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इंदौर में शिवाजी मार्केट विस्थापन पर हाईकोर्ट की रोक, विशेष सुनवाई में नगर निगम की कार्रवाई पर स्टे
इंदौर (म.प्र.)
विशेष सुनवाई में कोर्ट सख्त, बिना सहमति दुकानदारों को हटाने के प्रयास पर रोक; अगली सुनवाई तक स्थिति जस की तस
इंदौर के शिवाजी मार्केट में प्रस्तावित विस्थापन को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम की कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अवकाश के दिन हुई विशेष सुनवाई में न्यायालय ने यह अंतरिम आदेश जारी करते हुए अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए। इस फैसले से मार्केट के दुकानदारों को बड़ी राहत मिली है।
मामला नगर निगम मुख्यालय के सामने स्थित शिवाजी मार्केट से जुड़ा है, जहां लंबे समय से पुनर्विकास और विस्थापन को लेकर विवाद चल रहा था। दुकानदारों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने यह स्पष्ट किया कि बिना सहमति और तय प्रक्रिया के किसी भी प्रकार की कार्रवाई उचित नहीं है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि इस बाजार से करीब 5,000 लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है और अचानक की गई कार्रवाई से उनकी आजीविका पर संकट पैदा हो गया है। उनका आरोप था कि नगर निगम ने पूर्व में दिए गए न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी करते हुए बिना पर्याप्त समय और विकल्प दिए विस्थापन की प्रक्रिया शुरू कर दी।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जनवरी में दिए गए आदेश में स्पष्ट किया गया था कि दुकानदारों की सहमति के बिना उन्हें नहीं हटाया जाएगा। साथ ही, यदि विस्थापन आवश्यक हो तो प्रशासन को विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसके बावजूद हालिया कार्रवाई को अदालत ने प्रथम दृष्टया नियमों के विपरीत माना।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि दुकानदारों को अपील या वैकल्पिक व्यवस्था के लिए पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। इसी आधार पर अवकाश के दिन विशेष याचिका दायर की गई, जिस पर तत्काल सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हस्तक्षेप किया।
फैसले के बाद दुकानदारों में राहत का माहौल है। मार्केट एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि वे लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रहे थे और न्यायालय के हस्तक्षेप से उन्हें अस्थायी राहत मिली है। उनका कहना है कि वे पुनर्विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन प्रक्रिया पारदर्शी और सहमति आधारित होनी चाहिए।
वहीं, नगर निगम की ओर से अब अगली सुनवाई में अपना पक्ष रखने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन का तर्क है कि शहर के विकास और यातायात प्रबंधन के लिए इस क्षेत्र का पुनर्विकास आवश्यक है।फिलहाल, अगली सुनवाई तक स्थिति यथावत बनी रहेगी। आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा और प्रशासनिक निर्णय पर सभी की नजर बनी हुई है।
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इंदौर में शिवाजी मार्केट विस्थापन पर हाईकोर्ट की रोक, विशेष सुनवाई में नगर निगम की कार्रवाई पर स्टे
इंदौर (म.प्र.)
इंदौर के शिवाजी मार्केट में प्रस्तावित विस्थापन को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम की कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अवकाश के दिन हुई विशेष सुनवाई में न्यायालय ने यह अंतरिम आदेश जारी करते हुए अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए। इस फैसले से मार्केट के दुकानदारों को बड़ी राहत मिली है।
मामला नगर निगम मुख्यालय के सामने स्थित शिवाजी मार्केट से जुड़ा है, जहां लंबे समय से पुनर्विकास और विस्थापन को लेकर विवाद चल रहा था। दुकानदारों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने यह स्पष्ट किया कि बिना सहमति और तय प्रक्रिया के किसी भी प्रकार की कार्रवाई उचित नहीं है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि इस बाजार से करीब 5,000 लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है और अचानक की गई कार्रवाई से उनकी आजीविका पर संकट पैदा हो गया है। उनका आरोप था कि नगर निगम ने पूर्व में दिए गए न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी करते हुए बिना पर्याप्त समय और विकल्प दिए विस्थापन की प्रक्रिया शुरू कर दी।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जनवरी में दिए गए आदेश में स्पष्ट किया गया था कि दुकानदारों की सहमति के बिना उन्हें नहीं हटाया जाएगा। साथ ही, यदि विस्थापन आवश्यक हो तो प्रशासन को विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसके बावजूद हालिया कार्रवाई को अदालत ने प्रथम दृष्टया नियमों के विपरीत माना।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि दुकानदारों को अपील या वैकल्पिक व्यवस्था के लिए पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। इसी आधार पर अवकाश के दिन विशेष याचिका दायर की गई, जिस पर तत्काल सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हस्तक्षेप किया।
फैसले के बाद दुकानदारों में राहत का माहौल है। मार्केट एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि वे लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रहे थे और न्यायालय के हस्तक्षेप से उन्हें अस्थायी राहत मिली है। उनका कहना है कि वे पुनर्विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन प्रक्रिया पारदर्शी और सहमति आधारित होनी चाहिए।
वहीं, नगर निगम की ओर से अब अगली सुनवाई में अपना पक्ष रखने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन का तर्क है कि शहर के विकास और यातायात प्रबंधन के लिए इस क्षेत्र का पुनर्विकास आवश्यक है।फिलहाल, अगली सुनवाई तक स्थिति यथावत बनी रहेगी। आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा और प्रशासनिक निर्णय पर सभी की नजर बनी हुई है।
