NATO ने चेतावनी दी: अमेरिका के बिना यूरोप अपनी रक्षा नहीं कर सकता

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महासचिव मार्क रुट ने यूरोप से रक्षा बजट बढ़ाने और परमाणु क्षमता विकसित करने का सुझाव दिया

NATO के महासचिव मार्क रुट ने ब्रुसेल्स में यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि यूरोप अकेले अपनी रक्षा करने में सक्षम नहीं है। रुट ने कहा कि यदि यूरोपीय देश अमेरिका के बिना सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो उन्हें अपना रक्षा बजट जीडीपी का 10% तक बढ़ाना होगा और अपनी परमाणु क्षमता विकसित करनी होगी।

 रुट ने बेल्जियम के ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ की संसद की समितियों को संबोधित करते हुए यह बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में NATO के खर्च में यूरोपीय देशों का योगदान केवल 30% है, जो उनकी औसत जीडीपी का 2% है।

रुट ने कहा कि अमेरिका की सैन्य शक्ति और परमाणु सुरक्षा यूरोप की रक्षा का आधार है। अगर यूरोप अकेला चलना चाहता है, तो अरबों डॉलर खर्च करके मिसाइल, गोला-बारूद, कमांड सिस्टम और उपग्रह क्षमताओं का निर्माण करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रम्प प्रशासन की आर्कटिक और ग्रीनलैंड रणनीति कई यूरोपीय नेताओं को चिढ़ा रही है, लेकिन उनके अनुसार यह सुरक्षा दृष्टि से उचित कदम है।

ग्रीनलैंड विवाद हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को लेकर NATO और डेनमार्क के बीच समझौता किया। रुट ने कहा कि अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच त्रिपक्षीय वार्ता जारी रहेगी और NATO महासचिव इस प्रक्रिया में सीधे शामिल नहीं होंगे। इस मसले पर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं में नाराजगी भी देखी गई।

यूरोप पर निर्भरता  रुट ने जोर देकर कहा कि 70 साल बाद भी यूरोप अमेरिकी सैन्य शक्ति पर निर्भर है। यूरोपीय देशों को 2035 तक जीडीपी का 5%–10% रक्षा पर खर्च करना होगा। उन्होंने कहा, “अगर यूरोप अकेले चल सके तो मेरी ओर से शुभकामनाएं।” उन्होंने रूस और चीन को आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा चुनौती बताया।

इतिहास और वर्तमान स्थिति सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद यूरोप आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर हुआ। अमेरिका ने अपने परमाणु हथियार और सेना के माध्यम से यूरोप को सुरक्षा मुहैया कराई। जर्मनी, पोलैंड और ब्रिटेन में 10 लाख से अधिक अमेरिकी सैनिक और मिसाइल डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं।

क्या होगा अगर अमेरिका NATO छोड़े यूरोप को गोला-बारूद, विमान, उपग्रह और अन्य सैन्य संरचना की भारी कमी का सामना करना पड़ेगा। वर्तमान में यूके और फ्रांस के पास 500 परमाणु हथियार हैं, जबकि रूस के पास 6000 हैं। अमेरिका की गैर-मौजूदगी में यूरोप को अपनी न्यूक्लियर नीति और सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह से फिर से तैयार करना होगा।

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