Epstein Files: काबा की पवित्र किस्वा अमेरिका कैसे पहुंची? नई फाइल्स ने उठाए गंभीर सवाल

अंतराष्ट्रीय न्यूज

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2017 में मक्का से जुड़े पवित्र कपड़े के टुकड़ों की विदेशी डिलीवरी, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और कस्टम प्रक्रिया पर सवाल

अमेरिका में जारी की गई नई “एपस्टीन फाइल्स” में सामने आए एक खुलासे ने वैश्विक स्तर पर धार्मिक, नैतिक और कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों के अनुसार, इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का में स्थित काबा को ढकने वाले कपड़े ‘किस्वा’ से जुड़े कुछ टुकड़े वर्ष 2017 में अमेरिका भेजे गए थे। ये टुकड़े एक ऐसे व्यक्ति तक पहुंचे, जिसका नाम पहले ही अंतरराष्ट्रीय अपराध और विवादों से जुड़ चुका है। यह जानकारी सामने आने के बाद मुस्लिम समाज और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में तीखी प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं।

फाइल्स में शामिल ईमेल रिकॉर्ड्स बताते हैं कि यह शिपमेंट मध्य-पूर्व से जुड़े कुछ निजी संपर्कों के माध्यम से भेजी गई थी। इन ईमेल्स में तीन अलग-अलग कपड़ों के टुकड़ों का उल्लेख है—एक ऐसा कपड़ा जो काबा के भीतर उपयोग में आया था, दूसरा बाहरी किस्वा का हिस्सा और तीसरा उसी सामग्री से बना, लेकिन उपयोग में न लाया गया कपड़ा। दस्तावेजों के अनुसार, इन टुकड़ों को हवाई कार्गो के जरिए अमेरिका भेजा गया।

सबसे अहम सवाल यह है कि इतनी पवित्र और संवेदनशील धार्मिक वस्तुएं सामान्य कस्टम प्रक्रिया से कैसे गुजर गईं। ईमेल संवाद में संकेत मिलता है कि उपयोग में न आए कपड़े को ‘आर्टवर्क’ की श्रेणी में दिखाया गया, ताकि कस्टम क्लीयरेंस में किसी तरह की अड़चन न आए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह जानकारी सही है, तो यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कस्टम नियमों की गंभीर अनदेखी का मामला हो सकता है।

दस्तावेज यह स्पष्ट नहीं करते कि इन पवित्र वस्तुओं को आखिर किस उद्देश्य से मंगवाया गया था। हालांकि ईमेल्स में इनके धार्मिक महत्व का उल्लेख जरूर है। एक संदेश में कहा गया है कि यह कपड़ा करोड़ों मुस्लिम श्रद्धालुओं की आस्था, दुआओं और भावनाओं से जुड़ा है, जिसे वर्षों तक हज और उमरा के दौरान छुआ गया होगा। ऐसे में इसका निजी संग्रह तक पहुंचना कई लोगों के लिए अस्वीकार्य है।

फाइल्स में यह भी संकेत मिलते हैं कि 2017 के दौरान मध्य-पूर्व से जुड़े कुछ लोग अमेरिका में उस व्यक्ति के निजी ठिकानों की स्थिति और हालात को लेकर लगातार संपर्क में थे। इसके अलावा कुछ निजी वस्तुओं और जांच किट्स के आदान-प्रदान का भी जिक्र मिलता है, जिनका उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। इन बिंदुओं ने उस समय सक्रिय अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर संदेह और गहरा कर दिया है।

धार्मिक मामलों के जानकारों के अनुसार, किस्वा को हर साल बदला जाता है और पुराने कपड़े को बेहद सम्मान के साथ संभाला जाता है। आमतौर पर इसे छोटे हिस्सों में काटकर इस्लामी संस्थानों, संग्रहालयों या विशिष्ट अतिथियों को भेंट किया जाता है। ऐसे में इसका निजी और विवादित संदर्भों में इस्तेमाल होना गंभीर चिंता का विषय है।

इन खुलासों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पवित्र धार्मिक वस्तुएं किन परिस्थितियों में और किसकी अनुमति से देश की सीमाओं से बाहर भेजी गईं। यह मामला केवल एक व्यक्ति या घटना तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक नैतिक जिम्मेदारी और धार्मिक सम्मान से जुड़ा हुआ है।

