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महावीर स्वामी की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक, अहिंसा और सत्य का संदेश बना मार्गदर्शक
जीवन के मंत्र
पंच महाव्रत और त्रिरत्न के सिद्धांतों पर आधारित जीवन दर्शन, सामाजिक समानता पर दिया जोर
भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, की शिक्षाएं आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक मानी जाती हैं। उनके द्वारा दिए गए अहिंसा, सत्य और संयम के सिद्धांत वर्तमान समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।
अहिंसा परमो धर्म
महावीर स्वामी के अनुसार अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है। किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से कष्ट नहीं देना चाहिए।
जियो और जीने दो
हर प्राणी को जीने का अधिकार है। सह-अस्तित्व और करुणा पर आधारित जीवन जीने का संदेश।
पंच महाव्रत (पंचशील सिद्धांत)
अहिंसा – किसी भी जीव को नुकसान न पहुंचाना
सत्य – हमेशा सच बोलना
अस्तेय (अचौर्य) – चोरी न करना
अपरिग्रह – जरूरत से ज्यादा संग्रह न करना
ब्रह्मचर्य – इंद्रियों पर नियंत्रण रखना
त्रिरत्न (मोक्ष का मार्ग)
सम्यक दर्शन – सही आस्था
सम्यक ज्ञान – सच्चा ज्ञान
सम्यक चरित्र – सही आचरण
अनेकांतवाद
सत्य एक नहीं, कई दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है। दूसरों के विचारों का सम्मान करना चाहिए।
स्यादवाद
हर बात को सापेक्ष (relative) रूप से समझना चाहिए, किसी एक दृष्टिकोण को अंतिम सत्य नहीं मानना चाहिए।
ईश्वर के प्रति दृष्टिकोण
महावीर स्वामी ने सृष्टि के रचयिता के रूप में ईश्वर को नहीं माना, बल्कि आत्मा की शुद्ध अवस्था को सर्वोच्च माना।
आत्म-साक्षात्कार
खुद को जानना और आत्मा की शुद्धि ही जीवन का मुख्य उद्देश्य है।
सामाजिक समानता
जाति-पाति और भेदभाव का विरोध, सभी मनुष्यों को समान मानना।
संयम और सादगी
सादा जीवन, उच्च विचार और इच्छाओं पर नियंत्रण रखने की शिक्षा।
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महावीर स्वामी की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक, अहिंसा और सत्य का संदेश बना मार्गदर्शक
जीवन के मंत्र
भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, की शिक्षाएं आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक मानी जाती हैं। उनके द्वारा दिए गए अहिंसा, सत्य और संयम के सिद्धांत वर्तमान समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।
अहिंसा परमो धर्म
महावीर स्वामी के अनुसार अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है। किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से कष्ट नहीं देना चाहिए।
जियो और जीने दो
हर प्राणी को जीने का अधिकार है। सह-अस्तित्व और करुणा पर आधारित जीवन जीने का संदेश।
पंच महाव्रत (पंचशील सिद्धांत)
अहिंसा – किसी भी जीव को नुकसान न पहुंचाना
सत्य – हमेशा सच बोलना
अस्तेय (अचौर्य) – चोरी न करना
अपरिग्रह – जरूरत से ज्यादा संग्रह न करना
ब्रह्मचर्य – इंद्रियों पर नियंत्रण रखना
त्रिरत्न (मोक्ष का मार्ग)
सम्यक दर्शन – सही आस्था
सम्यक ज्ञान – सच्चा ज्ञान
सम्यक चरित्र – सही आचरण
अनेकांतवाद
सत्य एक नहीं, कई दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है। दूसरों के विचारों का सम्मान करना चाहिए।
स्यादवाद
हर बात को सापेक्ष (relative) रूप से समझना चाहिए, किसी एक दृष्टिकोण को अंतिम सत्य नहीं मानना चाहिए।
ईश्वर के प्रति दृष्टिकोण
महावीर स्वामी ने सृष्टि के रचयिता के रूप में ईश्वर को नहीं माना, बल्कि आत्मा की शुद्ध अवस्था को सर्वोच्च माना।
आत्म-साक्षात्कार
खुद को जानना और आत्मा की शुद्धि ही जीवन का मुख्य उद्देश्य है।
सामाजिक समानता
जाति-पाति और भेदभाव का विरोध, सभी मनुष्यों को समान मानना।
संयम और सादगी
सादा जीवन, उच्च विचार और इच्छाओं पर नियंत्रण रखने की शिक्षा।
