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शेयर बाजार में कमजोरी बरकरार: सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा फिसला, निफ्टी भी लाल निशान में
बिजनेस न्यूज
रियल एस्टेट और IT शेयरों में बिकवाली, ग्लोबल संकेत कमजोर; FII की लगातार निकासी से निवेशकों में सतर्कता
भारतीय शेयर बाजार में 21 जनवरी को कारोबार के दौरान कमजोरी देखने को मिली। सेंसेक्स 100 अंक से अधिक गिरकर 82,000 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी भी करीब 30 अंक फिसलकर 25,200 के आसपास बना रहा। शुरुआती सत्र से ही बाजार पर वैश्विक संकेतों और चुनिंदा सेक्टर्स में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
बीएसई सेंसेक्स के 30 में से 16 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 14 शेयर हरे निशान में रहे। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में हल्की मजबूती दिखी, लेकिन रियल एस्टेट, मीडिया और आईटी शेयरों में बिकवाली हावी रही। आईटी कंपनियों पर दबाव अमेरिकी बाजारों की कमजोरी और डॉलर की मजबूती के कारण देखा गया।
बाजार पर वैश्विक कारकों का असर साफ नजर आया। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.26% गिरकर 4,873 पर और जापान का निक्केई 0.56% टूटकर 52,693 पर कारोबार करता दिखा। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.13% की गिरावट के साथ 26,453 पर रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट मामूली बढ़त के साथ 4,120 पर बंद हुआ।
अमेरिकी बाजारों में 20 जनवरी को भारी गिरावट दर्ज की गई थी। डाउ जोन्स 1.76% टूटकर 48,488 पर बंद हुआ, जबकि नैस्डेक कंपोजिट में 2.39% और एसएंडपी 500 में 2.06% की गिरावट आई। इन कमजोर संकेतों का असर घरेलू बाजारों पर भी पड़ा।
सरकारी अपडेट और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो 20 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने ₹2,191 करोड़ के शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹2,755 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया। दिसंबर 2025 में FIIs द्वारा ₹34,350 करोड़ की निकासी के मुकाबले DIIs ने ₹79,620 करोड़ का निवेश किया था, जिससे बाजार में संतुलन बना रहा।
शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज IPO निवेशकों के रडार पर बना हुआ है। IPO में निवेश का आज दूसरा दिन है और यह 22 जनवरी तक खुला रहेगा। ₹118–₹124 के प्राइस बैंड वाले इस इश्यू का कुल आकार ₹1,907 करोड़ है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में मौजूदा गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों से बढ़ी वैश्विक अनिश्चितता और तीसरी तिमाही में कुछ बड़ी कंपनियों, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज, के कमजोर नतीजे अहम कारण हैं।
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