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ना DJ, ना लग्जरी कार... बैलगाड़ी पर बारात लेकर गया दूल्हा, लोगों ने कहा- यही असली शादी
नारायणपुर (छ.ग.)
नारायणपुर में दूल्हा बैलगाड़ी से बारात लेकर पहुंचा। पेट्रोल-डीजल बचाने और सादगी का संदेश देने वाली शादी चर्चा में है।
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में एक शादी इन दिनों काफी चर्चा में है। इस बारात में न तो लग्जरी गाड़ियों का जौहर था, और न ही डीजे का शोर, बस एक साधारण बैलगाड़ी। डूमरतराई गांव के कुबेर देहरी अपनी बारात लेकर बैलगाड़ी पर आए, जिसे देखकर गांव के लोग दंग रह गए। कुबेर देहरी नारायणपुर पुलिस विभाग में एसपी गनमैन के पद पर हैं और उन्होंने अपनी शादी को एक अलग तरीके से मनाने का निर्णय लिया। जैसे ही बैलगाड़ी गांव की कच्ची सड़कों पर चली, पुराने समय की यादें ताजा हो गईं। बच्चे और बुजुर्ग सभी इस अनोखी बारात को देखने के लिए बाहर आए। आसपास के गांवों में भी इसकी चर्चा होने लगी।
कुबेर देहरी का कहना है कि उन्होंने यह निर्णय सिर्फ दिखावे के लिए नहीं लिया। बताया जा रहा है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और सादगी अपनाने की अपील से प्रेरित हैं। इसलिए उन्होंने पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों की बजाय बैलगाड़ी को चुना। उनका मानना है कि आजकल शादियों में लोग जरूरत से ज्यादा खर्च और दिखावा करने लगे हैं, जबकि छोटे से प्रयासों से समाज को एक बेहतर संदेश दिया जा सकता है। बारात में शामिल सभी लोग पारंपरिक कपड़ों में थे। गांव के कई बुजुर्गों ने कहा कि वर्षों बाद उन्हें ऐसी बारात देखने को मिली जैसी पहले गांवों में हुआ करती थी। कुछ ने इसे भारतीय संस्कृति से जुड़ी एक अच्छी पहल बताया, वहीं कई युवाओं ने भी इस सोच की तारीफ की। शादी की चर्चा इलाके में देर शाम तक चलती रही।रही। सोशल मीडिया पर बारात के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं, जिसके बाद दूसरे जिलों तक भी यह खबर पहुंच गई।
बताया जा रहा है कि मंत्री केदार कश्यप ने भी इस पहल की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे सादगी, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय परंपरा का अच्छा उदाहरण बताया। ग्रामीणों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत और प्रदूषण के दौर में इस तरह की पहल लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। शादी में शामिल कई लोगों ने कहा कि अब शादियां जरूरत से ज्यादा दिखावे का माध्यम बनती जा रही हैं, जबकि पहले रिश्तों और परंपराओं को ज्यादा महत्व दिया जाता था। कुबेर देहरी ने भी कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गांव की संस्कृति से जुड़कर रहना चाहिए। फिलहाल नारायणपुर की यह ‘बैलगाड़ी वाली बारात’ पूरे इलाके में मिसाल बन गई है और लोग इसे सादगी के साथ बड़ा संदेश देने वाली शादी बता रहे हैं।
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ना DJ, ना लग्जरी कार... बैलगाड़ी पर बारात लेकर गया दूल्हा, लोगों ने कहा- यही असली शादी
नारायणपुर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में एक शादी इन दिनों काफी चर्चा में है। इस बारात में न तो लग्जरी गाड़ियों का जौहर था, और न ही डीजे का शोर, बस एक साधारण बैलगाड़ी। डूमरतराई गांव के कुबेर देहरी अपनी बारात लेकर बैलगाड़ी पर आए, जिसे देखकर गांव के लोग दंग रह गए। कुबेर देहरी नारायणपुर पुलिस विभाग में एसपी गनमैन के पद पर हैं और उन्होंने अपनी शादी को एक अलग तरीके से मनाने का निर्णय लिया। जैसे ही बैलगाड़ी गांव की कच्ची सड़कों पर चली, पुराने समय की यादें ताजा हो गईं। बच्चे और बुजुर्ग सभी इस अनोखी बारात को देखने के लिए बाहर आए। आसपास के गांवों में भी इसकी चर्चा होने लगी।
कुबेर देहरी का कहना है कि उन्होंने यह निर्णय सिर्फ दिखावे के लिए नहीं लिया। बताया जा रहा है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और सादगी अपनाने की अपील से प्रेरित हैं। इसलिए उन्होंने पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों की बजाय बैलगाड़ी को चुना। उनका मानना है कि आजकल शादियों में लोग जरूरत से ज्यादा खर्च और दिखावा करने लगे हैं, जबकि छोटे से प्रयासों से समाज को एक बेहतर संदेश दिया जा सकता है। बारात में शामिल सभी लोग पारंपरिक कपड़ों में थे। गांव के कई बुजुर्गों ने कहा कि वर्षों बाद उन्हें ऐसी बारात देखने को मिली जैसी पहले गांवों में हुआ करती थी। कुछ ने इसे भारतीय संस्कृति से जुड़ी एक अच्छी पहल बताया, वहीं कई युवाओं ने भी इस सोच की तारीफ की। शादी की चर्चा इलाके में देर शाम तक चलती रही।रही। सोशल मीडिया पर बारात के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं, जिसके बाद दूसरे जिलों तक भी यह खबर पहुंच गई।
बताया जा रहा है कि मंत्री केदार कश्यप ने भी इस पहल की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे सादगी, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय परंपरा का अच्छा उदाहरण बताया। ग्रामीणों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत और प्रदूषण के दौर में इस तरह की पहल लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। शादी में शामिल कई लोगों ने कहा कि अब शादियां जरूरत से ज्यादा दिखावे का माध्यम बनती जा रही हैं, जबकि पहले रिश्तों और परंपराओं को ज्यादा महत्व दिया जाता था। कुबेर देहरी ने भी कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गांव की संस्कृति से जुड़कर रहना चाहिए। फिलहाल नारायणपुर की यह ‘बैलगाड़ी वाली बारात’ पूरे इलाके में मिसाल बन गई है और लोग इसे सादगी के साथ बड़ा संदेश देने वाली शादी बता रहे हैं।
