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हर इंसान को याद रखनी चाहिए चाणक्य की ये जरूरी बातें, धोखे और पछतावे से बचेंगे जिंदगीभर
Digital Desk
चाणक्य नीति की ऐसी बातें जानिए जो रिश्तों, सफलता और जीवन में सही फैसले लेने में मदद करती हैं और धोखे से बचाती हैं।
आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी लोगों के बीच उतनी ही चर्चा में रहती हैं, जितनी सदियों पहले थीं। वजह साफ है, उनकी बातें सीधे जीवन के व्यवहार, रिश्तों, सफलता और इंसान की सोच पर चोट करती हैं। चाणक्य ने अपनी नीतियों में ऐसे लोगों से दूरी बनाने की सलाह दी है, जो सामने मीठा बोलते हैं लेकिन पीछे नुकसान पहुंचाते हैं। उनका मानना था कि बुरे आचरण वाले लोगों की संगत धीरे-धीरे इंसान को भी बर्बादी की तरफ ले जाती है। उन्होंने साफ कहा कि जो व्यक्ति गलत लोगों से मित्रता करता है, वह जल्दी नष्ट हो जाता है।
चाणक्य नीति में परिवार और संतोष को भी सुखी जीवन का सबसे बड़ा आधार बताया गया है। उनके अनुसार जिस व्यक्ति का बेटा आज्ञाकारी हो, जीवनसाथी समझदार हो और जो धन को लेकर संतुष्ट रहता हो, उसके लिए यही धरती स्वर्ग जैसी है। वहीं दिखावटी मित्रों को लेकर भी उन्होंने चेतावनी दी थी। उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना उस घड़े से की, जिसके ऊपर दूध भरा हो लेकिन भीतर जहर छिपा हो। मतलब, हर मीठा बोलने वाला व्यक्ति आपका शुभचिंतक नहीं होता। चाणक्य ने ‘अति’ यानी किसी भी चीज की अधिकता से भी बचने की बात कही। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अधिक सौंदर्य, अधिक अभिमान और जरूरत से ज्यादा दान भी कई बार संकट का कारण बन जाता है।
चाणक्य की बातों में मुश्किल समय को लेकर भी गहरी सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि संकट आने से पहले डरना स्वाभाविक है, लेकिन जब मुश्किल सामने आ जाए तो पूरी ताकत से उसका सामना करना चाहिए। यही बुद्धिमानी है। उन्होंने कुछ कामों को पूरी तरह निरर्थक भी बताया। जैसे समुद्र में बारिश होना या तृप्त व्यक्ति को दोबारा भोजन कराना। उनके मुताबिक हर काम समय और परिस्थिति देखकर करना चाहिए। चाणक्य ने आत्मबल को सबसे बड़ी ताकत माना। उनका कहना था कि बादल का पानी सबसे शुद्ध, आत्मबल सबसे बड़ा बल और अन्न सबसे प्रिय वस्तु है।
धन, यौवन और जीवन को उन्होंने अस्थिर बताया। चाणक्य के अनुसार इस संसार में अगर कुछ स्थायी है तो वह धर्म और अच्छे कर्म हैं। लोगों को प्रभावित करने को लेकर भी उन्होंने व्यवहारिक नीति दी। उनका कहना था कि लालची व्यक्ति को धन से, अभिमानी को विनम्रता से, मूर्ख को उसकी पसंद के अनुसार और विद्वान को सच बोलकर प्रभावित किया जा सकता है।
उन्होंने शेर का उदाहरण देते हुए कहा कि चाहे काम छोटा हो या बड़ा, शुरुआत से पूरी ताकत लगानी चाहिए। आधे मन से किया गया काम अक्सर असफलता देता है। चाणक्य ने एक और जरूरी बात कही कि बुद्धिमान व्यक्ति को अपनी आर्थिक हानि, मानसिक दुख, घर की कमजोरियां, अपमान या किसी के द्वारा ठगे जाने की बात हर किसी को नहीं बतानी चाहिए। उनका मानना था कि हर व्यक्ति आपकी परेशानी समझे, यह जरूरी नहीं। कई लोग इसका गलत फायदा भी उठा सकते हैं।
