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बसपा में बड़ा एक्शन: मायावती ने आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाला
Digital Desk
बार-बार चेतावनी के बावजूद नहीं सुधरे अशोक सिद्धार्थ, मायावती ने कहा- अब कभी नहीं होगी वापसी; रणधीर सिंह बेनीवाल भी निष्कासित, संगठन में अनुशासन पर सख्ती
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संगठन में अनुशासन को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय समन्वयक रणधीर सिंह बेनीवाल को भी संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद अशोक सिद्धार्थ के व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया, इसलिए अब उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा। इस फैसले को बसपा के भीतर अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि अशोक सिद्धार्थ को पहले भी कई बार संगठनात्मक मर्यादाओं का पालन करने की सलाह दी गई थी। उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं, लेकिन लगातार अनुशासनहीनता और संगठन को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के चलते उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करना जरूरी हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदारियां वापस लेने के बाद भी अशोक सिद्धार्थ ने उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी मिलने जैसी भ्रामक खबरें फैलाकर कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा करने की कोशिश की।
गौरतलब है कि अशोक सिद्धार्थ के पास तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दिल्ली जैसे राज्यों का संगठनात्मक प्रभार था। शनिवार को मायावती ने उनसे ये सभी जिम्मेदारियां वापस ले ली थीं। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई थी कि उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि अगले ही दिन मायावती ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए उन्हें स्थायी रूप से पार्टी से बाहर कर दिया।
यह पहली बार नहीं है जब अशोक सिद्धार्थ पर कार्रवाई हुई हो। इससे पहले फरवरी 2025 में भी उन्हें गुटबाजी और अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित किया गया था। हालांकि लगभग छह महीने बाद सितंबर 2025 में उन्हें फिर से पार्टी में शामिल कर लिया गया था। इसके बाद फरवरी 2026 में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अहम जिम्मेदारी भी दी गई थी, लेकिन एक बार फिर संगठनात्मक विवादों के चलते उन्हें पार्टी से बाहर होना पड़ा।
मायावती ने इसी कार्रवाई के तहत राष्ट्रीय समन्वयक रणधीर सिंह बेनीवाल को भी निष्कासित कर दिया। बेनीवाल के पास पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों की जिम्मेदारी थी। इससे पहले भी उनके प्रभार में बदलाव किए गए थे, लेकिन अब उन्हें संगठन से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि अनुशासन और संगठन हित सर्वोपरि हैं तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
दो वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन के साथ ही मायावती ने संगठन में नए फेरबदल की भी घोषणा की। राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को एक बार फिर पंजाब का प्रभारी बनाया गया है और आगामी विधानसभा व लोकसभा चुनाव तक वे इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे। वहीं मध्य प्रदेश के प्रभारी राजाराम को दिल्ली, गुजरात, केरल और कर्नाटक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा अशोक सिद्धार्थ के करीबी माने जाने वाले नितिन सिंह से भी केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है।
मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाहों या साजिशों से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संगठन को कमजोर करने और बसपा की पूर्ण बहुमत सरकार बनाने के अभियान को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे तत्वों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।
हाल ही में मायावती ने यह भी स्पष्ट किया था कि पार्टी में उम्मीदवार तय करने का अधिकार केवल उनके पास है। उन्होंने कहा था कि आकाश आनंद या अन्य नेता केवल उनके निर्देश पर ही उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करेंगे। उन्होंने यह भी साफ किया था कि यदि आकाश आनंद उत्तर प्रदेश में कोई कार्यक्रम करेंगे तो उसके लिए पहले उनकी अनुमति आवश्यक होगी। इससे साफ संकेत मिला था कि पार्टी के सभी बड़े फैसलों पर अंतिम अधिकार मायावती के पास ही रहेगा।
अशोक सिद्धार्थ का राजनीतिक सफर भी काफी चर्चित रहा है। पेशे से नेत्र रोग विशेषज्ञ रहे सिद्धार्थ ने सरकारी नौकरी छोड़कर वर्ष 2007 में बसपा का दामन थामा था। वे दो बार विधान परिषद सदस्य रहे और बाद में राज्यसभा सांसद भी बने। संगठन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और दक्षिण भारत समेत कई राज्यों में पार्टी विस्तार का काम देखा। उनकी पत्नी सुनीता सिद्धार्थ भी उत्तर प्रदेश महिला आयोग में महत्वपूर्ण पद पर रह चुकी हैं। वहीं उनकी बेटी प्रज्ञा सिद्धार्थ का विवाह 2023 में मायावती के भतीजे आकाश आनंद से हुआ था, जिससे उनका परिवार सीधे मायावती के परिवार से जुड़ गया।
