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धमतरी में ठेकेदार दीपेश गांधी के घर ED की दबिश, भारतमाला घोटाले से जुड़ रहे तार
धमतरी,(छ.ग.)
चार घंटे से ज्यादा समय तक चली जांच, परिजनों के मोबाइल जब्त; दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल में जुटी प्रवर्तन निदेशालय की टीम
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने इलाके में हलचल बढ़ा दी। ईडी की टीम ने स्थानीय ठेकेदार दीपेश गांधी के आमापारा स्थित आवास पर दबिश देकर जांच शुरू की। सुबह से शुरू हुई यह कार्रवाई कई घंटों तक जारी रही। अधिकारियों के साथ सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण पूरे इलाके में लोगों की भीड़ जुटी रही और दिनभर इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई भारतमाला परियोजना में सामने आए कथित जमीन अधिग्रहण घोटाले या उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन के मामलों से संबंधित हो सकती है। हालांकि ईडी की ओर से आधिकारिक रूप से किसी मामले की पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि ईडी के अधिकारी दो वाहनों में धमतरी पहुंचे थे। टीम के साथ सुरक्षा बलों के जवान भी मौजूद थे। अधिकारियों ने पहुंचते ही घर के भीतर जांच शुरू कर दी। सूत्रों के अनुसार छह से अधिक अधिकारी दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय कागजातों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कार्रवाई के दौरान घर में मौजूद परिजनों के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में लिए गए हैं ताकि जांच प्रभावित न हो और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सके। अधिकारियों ने कई दस्तावेजों की छानबीन की और कुछ महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी अपने साथ ले जाने की जानकारी सामने आ रही है।
दीपेश गांधी पेशे से ठेकेदार हैं और सरकारी व निजी परियोजनाओं में काम करने वाले बड़े ठेकेदारों के साथ जुड़े रहे हैं। धमतरी और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न निर्माण कार्यों में उनकी भागीदारी बताई जाती है। ऐसे में ईडी की इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। इस कार्रवाई ने एक बार फिर भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित घोटाले की चर्चा को तेज कर दिया है। इससे पहले भी ईडी ने इसी मामले में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। कुरूद क्षेत्र में पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर भी जांच एजेंसी पहुंची थी। इसके अलावा राइस मिलर रौशन चंद्राकर के यहां भी ईडी ने कार्रवाई की थी। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों को जांच एजेंसियों द्वारा घोटाले की परतें खोलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। जांच में दावा किया गया कि जमीन के मूल रिकॉर्ड में बदलाव कर और उसे छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ाया गया। अधिकारियों के अनुसार कुछ स्थानों पर जमीन को दर्जनों हिस्सों में बांटकर नए नाम जोड़े गए और फिर उन्हीं नामों के आधार पर अधिक मुआवजे का दावा पेश किया गया। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई।
राजस्व विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि जिस जमीन का मुआवजा लगभग 29.5 करोड़ रुपये होना चाहिए था, उसे बढ़ाकर 70 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचाने की कोशिश की गई। आरोप है कि कुछ राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों और भू-माफिया के गठजोड़ ने बैकडेट में दस्तावेज तैयार कर पूरे खेल को अंजाम दिया। अभनपुर क्षेत्र के नायकबांधा और उरला गांवों में जमीन के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाने की बात सामने आई थी। जांच रिपोर्ट में लगभग 80 नए नाम जोड़े जाने और कई खसरों को छोटे हिस्सों में बांटने का उल्लेख किया गया था। इस मामले में पहले भी कई प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। कोरबा के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को निलंबित किया गया था। इससे पहले जगदलपुर नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त निर्भय कुमार साहू के खिलाफ भी कार्रवाई हुई थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में कई स्तरों पर गड़बड़ियां हुईं, जिसकी वजह से करोड़ों रुपये के भुगतान पर सवाल खड़े हुए। भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार की सबसे महत्वपूर्ण सड़क अवसंरचना योजनाओं में से एक मानी जाती है। इस परियोजना का उद्देश्य देशभर में आर्थिक कॉरिडोर विकसित कर माल परिवहन को तेज और सुगम बनाना है। रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर भी इसी परियोजना का हिस्सा है। ऐसे में इस परियोजना से जुड़े किसी भी कथित घोटाले को गंभीरता से देखा जा रहा है।
