ऊर्जा और युवा वर्ग मैं लोकप्रियता, अजय राय का राजनीतिक अनुभव और समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी कई नेताओं मे अच्छी पकड़ से इस जोड़ी को बहुत ही मजबूत बनाता है।
 
पूर्वांचल की भूमिहार पॉलिटिक्स
 
पूर्वांचल में बीजेपी अभी भी कृष्णानंद राय के जाने के बाद, और मनोज सिन्हा के कश्मीर का गवर्नर बनाये जाने के बाद जो जगह ख़ाली हुई है, उसको भर नहीं पाई है. बीजेपी की स्थिति वाराणसी को छोड़ के किसी भी ज़िले में ठीक नहीं है। ग़ाज़ीपुर बीजेपी के एक भी विधायक नहीं है, यहाँ भूमिहार वोटर क़रीब 2 लाख है। बलिया, जहाँ भूमिहार वोटर क़रीब 1.5 लाख है, की 7 सीटों मैं बीजेपी के पास 2 सीट है । मऊ भूमिहार वोटर 1.5 लाख बीजेपी के पास 4 मैं से 1 सीट है। वही आजमगढ़ मे जीरो सीट है। भूमिहार वोटर 80 हज़ार है. ये वाही इलाका है जहाँ अतुल राय आज कल काफ़ी ऐक्टिव है. और ना सिर्फ़ भूमिहार वोटर्स मैं उनकी अच्छी पकड़ है बल्कि वो युवा और मुस्लिम और पिछड़े वर्ग मे अच्छी पकड़ है। अतुल को आज भी लोग कोरोना महामारी के दौरान उनके मेडिकल सहायत के लिए याद करते है।
 
हालाकि वाराणसी मैं बीजेपी के पास 7 की 7 सीटे है. लेकिन कैसे 2024 के लोक सभा चुनाव मैं भूमिहार वोटर्स ने अजय को वोट किया। और जीत का अंतर 1.5 लाख कर दिया. अगर अतुल अगले लोक सभा मैं अजय राय के पक्ष मैं खुल कर आए तो ये अंदर और भी कम हो सकता है, या शायद जीत मैं बदल सकता गई।
 
अतुल राय ने 2019 की लोक सभा चुनाव मे बीजेपी की लहर मैं अपना चुनाव 50% से जायदा वोट ले के जीता था। उनकी पकड़ ना सिर्फ़ भूमिहार वोटर्स मे है, बल्कि मुस्लिम, पिछड़ा, यूथ मे भी। हरिश्चंद्र, बीचयू और यूपी कॉलेज में भी उनकी मजबूत पकड़ है.
 
मुख़्तार अंसारी से दुश्मनी
 
भूमिहार जाति होने के अलाव दोनों को पूर्वांचल के बाहुबली रहे मुख़्तार अंसारी से दुश्मनी एक पाले मैं लाती है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो अतुल राय ने मुख़्तार अंसारी नए बेटे अफ़ज़ल अंसारी के बेटे का टिकट काट के चुनाव लड़ा और जीता। उनके जेल जाने के पीछे भी मुख्तार के शूटर अंगद राइ की भूमिका को कोर्ट ने संज्ञान मैं लेते हुए उनने बारी किया।
 
वाही अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय के की हत्या मैं भी मुख़्तार अंसारी को उम्र क़ैद की सजा हुई.
 
दोनों के साथ आने से पूर्वांचल की भूमिहार वोट बैंक कंसोलिडेट हो सकता है. आने वाले समय मे क्या अतुल और अजय और भूमिहार नेताओ को साथ जोड़ने मे सफल होते है या नहीं, ये देखना बाक़ी है। और इनसे जुड़ी भविष्य की राजनीति क्या होगी ये भी चर्चा का विषय है। सवाल है भी है की क्या अतुल विधान सभा का चुनाव लड़ेंगे या परिवार के किसी सदस्य को लड़वाँयेगे।


पूर्वांचल मे राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे है। देखा दिलचस्प हो की भूमिहार वोट बैंक किस पाले मे गिरता है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/election/the-equation-of-bhumihar-politics-is-changing-in-purvanchal-bjps/article-53359

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