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पूर्वोत्तर उग्रवाद खत्म करने पर केंद्र का फोकस, 2029 तक लक्ष्य तय
नेशनल न्यूज
केंद्र सरकार की प्राथमिकता मणिपुर सहित पूर्वोत्तर से उग्रवाद खत्म करना, 2029 तक बड़ा रोडमैप तैयार
केंद्र सरकार अब पूर्वोत्तर उग्रवाद को समाप्त करने के लिए व्यापक सुरक्षा रणनीति पर काम कर रही है। नक्सलवाद (LWE) पर बड़ी सफलता के बाद सुरक्षा एजेंसियों का फोकस पूर्वोत्तर राज्यों की ओर स्थानांतरित किया गया है।
बताया जा रहा है सरकार का लक्ष्य 2029 तक मणिपुर, असम, नागालैंड, मेघालय और त्रिपुरा जैसे राज्यों में सक्रिय उग्रवादी गतिविधियों को खत्म करना है। इसके लिए विशेष सुरक्षा इकाइयों की तैनाती और तकनीकी संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।
कोबरा यूनिट्स की तैनाती
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए CRPF की विशेष इकाई CoBRA (Commando Battalion for Resolute Action) को पूर्वोत्तर में तैनात किया जा रहा है। यह यूनिट पहले वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में सक्रिय थी, जहां हालात में सुधार के बाद अब इसका उपयोग पूर्वोत्तर में किया जा रहा है।कहा जा रहा है कि सुरक्षा बलों की वापसी LWE क्षेत्रों से पूरी तरह नहीं होगी, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से पुनर्संरचित किया जा रहा है।
पूर्वोत्तर उग्रवाद में सबसे संवेदनशील स्थिति मणिपुर की मानी जा रही है। राज्य में सक्रिय कई समूह और हालिया जातीय तनाव ने सुरक्षा चुनौतियां बढ़ाई हैं।सूत्रों के मुताबिक पूर्वोत्तर में दर्ज कुल उग्रवादी घटनाओं का बड़ा हिस्सा अकेले मणिपुर से जुड़ा है। इसी वजह से नई रणनीति की शुरुआत भी यहीं से की जा रही है।
सुरक्षा उपकरण और वाहन
सुरक्षा एजेंसियों को नई माइन-प्रोटेक्टेड और बुलेटप्रूफ वाहनों की खेप भी मिली है। इनका उपयोग संवेदनशील क्षेत्रों में किया जा रहा है ताकि अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सके।कुछ हल्के बुलेटप्रूफ वाहन पहले ही मणिपुर के उखरुल जिले में तैनात किए जा चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार ये कदम जमीन पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
उग्रवाद में गिरावट के संकेत
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में उग्रवाद से जुड़ी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। 2014 की तुलना में 2024 तक घटनाओं, नागरिक मौतों और गिरफ्तारी के आंकड़ों में सुधार देखा गया है।हालांकि, मणिपुर में जारी जातीय तनाव के कारण कुछ घटनाएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं, जिन पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सरकार का मानना है कि पूर्वोत्तर उग्रवाद को समाप्त करने के लिए सुरक्षा, विकास और निगरानी तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा।
सूत्रों के मुताबिक 2029 की समयसीमा को लेकर कई स्तरों पर समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और रणनीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
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पूर्वोत्तर उग्रवाद खत्म करने पर केंद्र का फोकस, 2029 तक लक्ष्य तय
नेशनल न्यूज
केंद्र सरकार अब पूर्वोत्तर उग्रवाद को समाप्त करने के लिए व्यापक सुरक्षा रणनीति पर काम कर रही है। नक्सलवाद (LWE) पर बड़ी सफलता के बाद सुरक्षा एजेंसियों का फोकस पूर्वोत्तर राज्यों की ओर स्थानांतरित किया गया है।
बताया जा रहा है सरकार का लक्ष्य 2029 तक मणिपुर, असम, नागालैंड, मेघालय और त्रिपुरा जैसे राज्यों में सक्रिय उग्रवादी गतिविधियों को खत्म करना है। इसके लिए विशेष सुरक्षा इकाइयों की तैनाती और तकनीकी संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।
कोबरा यूनिट्स की तैनाती
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए CRPF की विशेष इकाई CoBRA (Commando Battalion for Resolute Action) को पूर्वोत्तर में तैनात किया जा रहा है। यह यूनिट पहले वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में सक्रिय थी, जहां हालात में सुधार के बाद अब इसका उपयोग पूर्वोत्तर में किया जा रहा है।कहा जा रहा है कि सुरक्षा बलों की वापसी LWE क्षेत्रों से पूरी तरह नहीं होगी, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से पुनर्संरचित किया जा रहा है।
पूर्वोत्तर उग्रवाद में सबसे संवेदनशील स्थिति मणिपुर की मानी जा रही है। राज्य में सक्रिय कई समूह और हालिया जातीय तनाव ने सुरक्षा चुनौतियां बढ़ाई हैं।सूत्रों के मुताबिक पूर्वोत्तर में दर्ज कुल उग्रवादी घटनाओं का बड़ा हिस्सा अकेले मणिपुर से जुड़ा है। इसी वजह से नई रणनीति की शुरुआत भी यहीं से की जा रही है।
सुरक्षा उपकरण और वाहन
सुरक्षा एजेंसियों को नई माइन-प्रोटेक्टेड और बुलेटप्रूफ वाहनों की खेप भी मिली है। इनका उपयोग संवेदनशील क्षेत्रों में किया जा रहा है ताकि अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सके।कुछ हल्के बुलेटप्रूफ वाहन पहले ही मणिपुर के उखरुल जिले में तैनात किए जा चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार ये कदम जमीन पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
उग्रवाद में गिरावट के संकेत
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में उग्रवाद से जुड़ी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। 2014 की तुलना में 2024 तक घटनाओं, नागरिक मौतों और गिरफ्तारी के आंकड़ों में सुधार देखा गया है।हालांकि, मणिपुर में जारी जातीय तनाव के कारण कुछ घटनाएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं, जिन पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सरकार का मानना है कि पूर्वोत्तर उग्रवाद को समाप्त करने के लिए सुरक्षा, विकास और निगरानी तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा।
सूत्रों के मुताबिक 2029 की समयसीमा को लेकर कई स्तरों पर समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और रणनीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
