भारत-EU फ्री ट्रेड डील से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव, 1 करोड़ नौकरियों पर संकट के बादल

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यूरोपीय बाजार में भारत को टैक्स-फ्री पहुंच मिलने से पाकिस्तान के निर्यात और रोजगार पर अरबों डॉलर के नुकसान की आशंका

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर पाकिस्तान में गंभीर आर्थिक चिंता उभरकर सामने आई है। सरकारी और औद्योगिक हलकों का आकलन है कि इस समझौते के लागू होने से पाकिस्तान में करीब एक करोड़ नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं और निर्यात से जुड़े क्षेत्रों को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है। पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर यूरोपीय अधिकारियों से संपर्क बढ़ा दिया है ताकि यह समझा जा सके कि भारत-EU डील का उसके व्यापार पर वास्तविक असर कितना गहरा होगा।

पाकिस्तान की चिंता की सबसे बड़ी वजह यूरोपीय बाजार में उसकी अब तक बनी बढ़त का कमजोर पड़ना है। लंबे समय से पाकिस्तान को यूरोपीय संघ की जीएसपी प्लस योजना के तहत विशेष व्यापारिक रियायतें मिलती रही हैं। इसके तहत उसके करीब दो-तिहाई उत्पाद बिना टैक्स के यूरोप भेजे जाते रहे, जिनमें कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स प्रमुख हैं। इसी कारण यूरोप में पाकिस्तान का टेक्सटाइल निर्यात मजबूत रहा, जबकि भारत को समान उत्पादों पर अधिक शुल्क देना पड़ता था।

अब भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद स्थिति बदलती दिख रही है। इस समझौते से भारत को यूरोपीय बाजार में बड़े पैमाने पर टैक्स-फ्री पहुंच मिलने जा रही है। इससे श्रम आधारित उत्पादों, विशेषकर कपड़ा, परिधान और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भारत की प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ेगी। पाकिस्तानी उद्योग संगठनों का मानना है कि इससे उनकी कीमत आधारित बढ़त लगभग खत्म हो जाएगी।

पाकिस्तान के कारोबारी वर्ग को यह भी चिंता है कि उसकी जीएसपी प्लस सुविधा 2027 में समाप्त होने वाली है। यदि इसे आगे नहीं बढ़ाया गया, तो यूरोप के साथ उसका व्यापार और अधिक महंगा हो जाएगा। ऐसे में भारत जैसे बड़े और विविध उत्पादन आधार वाले देश के सामने टिके रहना मुश्किल हो सकता है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि एक बार यूरोपीय बाजार से हिस्सेदारी घटी, तो उसे दोबारा हासिल करना बेहद कठिन होता है।

सरकारी स्तर पर पाकिस्तान अब घरेलू उद्योगों को राहत देने की मांग पर विचार कर रहा है। इसमें सस्ती बिजली, कम कर दरें और आसान कर्ज जैसी सुविधाएं शामिल हैं, ताकि स्थानीय उद्योग अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकें। विदेश मंत्रालय का कहना है कि जीएसपी प्लस व्यवस्था अब तक यूरोप और पाकिस्तान—दोनों के लिए लाभकारी रही है, क्योंकि इससे यूरोपीय बाजार को सस्ते उत्पादों की निरंतर आपूर्ति मिलती रही।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दक्षिण एशिया के व्यापार संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है। जहां भारत के लिए यह समझौता नए अवसर खोलता है, वहीं पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ी आर्थिक चुनौती के रूप में उभर रहा है। आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान अपनी नीतियों में क्या बदलाव करता है और वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति को कैसे संभालता है।

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www.dainikjagranmpcg.com
02 Feb 2026 By Nitin Trivedi

भारत-EU फ्री ट्रेड डील से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव, 1 करोड़ नौकरियों पर संकट के बादल

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर पाकिस्तान में गंभीर आर्थिक चिंता उभरकर सामने आई है। सरकारी और औद्योगिक हलकों का आकलन है कि इस समझौते के लागू होने से पाकिस्तान में करीब एक करोड़ नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं और निर्यात से जुड़े क्षेत्रों को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है। पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर यूरोपीय अधिकारियों से संपर्क बढ़ा दिया है ताकि यह समझा जा सके कि भारत-EU डील का उसके व्यापार पर वास्तविक असर कितना गहरा होगा।

पाकिस्तान की चिंता की सबसे बड़ी वजह यूरोपीय बाजार में उसकी अब तक बनी बढ़त का कमजोर पड़ना है। लंबे समय से पाकिस्तान को यूरोपीय संघ की जीएसपी प्लस योजना के तहत विशेष व्यापारिक रियायतें मिलती रही हैं। इसके तहत उसके करीब दो-तिहाई उत्पाद बिना टैक्स के यूरोप भेजे जाते रहे, जिनमें कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स प्रमुख हैं। इसी कारण यूरोप में पाकिस्तान का टेक्सटाइल निर्यात मजबूत रहा, जबकि भारत को समान उत्पादों पर अधिक शुल्क देना पड़ता था।

अब भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद स्थिति बदलती दिख रही है। इस समझौते से भारत को यूरोपीय बाजार में बड़े पैमाने पर टैक्स-फ्री पहुंच मिलने जा रही है। इससे श्रम आधारित उत्पादों, विशेषकर कपड़ा, परिधान और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भारत की प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ेगी। पाकिस्तानी उद्योग संगठनों का मानना है कि इससे उनकी कीमत आधारित बढ़त लगभग खत्म हो जाएगी।

पाकिस्तान के कारोबारी वर्ग को यह भी चिंता है कि उसकी जीएसपी प्लस सुविधा 2027 में समाप्त होने वाली है। यदि इसे आगे नहीं बढ़ाया गया, तो यूरोप के साथ उसका व्यापार और अधिक महंगा हो जाएगा। ऐसे में भारत जैसे बड़े और विविध उत्पादन आधार वाले देश के सामने टिके रहना मुश्किल हो सकता है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि एक बार यूरोपीय बाजार से हिस्सेदारी घटी, तो उसे दोबारा हासिल करना बेहद कठिन होता है।

सरकारी स्तर पर पाकिस्तान अब घरेलू उद्योगों को राहत देने की मांग पर विचार कर रहा है। इसमें सस्ती बिजली, कम कर दरें और आसान कर्ज जैसी सुविधाएं शामिल हैं, ताकि स्थानीय उद्योग अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकें। विदेश मंत्रालय का कहना है कि जीएसपी प्लस व्यवस्था अब तक यूरोप और पाकिस्तान—दोनों के लिए लाभकारी रही है, क्योंकि इससे यूरोपीय बाजार को सस्ते उत्पादों की निरंतर आपूर्ति मिलती रही।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दक्षिण एशिया के व्यापार संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है। जहां भारत के लिए यह समझौता नए अवसर खोलता है, वहीं पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ी आर्थिक चुनौती के रूप में उभर रहा है। आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान अपनी नीतियों में क्या बदलाव करता है और वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति को कैसे संभालता है।

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