- Hindi News
- देश विदेश
- नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ से 1,243 मौतें, हजारों अब भी लापता: राहत-बचाव अभियान जारी
नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ से 1,243 मौतें, हजारों अब भी लापता: राहत-बचाव अभियान जारी
Digital Desk
नेपाल और तिब्बत में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद मौतों का आंकड़ा 1,243 तक पहुंच गया है। हजारों लोग अब भी लापता हैं। नेपाल में सुरक्षाबलों और विशेषज्ञ टीमों का तलाशी अभियान जारी है, जबकि खराब मौसम और मलबा बचाव कार्य में बड़ी बाधा बन रहा है।
नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल-तिब्बत फ्लैश फ्लड में मौतों का आंकड़ा बढ़कर 1,243 हो गया है। 26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में हुए बर्फ-पत्थर के हिमस्खलन के बाद अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों को प्रभावित किया। इसके अलावा चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी नेपाल सीमा के पास बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। नेपाल में राहत और खोज अभियान अभी भी जारी है। बड़ी संख्या में लोग लापता हैं और कई परिवार अपने परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में लगातार बारिश और भारी मलबे के कारण राहत टीमों के लिए कई स्थानों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है।
नेपाल में हजारों लोग अब भी लापता
नेपाल पुलिस के अनुसार, बाढ़ प्रभावित आठ जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। चितवन से 348, नवलपरासी ईस्ट से 218, नवलपरासी वेस्ट से 208 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा रसुवा से 127, गोरखा से 69, धादिंग से 60 और तनहूं से 38 शव बरामद हुए हैं।
लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल की सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने हेलीकॉप्टर तथा जमीनी मार्गों से अब तक करीब 12 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला है। खोज और बचाव अभियान में 21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है।
हाइड्रोपावर प्लांट की सुरंगों में तलाश
बचाव अभियान का एक बड़ा केंद्र भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे स्थित हाइड्रोपावर परियोजनाएं बनी हुई हैं। बाढ़ के बाद कई बिजली परियोजनाओं के सुरंगनुमा हिस्सों में लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई है। बचाव दल इन सुरंगों और पावरहाउस तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन भारी मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और खराब मौसम अभियान को धीमा कर रहे हैं। इससे उन लोगों तक जल्द पहुंचने की चुनौती बढ़ गई है, जिनके अभी भी जीवित होने की उम्मीद है।
तिब्बत में भी बड़ी तबाही
नेपाल के अलावा चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में भी बाढ़ ने भारी नुकसान किया है। नेपाल सीमा के पास स्थित Gyirong County में बाढ़ के कारण मौतों का आंकड़ा 21 तक पहुंच गया है, जबकि 541 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। नेपाल और चीन दोनों ही प्रभावित क्षेत्रों में खोज और राहत अभियान चला रहे हैं। आपदा के बाद सीमा क्षेत्र में संपर्क और परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन को बताया अहम कारण
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने संसद में इस आपदा के संदर्भ में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में बदलती जलवायु के कारण ऐसे खतरों का जोखिम बढ़ रहा है। शाह के अनुसार, विशेषज्ञों ने रसुवा के भोटेकोशी क्षेत्र में आई बाढ़ को हिमालय में हुए बर्फ-पत्थर के हिमस्खलन से जोड़कर देखा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहयोग की अपील की।
सड़क, पुल और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान
बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। सरकार के मुताबिक, रसुवा-नुवाकोट क्षेत्र में करीब 40 किलोमीटर पक्की सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि 16 किलोमीटर सड़क को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 42 सस्पेंशन ब्रिज और 31 मोटरेबल ब्रिज भी प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से करीब 400 मेगावाट की जलविद्युत क्षमता भी प्रभावित हुई है। इससे राहत अभियान के साथ-साथ आने वाले समय में बिजली और परिवहन व्यवस्था को बहाल करना भी बड़ी चुनौती बनने वाला है।
बारिश ने बढ़ाई बचाव अभियान की मुश्किल
प्रभावित इलाकों में जारी बारिश ने बचाव अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। मौसम विभाग ने कोशी, बागमती और गंडकी प्रांत के कुछ पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई थी। ऐसे में पहले से अस्थिर पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। नेपाल को भारत, चीन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों से राहत और तकनीकी मदद मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी पुनर्वास और आपदा प्रबंधन के लिए सहयोग का भरोसा दिया है।
फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों को बहाल करने की है। लेकिन आपदा का पैमाना देखते हुए नेपाल के सामने तत्काल राहत के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्रों में बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली और आपदा तैयारी मजबूत करने की बड़ी चुनौती भी है।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