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बसपा में बड़ा एक्शन: मायावती ने आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाला
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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संगठन में अनुशासन को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय समन्वयक रणधीर सिंह बेनीवाल को भी संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद अशोक सिद्धार्थ के व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया, इसलिए अब उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा। इस फैसले को बसपा के भीतर अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि अशोक सिद्धार्थ को पहले भी कई बार संगठनात्मक मर्यादाओं का पालन करने की सलाह दी गई थी। उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं, लेकिन लगातार अनुशासनहीनता और संगठन को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के चलते उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करना जरूरी हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदारियां वापस लेने के बाद भी अशोक सिद्धार्थ ने उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी मिलने जैसी भ्रामक खबरें फैलाकर कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा करने की कोशिश की।
गौरतलब है कि अशोक सिद्धार्थ के पास तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दिल्ली जैसे राज्यों का संगठनात्मक प्रभार था। शनिवार को मायावती ने उनसे ये सभी जिम्मेदारियां वापस ले ली थीं। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई थी कि उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि अगले ही दिन मायावती ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए उन्हें स्थायी रूप से पार्टी से बाहर कर दिया।
यह पहली बार नहीं है जब अशोक सिद्धार्थ पर कार्रवाई हुई हो। इससे पहले फरवरी 2025 में भी उन्हें गुटबाजी और अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित किया गया था। हालांकि लगभग छह महीने बाद सितंबर 2025 में उन्हें फिर से पार्टी में शामिल कर लिया गया था। इसके बाद फरवरी 2026 में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अहम जिम्मेदारी भी दी गई थी, लेकिन एक बार फिर संगठनात्मक विवादों के चलते उन्हें पार्टी से बाहर होना पड़ा।
मायावती ने इसी कार्रवाई के तहत राष्ट्रीय समन्वयक रणधीर सिंह बेनीवाल को भी निष्कासित कर दिया। बेनीवाल के पास पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों की जिम्मेदारी थी। इससे पहले भी उनके प्रभार में बदलाव किए गए थे, लेकिन अब उन्हें संगठन से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि अनुशासन और संगठन हित सर्वोपरि हैं तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
दो वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन के साथ ही मायावती ने संगठन में नए फेरबदल की भी घोषणा की। राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को एक बार फिर पंजाब का प्रभारी बनाया गया है और आगामी विधानसभा व लोकसभा चुनाव तक वे इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे। वहीं मध्य प्रदेश के प्रभारी राजाराम को दिल्ली, गुजरात, केरल और कर्नाटक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा अशोक सिद्धार्थ के करीबी माने जाने वाले नितिन सिंह से भी केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है।
मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाहों या साजिशों से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संगठन को कमजोर करने और बसपा की पूर्ण बहुमत सरकार बनाने के अभियान को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे तत्वों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।
हाल ही में मायावती ने यह भी स्पष्ट किया था कि पार्टी में उम्मीदवार तय करने का अधिकार केवल उनके पास है। उन्होंने कहा था कि आकाश आनंद या अन्य नेता केवल उनके निर्देश पर ही उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करेंगे। उन्होंने यह भी साफ किया था कि यदि आकाश आनंद उत्तर प्रदेश में कोई कार्यक्रम करेंगे तो उसके लिए पहले उनकी अनुमति आवश्यक होगी। इससे साफ संकेत मिला था कि पार्टी के सभी बड़े फैसलों पर अंतिम अधिकार मायावती के पास ही रहेगा।
अशोक सिद्धार्थ का राजनीतिक सफर भी काफी चर्चित रहा है। पेशे से नेत्र रोग विशेषज्ञ रहे सिद्धार्थ ने सरकारी नौकरी छोड़कर वर्ष 2007 में बसपा का दामन थामा था। वे दो बार विधान परिषद सदस्य रहे और बाद में राज्यसभा सांसद भी बने। संगठन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और दक्षिण भारत समेत कई राज्यों में पार्टी विस्तार का काम देखा। उनकी पत्नी सुनीता सिद्धार्थ भी उत्तर प्रदेश महिला आयोग में महत्वपूर्ण पद पर रह चुकी हैं। वहीं उनकी बेटी प्रज्ञा सिद्धार्थ का विवाह 2023 में मायावती के भतीजे आकाश आनंद से हुआ था, जिससे उनका परिवार सीधे मायावती के परिवार से जुड़ गया।
