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भारत पर ‘जल हथियार’ का आरोप: पाकिस्तान ने UN में उठाया सिंधु जल संधि का मुद्दा
अंतराष्ट्रीय न्यूज
भारत के फैसले से जल सुरक्षा खतरे में होने का दावा, क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराने लगे सवाल
भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के फैसले को लेकर पाकिस्तान की बेचैनी एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर दिखाई दी। इस्लामाबाद ने आरोप लगाया है कि भारत पानी को राजनीतिक दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जिससे पाकिस्तान की जल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र में आयोजित ग्लोबल वॉटर पॉलिसी राउंडटेबल के दौरान पाकिस्तान के कार्यवाहक स्थायी प्रतिनिधि उस्मान जदून ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत का एकतरफा कदम अंतरराष्ट्रीय समझौतों की भावना के खिलाफ है और इससे दक्षिण एशिया में पहले से मौजूद तनाव और गहरा सकता है। यह कार्यक्रम कनाडा के स्थायी मिशन और संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया गया था।
पाकिस्तान का दावा: संधि अब भी वैध
पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने दो टूक कहा कि सिंधु जल संधि आज भी कानूनी रूप से लागू है और इसमें किसी भी देश को इसे एकतरफा रूप से रोकने या बदलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने पिछले साल अप्रैल में लिया गया फैसला जानबूझकर दबाव बनाने के इरादे से किया और इससे पाकिस्तान के लाखों लोगों की आजीविका पर असर पड़ सकता है।
उनका कहना था कि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था की रीढ़ है। देश की 80 प्रतिशत से अधिक खेती इसी जल प्रणाली पर निर्भर है और करीब 24 करोड़ लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें इससे जुड़ी हैं। ऐसे में पानी के प्रवाह को लेकर किसी भी तरह की अनिश्चितता पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
भारत का रुख: ‘खून और पानी साथ नहीं’
भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लिया था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। इसके बाद भारत सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया था कि आतंक और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते।
भारत की ओर से यह भी कहा गया कि संधि के तहत उसे पूर्वी नदियों—सतलुज, ब्यास और रावी—के जल पर पूरा अधिकार है, जबकि पश्चिमी नदियों—सिंधु, झेलम और चिनाब—का उपयोग पाकिस्तान को दिया गया है। भारत का तर्क है कि जब पड़ोसी देश से लगातार सुरक्षा चुनौतियां मिल रही हों, तो पुराने समझौतों पर पुनर्विचार जरूरी हो जाता है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी
पाकिस्तान द्वारा UN में मुद्दा उठाए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जल कूटनीति को लेकर चिंता बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पानी जैसे संसाधन को लेकर टकराव भविष्य में संघर्ष का नया कारण बन सकता है। दक्षिण एशिया में पहले से मौजूद राजनीतिक तनाव के बीच जल विवाद अगर और गहराया, तो इसका असर सीमा पार संबंधों से आगे जाकर वैश्विक मंच तक महसूस किया जा सकता है।
फिलहाल, पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय दबाव के जरिए उठाने की रणनीति पर चलता दिख रहा है, जबकि भारत अपने फैसले को सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जोड़कर सही ठहरा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह विवाद कूटनीतिक बातचीत की ओर बढ़ता है या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर टकराव और तेज होता है।
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