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www.dainikjagranmpcg.com
02 Feb 2026 By Nitin Trivedi

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अमेरिका में जारी की गई नई “एपस्टीन फाइल्स” में सामने आए एक खुलासे ने वैश्विक स्तर पर धार्मिक, नैतिक और कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों के अनुसार, इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का में स्थित काबा को ढकने वाले कपड़े ‘किस्वा’ से जुड़े कुछ टुकड़े वर्ष 2017 में अमेरिका भेजे गए थे। ये टुकड़े एक ऐसे व्यक्ति तक पहुंचे, जिसका नाम पहले ही अंतरराष्ट्रीय अपराध और विवादों से जुड़ चुका है। यह जानकारी सामने आने के बाद मुस्लिम समाज और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में तीखी प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं।

फाइल्स में शामिल ईमेल रिकॉर्ड्स बताते हैं कि यह शिपमेंट मध्य-पूर्व से जुड़े कुछ निजी संपर्कों के माध्यम से भेजी गई थी। इन ईमेल्स में तीन अलग-अलग कपड़ों के टुकड़ों का उल्लेख है—एक ऐसा कपड़ा जो काबा के भीतर उपयोग में आया था, दूसरा बाहरी किस्वा का हिस्सा और तीसरा उसी सामग्री से बना, लेकिन उपयोग में न लाया गया कपड़ा। दस्तावेजों के अनुसार, इन टुकड़ों को हवाई कार्गो के जरिए अमेरिका भेजा गया।

सबसे अहम सवाल यह है कि इतनी पवित्र और संवेदनशील धार्मिक वस्तुएं सामान्य कस्टम प्रक्रिया से कैसे गुजर गईं। ईमेल संवाद में संकेत मिलता है कि उपयोग में न आए कपड़े को ‘आर्टवर्क’ की श्रेणी में दिखाया गया, ताकि कस्टम क्लीयरेंस में किसी तरह की अड़चन न आए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह जानकारी सही है, तो यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कस्टम नियमों की गंभीर अनदेखी का मामला हो सकता है।

दस्तावेज यह स्पष्ट नहीं करते कि इन पवित्र वस्तुओं को आखिर किस उद्देश्य से मंगवाया गया था। हालांकि ईमेल्स में इनके धार्मिक महत्व का उल्लेख जरूर है। एक संदेश में कहा गया है कि यह कपड़ा करोड़ों मुस्लिम श्रद्धालुओं की आस्था, दुआओं और भावनाओं से जुड़ा है, जिसे वर्षों तक हज और उमरा के दौरान छुआ गया होगा। ऐसे में इसका निजी संग्रह तक पहुंचना कई लोगों के लिए अस्वीकार्य है।

फाइल्स में यह भी संकेत मिलते हैं कि 2017 के दौरान मध्य-पूर्व से जुड़े कुछ लोग अमेरिका में उस व्यक्ति के निजी ठिकानों की स्थिति और हालात को लेकर लगातार संपर्क में थे। इसके अलावा कुछ निजी वस्तुओं और जांच किट्स के आदान-प्रदान का भी जिक्र मिलता है, जिनका उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। इन बिंदुओं ने उस समय सक्रिय अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर संदेह और गहरा कर दिया है।

धार्मिक मामलों के जानकारों के अनुसार, किस्वा को हर साल बदला जाता है और पुराने कपड़े को बेहद सम्मान के साथ संभाला जाता है। आमतौर पर इसे छोटे हिस्सों में काटकर इस्लामी संस्थानों, संग्रहालयों या विशिष्ट अतिथियों को भेंट किया जाता है। ऐसे में इसका निजी और विवादित संदर्भों में इस्तेमाल होना गंभीर चिंता का विषय है।

इन खुलासों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पवित्र धार्मिक वस्तुएं किन परिस्थितियों में और किसकी अनुमति से देश की सीमाओं से बाहर भेजी गईं। यह मामला केवल एक व्यक्ति या घटना तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक नैतिक जिम्मेदारी और धार्मिक सम्मान से जुड़ा हुआ है।

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