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हर इंसान को याद रखनी चाहिए चाणक्य की ये जरूरी बातें, धोखे और पछतावे से बचेंगे जिंदगीभर
Digital Desk
आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी लोगों के बीच उतनी ही चर्चा में रहती हैं, जितनी सदियों पहले थीं। वजह साफ है, उनकी बातें सीधे जीवन के व्यवहार, रिश्तों, सफलता और इंसान की सोच पर चोट करती हैं। चाणक्य ने अपनी नीतियों में ऐसे लोगों से दूरी बनाने की सलाह दी है, जो सामने मीठा बोलते हैं लेकिन पीछे नुकसान पहुंचाते हैं। उनका मानना था कि बुरे आचरण वाले लोगों की संगत धीरे-धीरे इंसान को भी बर्बादी की तरफ ले जाती है। उन्होंने साफ कहा कि जो व्यक्ति गलत लोगों से मित्रता करता है, वह जल्दी नष्ट हो जाता है।
चाणक्य नीति में परिवार और संतोष को भी सुखी जीवन का सबसे बड़ा आधार बताया गया है। उनके अनुसार जिस व्यक्ति का बेटा आज्ञाकारी हो, जीवनसाथी समझदार हो और जो धन को लेकर संतुष्ट रहता हो, उसके लिए यही धरती स्वर्ग जैसी है। वहीं दिखावटी मित्रों को लेकर भी उन्होंने चेतावनी दी थी। उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना उस घड़े से की, जिसके ऊपर दूध भरा हो लेकिन भीतर जहर छिपा हो। मतलब, हर मीठा बोलने वाला व्यक्ति आपका शुभचिंतक नहीं होता। चाणक्य ने ‘अति’ यानी किसी भी चीज की अधिकता से भी बचने की बात कही। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अधिक सौंदर्य, अधिक अभिमान और जरूरत से ज्यादा दान भी कई बार संकट का कारण बन जाता है।
चाणक्य की बातों में मुश्किल समय को लेकर भी गहरी सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि संकट आने से पहले डरना स्वाभाविक है, लेकिन जब मुश्किल सामने आ जाए तो पूरी ताकत से उसका सामना करना चाहिए। यही बुद्धिमानी है। उन्होंने कुछ कामों को पूरी तरह निरर्थक भी बताया। जैसे समुद्र में बारिश होना या तृप्त व्यक्ति को दोबारा भोजन कराना। उनके मुताबिक हर काम समय और परिस्थिति देखकर करना चाहिए। चाणक्य ने आत्मबल को सबसे बड़ी ताकत माना। उनका कहना था कि बादल का पानी सबसे शुद्ध, आत्मबल सबसे बड़ा बल और अन्न सबसे प्रिय वस्तु है।
धन, यौवन और जीवन को उन्होंने अस्थिर बताया। चाणक्य के अनुसार इस संसार में अगर कुछ स्थायी है तो वह धर्म और अच्छे कर्म हैं। लोगों को प्रभावित करने को लेकर भी उन्होंने व्यवहारिक नीति दी। उनका कहना था कि लालची व्यक्ति को धन से, अभिमानी को विनम्रता से, मूर्ख को उसकी पसंद के अनुसार और विद्वान को सच बोलकर प्रभावित किया जा सकता है।
उन्होंने शेर का उदाहरण देते हुए कहा कि चाहे काम छोटा हो या बड़ा, शुरुआत से पूरी ताकत लगानी चाहिए। आधे मन से किया गया काम अक्सर असफलता देता है। चाणक्य ने एक और जरूरी बात कही कि बुद्धिमान व्यक्ति को अपनी आर्थिक हानि, मानसिक दुख, घर की कमजोरियां, अपमान या किसी के द्वारा ठगे जाने की बात हर किसी को नहीं बतानी चाहिए। उनका मानना था कि हर व्यक्ति आपकी परेशानी समझे, यह जरूरी नहीं। कई लोग इसका गलत फायदा भी उठा सकते हैं।
