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पश्चिमी चंपारण में श्री हनुमच्छिव दुर्गा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न, आस्था और सेवा का अद्भुत संगम
डिजिटल डेस्क
ग्राम तरकुलवा में चार दिवसीय धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल; वैदिक विधि से देव विग्रहों की प्रतिष्ठा
बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा प्रखंड अंतर्गत ग्राम तरकुलवा (पोस्ट बेलवा मोड़) में आयोजित “श्री हनुमच्छिव दुर्गा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव” 4 फरवरी से 7 फरवरी 2026 तक श्रद्धा और अनुशासन के साथ सम्पन्न हुआ। श्री सीताराम हनुमत् सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में हुए इस चार दिवसीय आयोजन में हनुमान, दुर्गा और शिवलिंग की नूतन मूर्तियों की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की गई।
महोत्सव का उद्देश्य मंदिर स्थापना के साथ क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना रहा। आयोजन समिति के अनुसार मंदिर निर्माण एक पारिवारिक संकल्प की पूर्ति के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसने स्थानीय समाज को भावनात्मक रूप से जोड़ने का कार्य किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ 4 फरवरी को जलयात्रा, मंडप प्रवेश, पंचांग पूजन और कथा प्रवचन से हुआ। दूसरे दिन वेदी पूजन, अधिवास और नगर भ्रमण के धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न किए गए। 6 फरवरी को मुख्य प्राण प्रतिष्ठा, हवन और महाआरती आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। 7 फरवरी को यज्ञ पूर्णाहुति, प्रसाद वितरण, साधु भंडारा और मंदिर ध्वज पूजन के साथ महोत्सव का समापन हुआ।
चार दिनों तक क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का वातावरण बना रहा। आसपास के गांवों से आए श्रद्धालुओं ने तन, मन और धन से सहयोग दिया। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित किया। स्थानीय लोगों ने इसे सामाजिक सहभागिता और धार्मिक समर्पण का उदाहरण बताया।
आयोजन के दौरान सेवा कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। जरूरतमंद बुजुर्गों, दिव्यांग व्यक्तियों और महिलाओं को वस्त्र वितरण किया गया। श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन भंडारे की व्यवस्था रही, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। सामाजिक सेवा के इन प्रयासों को ग्रामीण समाज में सकारात्मक पहल के रूप में देखा गया।
आयोजन से जुड़े कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के समर्पित प्रयासों की सराहना की गई। समिति ने कहा कि मंदिर भविष्य में धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी केंद्र बनेगा। स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि यह स्थल आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
समापन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने महोत्सव को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणादायी बताया। आयोजन समिति ने सभी ग्रामवासियों, सहयोगकर्ताओं और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे सामूहिक श्रद्धा, सेवा और एकता का प्रतीक बताया।
इस प्रकार, ग्राम तरकुलवा में सम्पन्न यह महोत्सव न केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित रहा, बल्कि सामाजिक सहयोग और सांस्कृतिक जागरण का संदेश भी देकर गया।
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