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घाटे के बीच एयर इंडिया ने टाटा, सिंगापुर एयरलाइंस से मांगे $1.5 अरब
Sandeep Patel
एयर इंडिया ने बढ़ते घाटे और महंगे बदलाव कार्यक्रम के बीच टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर की नई इक्विटी फंडिंग मांगी है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया ने अपने शेयरधारकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर की नई इक्विटी पूंजी मांगी है। भारी घाटे और एयरलाइन के महंगे बदलाव कार्यक्रम के बीच कंपनी को अतिरिक्त पूंजी की जरूरत महसूस हुई है। एयर इंडिया ने अपने शेयरधारकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर की नई इक्विटी फंडिंग की मांग की है। रॉयटर्स ने 25 अगस्त को मामले से परिचित लोगों के हवाले से यह जानकारी दी। यह मांग ऐसे समय आई है जब एयर इंडिया और उसकी बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस ने मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में संयुक्त रूप से करीब 2.33 अरब डॉलर का घाटा दर्ज किया। यह घाटा पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले दोगुने से भी अधिक रहा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह 2022 में टाटा समूह द्वारा एयर इंडिया का नियंत्रण संभालने के बाद शेयरधारकों से मांगी गई सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट की गई पूंजी में से एक होगी।
एयर इंडिया को नई पूंजी की जरूरत
एयर इंडिया अपने बेड़े के आधुनिकीकरण, यात्री सुविधाओं, तकनीकी प्रणालियों और परिचालन सुधारों पर भारी निवेश कर रही है। रॉयटर्स के अनुसार, एयरलाइन को पूंजी अपेक्षाकृत जल्द चाहिए, हालांकि प्रस्तावित रकम एकमुश्त देने के बजाय कई चरणों में उपलब्ध कराई जा सकती है। प्रस्तावित निवेश नई इक्विटी के रूप में होगा। फिलहाल इस पर बातचीत जारी है और निवेश को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अतिरिक्त पूंजी की मांग बताती है कि टाटा समूह के सामने एयर इंडिया को प्रतिस्पर्धी वैश्विक एयरलाइन बनाने की प्रक्रिया कितनी बड़ी वित्तीय चुनौती है।
सिंगापुर एयरलाइंस की हिस्सेदारी
सिंगापुर एयरलाइंस के पास एयर इंडिया में करीब 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित इक्विटी निवेश को मंजूरी मिलने पर उसे अपनी हिस्सेदारी के अनुपात में योगदान करना होगा। इस हिस्सेदारी के कारण बड़े पूंजी निवेश के लिए टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस के बीच समन्वय जरूरी होगा। टाटा समूह ने 2022 में भारत सरकार से एयर इंडिया का नियंत्रण हासिल किया था। इसके बाद समूह ने अपनी विमानन रणनीति के तहत एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के संचालन को व्यापक रूप से पुनर्गठित किया।नई पूंजी इस बदलाव को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।
बढ़ता गया वित्तीय घाटा
एयर इंडिया समूह के लिए पिछला वित्त वर्ष चुनौतीपूर्ण रहा। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा 2.33 अरब डॉलर रहा। यह आंकड़ा पिछले साल के घाटे से दोगुने से अधिक है। इस वित्तीय प्रदर्शन ने टाटा समूह पर एक साथ दो तरह का दबाव बढ़ाया है—एक ओर लागत कम करना और दूसरी ओर एयरलाइन के भविष्य के लिए बड़े निवेश जारी रखना। एयर इंडिया के बदलाव कार्यक्रम में भारी खर्च हो रहा है, जबकि कंपनी को परिचालन और भू-राजनीतिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ीं
एयर इंडिया के अंतरराष्ट्रीय परिचालन पर इजरायल-ईरान संघर्ष से पैदा हुए व्यवधानों का असर पड़ा है। इसके अलावा, भारतीय एयरलाइनों के लिए पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर लगी पाबंदियों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबे वैकल्पिक मार्गों से संचालित करना पड़ा है। लंबे उड़ान मार्गों से ईंधन की खपत, उड़ान समय और परिचालन खर्च बढ़ सकते हैं। इससे विमानों के उपयोग की क्षमता पर भी असर पड़ता है। ये चुनौतियां एयरलाइन के पहले से चल रहे पुनर्गठन खर्च के ऊपर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।
अहमदाबाद हादसे का असर
एयर इंडिया को 2025 के अहमदाबाद विमान हादसे के वित्तीय और परिचालन प्रभावों का भी सामना करना पड़ रहा है। इस दुर्घटना में 260 लोगों की मौत हुई थी। हादसे के बाद एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था और परिचालन प्रक्रियाओं को लेकर व्यापक जांच और सवाल उठे। टाटा समूह एयर इंडिया की परिचालन प्रणालियों और सुरक्षा प्रक्रियाओं में बदलाव कर रहा है। दुर्घटना और उसके बाद की प्रक्रिया ने एयरलाइन की छवि और यात्रियों के भरोसे को दोबारा मजबूत करने की चुनौती भी बढ़ाई है।
बेड़े पर भारी निवेश
एयर इंडिया के बदलाव कार्यक्रम का बड़ा हिस्सा विमान बेड़े के आधुनिकीकरण से जुड़ा है। एयरलाइन ने अपने बेड़े के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए एयरबस और बोइंग से बड़ी संख्या में विमानों के ऑर्डर दिए हैं। इसके साथ ही पुराने विमानों के केबिन और यात्री सुविधाओं को भी अपग्रेड किया जा रहा है। रॉयटर्स ने इस साल की शुरुआत में रिपोर्ट किया था कि टाटा समूह लागत कम करने और वित्तीय दबाव नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत एयरबस और बोइंग से ऑर्डर किए गए सैकड़ों विमानों की डिलीवरी टालने की मांग कर चुका है।
तकनीक और संचालन में बदलाव
एयर इंडिया का बदलाव केवल विमानों तक सीमित नहीं है। टाटा समूह एयरलाइन की पुरानी तकनीकी प्रणालियों को बदलने और परिचालन प्रक्रियाओं में सुधार पर भी काम कर रहा है। ग्राहक अनुभव, डिजिटल सिस्टम, संगठनात्मक ढांचे और आंतरिक प्रक्रियाओं में बदलाव इस योजना का हिस्सा हैं। इन सुधारों के लिए बड़े निवेश की जरूरत है, लेकिन एयरलाइन को अधिक कुशल और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इन्हें महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कंपनी एक तरफ लंबी अवधि के बदलावों में निवेश करे और दूसरी तरफ तत्काल घाटे तथा नकदी प्रवाह पर नियंत्रण हासिल करे।
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