- Hindi News
- देश विदेश
- उद्धव की शिवसेना में फिर टूट की चर्चा, 7 सांसदों पर दावा
उद्धव की शिवसेना में फिर टूट की चर्चा, 7 सांसदों पर दावा
Digital Desk
शिंदे गुट के एमएलसी कृपाल तुमाने ने कहा- सात सांसद संपर्क में हैं, उद्धव ठाकरे बोले- जो जाना चाहता है उसे नहीं रोकेंगे
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के विधान परिषद सदस्य कृपाल तुमाने के एक दावे ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। तुमाने ने कहा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के सात सांसद उनके संपर्क में हैं और मानसून सत्र से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। इस दावे के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में फिर से संभावित दल-बदल और शक्ति संतुलन को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। कृपाल तुमाने ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि पिछले करीब एक महीने से 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत बातचीत चल रही है और अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उनके अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में वे बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि उन्होंने सांसदों के नाम सार्वजनिक नहीं किए। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या महाराष्ट्र में एक बार फिर शिवसेना के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
इन अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने भी अपने सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई नेता या सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे रोका नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी में रहने या जाने का फैसला हर व्यक्ति का अपना है और जो जाना चाहता है, वह खुशी-खुशी जा सकता है। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने वर्ष 2022 में हुई शिवसेना की बड़ी टूट का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय भी उन्हें हालात की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने किसी पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं की थी। उद्धव ठाकरे का यह बयान एक तरह से पार्टी नेताओं को खुली छूट देने जैसा संदेश भी माना जा रहा है। हालांकि पार्टी के भीतर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और किसी भी प्रकार की टूट की संभावना नहीं है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता लगातार शिंदे गुट के दावों को राजनीतिक प्रचार बता रहे हैं।
इसी बीच यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से सांसद संजय देशमुख की केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात ने भी चर्चाओं को हवा दे दी। यह मुलाकात दिल्ली में हुई और इसके बाद राजनीतिक अटकलें और तेज हो गईं। संजय देशमुख उस बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाए थे, जिसे उद्धव ठाकरे ने सांसदों के साथ आयोजित किया था। हालांकि उनके करीबी सूत्रों ने पारिवारिक कारणों को इसकी वजह बताया। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को अलग नजरिए से देखा जाने लगा। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। राउत ने कहा कि चार दिन पहले हुई बैठक में सभी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व पर भरोसा जताया था। उनके मुताबिक कुछ नेताओं ने तो सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में उद्धव ठाकरे का साथ नहीं छोड़ेंगे। राउत ने यह भी कहा कि शिंदे गुट के दावे केवल भ्रम फैलाने की कोशिश हैं।
हाल ही में हुई बैठक में सभी सांसद मौजूद नहीं थे। कुछ सांसदों ने ऑनलाइन हिस्सा लिया जबकि कुछ अनुपस्थित रहे। इसी वजह से राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला। हालांकि अनुपस्थित रहने के पीछे अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं और पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य स्थिति बता रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना का विभाजन कोई नया विषय नहीं है। जून 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को उस समय बड़ा झटका लगा था जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग हो गए थे। उस समय शिवसेना के 55 में से 40 विधायक शिंदे के साथ चले गए थे। इसके बाद राज्य की राजनीति में तेजी से घटनाक्रम बदले और अंततः उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। बाद में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद दोनों गुटों के बीच असली शिवसेना को लेकर कानूनी और राजनीतिक संघर्ष शुरू हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और फिर विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर भी सुनवाई हुई। अंततः विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे गुट को बहुमत वाला गुट मानते हुए राहत दी। इसी दौरान चुनाव आयोग ने भी शिवसेना का पारंपरिक चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को आवंटित कर दिया। अब चार साल बाद फिर से टूट और दल-बदल की चर्चा ने महाराष्ट्र की राजनीति को गर्मा दिया है। अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
उद्धव की शिवसेना में फिर टूट की चर्चा, 7 सांसदों पर दावा
Digital Desk
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के विधान परिषद सदस्य कृपाल तुमाने के एक दावे ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। तुमाने ने कहा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के सात सांसद उनके संपर्क में हैं और मानसून सत्र से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। इस दावे के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में फिर से संभावित दल-बदल और शक्ति संतुलन को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। कृपाल तुमाने ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि पिछले करीब एक महीने से 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत बातचीत चल रही है और अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उनके अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में वे बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि उन्होंने सांसदों के नाम सार्वजनिक नहीं किए। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या महाराष्ट्र में एक बार फिर शिवसेना के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
इन अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने भी अपने सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई नेता या सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे रोका नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी में रहने या जाने का फैसला हर व्यक्ति का अपना है और जो जाना चाहता है, वह खुशी-खुशी जा सकता है। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने वर्ष 2022 में हुई शिवसेना की बड़ी टूट का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय भी उन्हें हालात की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने किसी पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं की थी। उद्धव ठाकरे का यह बयान एक तरह से पार्टी नेताओं को खुली छूट देने जैसा संदेश भी माना जा रहा है। हालांकि पार्टी के भीतर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और किसी भी प्रकार की टूट की संभावना नहीं है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता लगातार शिंदे गुट के दावों को राजनीतिक प्रचार बता रहे हैं।
इसी बीच यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से सांसद संजय देशमुख की केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात ने भी चर्चाओं को हवा दे दी। यह मुलाकात दिल्ली में हुई और इसके बाद राजनीतिक अटकलें और तेज हो गईं। संजय देशमुख उस बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाए थे, जिसे उद्धव ठाकरे ने सांसदों के साथ आयोजित किया था। हालांकि उनके करीबी सूत्रों ने पारिवारिक कारणों को इसकी वजह बताया। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को अलग नजरिए से देखा जाने लगा। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। राउत ने कहा कि चार दिन पहले हुई बैठक में सभी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व पर भरोसा जताया था। उनके मुताबिक कुछ नेताओं ने तो सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में उद्धव ठाकरे का साथ नहीं छोड़ेंगे। राउत ने यह भी कहा कि शिंदे गुट के दावे केवल भ्रम फैलाने की कोशिश हैं।
हाल ही में हुई बैठक में सभी सांसद मौजूद नहीं थे। कुछ सांसदों ने ऑनलाइन हिस्सा लिया जबकि कुछ अनुपस्थित रहे। इसी वजह से राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला। हालांकि अनुपस्थित रहने के पीछे अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं और पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य स्थिति बता रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना का विभाजन कोई नया विषय नहीं है। जून 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को उस समय बड़ा झटका लगा था जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग हो गए थे। उस समय शिवसेना के 55 में से 40 विधायक शिंदे के साथ चले गए थे। इसके बाद राज्य की राजनीति में तेजी से घटनाक्रम बदले और अंततः उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। बाद में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद दोनों गुटों के बीच असली शिवसेना को लेकर कानूनी और राजनीतिक संघर्ष शुरू हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और फिर विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर भी सुनवाई हुई। अंततः विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे गुट को बहुमत वाला गुट मानते हुए राहत दी। इसी दौरान चुनाव आयोग ने भी शिवसेना का पारंपरिक चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को आवंटित कर दिया। अब चार साल बाद फिर से टूट और दल-बदल की चर्चा ने महाराष्ट्र की राजनीति को गर्मा दिया है। अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है।