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धमतरी में ठेकेदार दीपेश गांधी के घर ED की दबिश, भारतमाला घोटाले से जुड़ रहे तार
धमतरी,(छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने इलाके में हलचल बढ़ा दी। ईडी की टीम ने स्थानीय ठेकेदार दीपेश गांधी के आमापारा स्थित आवास पर दबिश देकर जांच शुरू की। सुबह से शुरू हुई यह कार्रवाई कई घंटों तक जारी रही। अधिकारियों के साथ सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण पूरे इलाके में लोगों की भीड़ जुटी रही और दिनभर इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई भारतमाला परियोजना में सामने आए कथित जमीन अधिग्रहण घोटाले या उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन के मामलों से संबंधित हो सकती है। हालांकि ईडी की ओर से आधिकारिक रूप से किसी मामले की पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि ईडी के अधिकारी दो वाहनों में धमतरी पहुंचे थे। टीम के साथ सुरक्षा बलों के जवान भी मौजूद थे। अधिकारियों ने पहुंचते ही घर के भीतर जांच शुरू कर दी। सूत्रों के अनुसार छह से अधिक अधिकारी दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय कागजातों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कार्रवाई के दौरान घर में मौजूद परिजनों के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में लिए गए हैं ताकि जांच प्रभावित न हो और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सके। अधिकारियों ने कई दस्तावेजों की छानबीन की और कुछ महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी अपने साथ ले जाने की जानकारी सामने आ रही है।
दीपेश गांधी पेशे से ठेकेदार हैं और सरकारी व निजी परियोजनाओं में काम करने वाले बड़े ठेकेदारों के साथ जुड़े रहे हैं। धमतरी और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न निर्माण कार्यों में उनकी भागीदारी बताई जाती है। ऐसे में ईडी की इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। इस कार्रवाई ने एक बार फिर भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित घोटाले की चर्चा को तेज कर दिया है। इससे पहले भी ईडी ने इसी मामले में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। कुरूद क्षेत्र में पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर भी जांच एजेंसी पहुंची थी। इसके अलावा राइस मिलर रौशन चंद्राकर के यहां भी ईडी ने कार्रवाई की थी। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों को जांच एजेंसियों द्वारा घोटाले की परतें खोलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। जांच में दावा किया गया कि जमीन के मूल रिकॉर्ड में बदलाव कर और उसे छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ाया गया। अधिकारियों के अनुसार कुछ स्थानों पर जमीन को दर्जनों हिस्सों में बांटकर नए नाम जोड़े गए और फिर उन्हीं नामों के आधार पर अधिक मुआवजे का दावा पेश किया गया। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई।
राजस्व विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि जिस जमीन का मुआवजा लगभग 29.5 करोड़ रुपये होना चाहिए था, उसे बढ़ाकर 70 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचाने की कोशिश की गई। आरोप है कि कुछ राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों और भू-माफिया के गठजोड़ ने बैकडेट में दस्तावेज तैयार कर पूरे खेल को अंजाम दिया। अभनपुर क्षेत्र के नायकबांधा और उरला गांवों में जमीन के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाने की बात सामने आई थी। जांच रिपोर्ट में लगभग 80 नए नाम जोड़े जाने और कई खसरों को छोटे हिस्सों में बांटने का उल्लेख किया गया था। इस मामले में पहले भी कई प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। कोरबा के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को निलंबित किया गया था। इससे पहले जगदलपुर नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त निर्भय कुमार साहू के खिलाफ भी कार्रवाई हुई थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में कई स्तरों पर गड़बड़ियां हुईं, जिसकी वजह से करोड़ों रुपये के भुगतान पर सवाल खड़े हुए। भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार की सबसे महत्वपूर्ण सड़क अवसंरचना योजनाओं में से एक मानी जाती है। इस परियोजना का उद्देश्य देशभर में आर्थिक कॉरिडोर विकसित कर माल परिवहन को तेज और सुगम बनाना है। रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर भी इसी परियोजना का हिस्सा है। ऐसे में इस परियोजना से जुड़े किसी भी कथित घोटाले को गंभीरता से देखा जा रहा है।
