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हंता वायरस को लेकर WHO ने दिया अलर्ट, क्या दुनिया पर फिर मंडरा रहा कोरोना जैसी महामारी का खतरा?
नेशनल डेस्क
WHO ने हंता वायरस के बढ़ते मामलों पर दुनियाभर को सतर्क रहने को कहा। एक्सपर्ट्स ने बताया क्यों यह कोविड जैसी महामारी नहीं है।
हंता वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सभी देशों को सतर्क रहने की सलाह दी है। WHO की चेतावनी के बाद, कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। हाल के हालात ये हैं कि अंटार्कटिका की ओर जा रहे क्रूज जहाज, एमवी होंडियस में इस वायरस का प्रकोप सामने आया है, जहां तीन लोगों की मौत हो गई है। कई यात्री संक्रमित पाए गए हैं और कुछ को आइसोलेशन में रखा गया है। बताया जा रहा है कि जहाज पर मौजूद लोग विभिन्न देशों से आए थे, और इस वजह से संक्रमण के वैश्विक स्तर पर फैलने की चिंता बढ़ गई है। WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा कि लंबी ऊष्मायन अवधि और लगातार होने वाली अंतरराष्ट्रीय यात्राएं चिंता को बढ़ा सकती हैं। फिर भी, विशेषज्ञ इस वायरस को कोरोना जैसी वैश्विक महामारी मानने से इनकार कर रहे हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के मूत्र, मल या लार के संपर्क से फैलता है। संक्रमित स्थानों की हवा में मौजूद कणों के जरिए भी इंसान संक्रमित हो सकता है। अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में इसके कई स्ट्रेन पहले भी देखे जा चुके हैं। कुछ मामलों में, यह गंभीर फेफड़ों की बीमारी का कारण बनता है, जिसे हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम कहा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी में सांस लेने में तकलीफ तेजी से बढ़ सकती है और हालत अचानक बिगड़ जाती है। फिलहाल चर्चा में जो स्ट्रेन है, उसे एंडीज स्ट्रेन कहा जा रहा है। यह सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में फैल सकता है, लेकिन इसके लिए अत्यधिक करीबी संपर्क जरूरी होता है। इसलिए एक्सपर्ट्स इसे कोविड-19 के समान खतरा नहीं मानते।
क्रूज जहाज पर सामने आए मामलों ने लोगों को कोरोना काल की याद दिला दी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कुछ यात्री संक्रमण की पुष्टि से पहले ही विभिन्न देशों में पहुंच गए थे। इसके बाद से यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ एयरपोर्ट्स और बंदरगाहों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। हालांकि WHO अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अभी नियंत्रित है और इसे 'सीमित प्रकोप' माना जा रहा है। मिनेसोटा विश्वविद्यालय के संक्रामक रोग विशेषज्ञों का भी मानना है कि हंता वायरस का फैलाव काफी धीमा होता है। यह कोविड की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता और न ही बिना लक्षण वाले रोगियों से बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वायरस की म्यूटेशन स्पीड भी कम है, इसलिए इसके अचानक बेहद संक्रामक बन जाने की संभावना कम है।
फिलहाल, स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील कर रही हैं। WHO और विभिन्न देशों के स्वास्थ्य मंत्रालयों ने साफ-सफाई बनाए रखने, चूहों और संक्रमित जानवरों से दूरी रखने और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी है। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, बदन दर्द, थकान और सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार निगरानी जरूरी है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान किसी भी संक्रमण को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
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हंता वायरस को लेकर WHO ने दिया अलर्ट, क्या दुनिया पर फिर मंडरा रहा कोरोना जैसी महामारी का खतरा?
नेशनल डेस्क
हंता वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सभी देशों को सतर्क रहने की सलाह दी है। WHO की चेतावनी के बाद, कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। हाल के हालात ये हैं कि अंटार्कटिका की ओर जा रहे क्रूज जहाज, एमवी होंडियस में इस वायरस का प्रकोप सामने आया है, जहां तीन लोगों की मौत हो गई है। कई यात्री संक्रमित पाए गए हैं और कुछ को आइसोलेशन में रखा गया है। बताया जा रहा है कि जहाज पर मौजूद लोग विभिन्न देशों से आए थे, और इस वजह से संक्रमण के वैश्विक स्तर पर फैलने की चिंता बढ़ गई है। WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा कि लंबी ऊष्मायन अवधि और लगातार होने वाली अंतरराष्ट्रीय यात्राएं चिंता को बढ़ा सकती हैं। फिर भी, विशेषज्ञ इस वायरस को कोरोना जैसी वैश्विक महामारी मानने से इनकार कर रहे हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के मूत्र, मल या लार के संपर्क से फैलता है। संक्रमित स्थानों की हवा में मौजूद कणों के जरिए भी इंसान संक्रमित हो सकता है। अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में इसके कई स्ट्रेन पहले भी देखे जा चुके हैं। कुछ मामलों में, यह गंभीर फेफड़ों की बीमारी का कारण बनता है, जिसे हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम कहा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी में सांस लेने में तकलीफ तेजी से बढ़ सकती है और हालत अचानक बिगड़ जाती है। फिलहाल चर्चा में जो स्ट्रेन है, उसे एंडीज स्ट्रेन कहा जा रहा है। यह सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में फैल सकता है, लेकिन इसके लिए अत्यधिक करीबी संपर्क जरूरी होता है। इसलिए एक्सपर्ट्स इसे कोविड-19 के समान खतरा नहीं मानते।
क्रूज जहाज पर सामने आए मामलों ने लोगों को कोरोना काल की याद दिला दी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कुछ यात्री संक्रमण की पुष्टि से पहले ही विभिन्न देशों में पहुंच गए थे। इसके बाद से यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ एयरपोर्ट्स और बंदरगाहों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। हालांकि WHO अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अभी नियंत्रित है और इसे 'सीमित प्रकोप' माना जा रहा है। मिनेसोटा विश्वविद्यालय के संक्रामक रोग विशेषज्ञों का भी मानना है कि हंता वायरस का फैलाव काफी धीमा होता है। यह कोविड की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता और न ही बिना लक्षण वाले रोगियों से बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वायरस की म्यूटेशन स्पीड भी कम है, इसलिए इसके अचानक बेहद संक्रामक बन जाने की संभावना कम है।
फिलहाल, स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील कर रही हैं। WHO और विभिन्न देशों के स्वास्थ्य मंत्रालयों ने साफ-सफाई बनाए रखने, चूहों और संक्रमित जानवरों से दूरी रखने और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी है। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, बदन दर्द, थकान और सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार निगरानी जरूरी है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान किसी भी संक्रमण को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
