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अब स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में ‘जन गण मन’ से पहले गाया जाएगा वंदे मातरम, सभी 6 पैरा अनिवार्य
अंतराष्ट्रीय न्यूज
केंद्र सरकार ने नए दिशानिर्देश जारी किए; सिनेमाघरों में नियम लागू नहीं, राष्ट्रगीत के बाद ही पढ़ाई शुरू
केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और औपचारिक आयोजनों में ‘जन गण मन’ से पहले वंदे मातरम बजाना अनिवार्य होगा। इस दौरान सभी उपस्थित व्यक्तियों को सावधान मुद्रा में खड़ा होना होगा। आदेश 28 जनवरी को जारी किया गया था, जिसकी जानकारी मीडिया में 11 फरवरी को आई।
नए दिशानिर्देशों के अनुसार, स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत बजाने के बाद होगी और सभी छह अंतरे अनिवार्य रूप से गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकेंड है। इससे पहले अधिकांश स्कूलों में केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तिरंगा फहराने, राष्ट्रपति और राज्यपाल के आगमन, भाषणों के पहले और बाद, तथा सिविलियन पुरस्कार समारोहों जैसे कार्यक्रमों में वंदे मातरम बजाना जरूरी होगा। मंत्रियों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की उपस्थिति वाले गैर-औपचारिक कार्यक्रमों में भी इसे सम्मानपूर्वक गाया जा सकता है।
हालांकि, सिनेमाघरों को नए नियम से बाहर रखा गया है। यानी फिल्म शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना या खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। इसी तरह डॉक्यूमेंट्री या न्यूजरील में बजने पर दर्शकों के लिए खड़े होने की आवश्यकता नहीं है।
सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो ‘वंदे मातरम’ बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था और 1882 में उनके उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ। यह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मंच पर गाया।
इस वर्ष 26 जनवरी को 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य परेड की थीम भी वंदे मातरम रखी गई थी। परेड में संस्कृति मंत्रालय ने इसे 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में झांकी के रूप में प्रस्तुत किया, जिसे बेस्ट झांकी का अवॉर्ड भी मिला। झांकी में गीत की रचना, औपनिवेशिक काल की रिकॉर्डिंग और Gen Z का प्रतिनिधित्व शामिल था।
पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र में वंदे मातरम को लेकर बहस हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि कांग्रेस ने राष्ट्रगीत के कुछ अंतरे मुस्लिम समुदाय को ध्यान में रखते हुए हटाए थे। भाजपा ने इसे राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगीत के समान दर्जा देने की वकालत की थी।
नए आदेश के बाद अब ‘वंदे मातरम’ स्कूलों, सरकारी कार्यक्रमों और राष्ट्र संबंधी आयोजनों में पूर्ण सम्मान और सामूहिक गायन के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। यह कदम राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाने और विद्यार्थियों तथा नागरिकों में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और औपचारिक आयोजनों में ‘जन गण मन’ से पहले वंदे मातरम बजाना अनिवार्य होगा। इस दौरान सभी उपस्थित व्यक्तियों को सावधान मुद्रा में खड़ा होना होगा। आदेश 28 जनवरी को जारी किया गया था, जिसकी जानकारी मीडिया में 11 फरवरी को आई।
नए दिशानिर्देशों के अनुसार, स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत बजाने के बाद होगी और सभी छह अंतरे अनिवार्य रूप से गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकेंड है। इससे पहले अधिकांश स्कूलों में केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तिरंगा फहराने, राष्ट्रपति और राज्यपाल के आगमन, भाषणों के पहले और बाद, तथा सिविलियन पुरस्कार समारोहों जैसे कार्यक्रमों में वंदे मातरम बजाना जरूरी होगा। मंत्रियों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की उपस्थिति वाले गैर-औपचारिक कार्यक्रमों में भी इसे सम्मानपूर्वक गाया जा सकता है।
हालांकि, सिनेमाघरों को नए नियम से बाहर रखा गया है। यानी फिल्म शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना या खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। इसी तरह डॉक्यूमेंट्री या न्यूजरील में बजने पर दर्शकों के लिए खड़े होने की आवश्यकता नहीं है।
सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो ‘वंदे मातरम’ बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था और 1882 में उनके उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ। यह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मंच पर गाया।
इस वर्ष 26 जनवरी को 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य परेड की थीम भी वंदे मातरम रखी गई थी। परेड में संस्कृति मंत्रालय ने इसे 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में झांकी के रूप में प्रस्तुत किया, जिसे बेस्ट झांकी का अवॉर्ड भी मिला। झांकी में गीत की रचना, औपनिवेशिक काल की रिकॉर्डिंग और Gen Z का प्रतिनिधित्व शामिल था।
पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र में वंदे मातरम को लेकर बहस हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि कांग्रेस ने राष्ट्रगीत के कुछ अंतरे मुस्लिम समुदाय को ध्यान में रखते हुए हटाए थे। भाजपा ने इसे राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगीत के समान दर्जा देने की वकालत की थी।
नए आदेश के बाद अब ‘वंदे मातरम’ स्कूलों, सरकारी कार्यक्रमों और राष्ट्र संबंधी आयोजनों में पूर्ण सम्मान और सामूहिक गायन के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। यह कदम राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाने और विद्यार्थियों तथा नागरिकों में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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