PM मोदी जॉर्डन के लिए रवाना: 7 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का दौरा, फर्टिलाइजर और IMEC पर फोकस

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75 साल पूरे होने पर भारत-जॉर्डन रिश्तों की समीक्षा, किंग अब्दुल्ला से व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग पर होगी बातचीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार सुबह जॉर्डन के लिए रवाना हो गए। यह उनकी जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की तीन देशों की आधिकारिक यात्रा का पहला चरण है, जो 15 से 18 दिसंबर तक चलेगा। प्रधानमंत्री जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय इब्न अल-हुसैन के निमंत्रण पर 15 और 16 दिसंबर को अम्मान में रहेंगे। यह दौरा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि करीब सात साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री जॉर्डन की आधिकारिक यात्रा पर गया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान भारत और जॉर्डन के द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा होगी। बातचीत में व्यापार, निवेश, उर्वरक आपूर्ति, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया में बदलते हालात प्रमुख एजेंडा रहेंगे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और जॉर्डन के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों ने 1950 में औपचारिक संबंध स्थापित किए थे।

जॉर्डन भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण साझेदार है। भारत अपनी कुल रॉक फॉस्फेट जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत जॉर्डन से आयात करता है, जो उर्वरक उत्पादन के लिए जरूरी कच्चा माल है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-जॉर्डन के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 26,000 करोड़ रुपये का रहा। भारत जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों ने इसे बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। भारतीय कंपनियों ने जॉर्डन के फॉस्फेट और टेक्सटाइल क्षेत्रों में 1.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस कॉरिडोर की घोषणा 2023 में नई दिल्ली में हुए G20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच एक वैकल्पिक और तेज व्यापार मार्ग विकसित करना है। माना जा रहा है कि जॉर्डन और इजराइल के बीच रेल कनेक्टिविटी को लेकर इस दौरे में बातचीत हो सकती है, क्योंकि इस हिस्से पर अभी काम बाकी है।

इससे पहले फरवरी 2018 में पीएम मोदी की जॉर्डन में केवल दो घंटे की ट्रांजिट यात्रा हुई थी, जब वे फिलिस्तीन जा रहे थे। उस दौरान किंग अब्दुल्ला स्वयं एयरपोर्ट पहुंचकर उनसे मिले थे। इसके कुछ ही दिनों बाद किंग अब्दुल्ला भारत आए थे और तब प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकॉल से हटकर एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया था। मौजूदा दौरे को उसी आपसी विश्वास और करीबी संबंधों की अगली कड़ी माना जा रहा है।

जॉर्डन मध्य पूर्व का ऐसा देश है जहां तेल संसाधन नहीं हैं, लेकिन फॉस्फेट और पोटाश जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। यही कारण है कि कृषि और उर्वरक क्षेत्र में भारत-जॉर्डन सहयोग लगातार मजबूत होता गया है।

जॉर्डन दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 16 दिसंबर को इथियोपिया और फिर ओमान जाएंगे। कुल मिलाकर यह यात्रा भारत की पश्चिम एशिया और अफ्रीका नीति को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है और आने वाले समय में इसके ठोस नतीजे सामने आने की उम्मीद है।

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15 Dec 2025 By Nitin Trivedi

PM मोदी जॉर्डन के लिए रवाना: 7 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का दौरा, फर्टिलाइजर और IMEC पर फोकस

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार सुबह जॉर्डन के लिए रवाना हो गए। यह उनकी जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की तीन देशों की आधिकारिक यात्रा का पहला चरण है, जो 15 से 18 दिसंबर तक चलेगा। प्रधानमंत्री जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय इब्न अल-हुसैन के निमंत्रण पर 15 और 16 दिसंबर को अम्मान में रहेंगे। यह दौरा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि करीब सात साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री जॉर्डन की आधिकारिक यात्रा पर गया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान भारत और जॉर्डन के द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा होगी। बातचीत में व्यापार, निवेश, उर्वरक आपूर्ति, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया में बदलते हालात प्रमुख एजेंडा रहेंगे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और जॉर्डन के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों ने 1950 में औपचारिक संबंध स्थापित किए थे।

जॉर्डन भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण साझेदार है। भारत अपनी कुल रॉक फॉस्फेट जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत जॉर्डन से आयात करता है, जो उर्वरक उत्पादन के लिए जरूरी कच्चा माल है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-जॉर्डन के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 26,000 करोड़ रुपये का रहा। भारत जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों ने इसे बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। भारतीय कंपनियों ने जॉर्डन के फॉस्फेट और टेक्सटाइल क्षेत्रों में 1.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस कॉरिडोर की घोषणा 2023 में नई दिल्ली में हुए G20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच एक वैकल्पिक और तेज व्यापार मार्ग विकसित करना है। माना जा रहा है कि जॉर्डन और इजराइल के बीच रेल कनेक्टिविटी को लेकर इस दौरे में बातचीत हो सकती है, क्योंकि इस हिस्से पर अभी काम बाकी है।

इससे पहले फरवरी 2018 में पीएम मोदी की जॉर्डन में केवल दो घंटे की ट्रांजिट यात्रा हुई थी, जब वे फिलिस्तीन जा रहे थे। उस दौरान किंग अब्दुल्ला स्वयं एयरपोर्ट पहुंचकर उनसे मिले थे। इसके कुछ ही दिनों बाद किंग अब्दुल्ला भारत आए थे और तब प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकॉल से हटकर एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया था। मौजूदा दौरे को उसी आपसी विश्वास और करीबी संबंधों की अगली कड़ी माना जा रहा है।

जॉर्डन मध्य पूर्व का ऐसा देश है जहां तेल संसाधन नहीं हैं, लेकिन फॉस्फेट और पोटाश जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। यही कारण है कि कृषि और उर्वरक क्षेत्र में भारत-जॉर्डन सहयोग लगातार मजबूत होता गया है।

जॉर्डन दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 16 दिसंबर को इथियोपिया और फिर ओमान जाएंगे। कुल मिलाकर यह यात्रा भारत की पश्चिम एशिया और अफ्रीका नीति को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है और आने वाले समय में इसके ठोस नतीजे सामने आने की उम्मीद है।

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