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आचार्य समय सागर महाराज मध्य प्रदेश के राजकीय अतिथि घोषित, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में किया ऐतिहासिक ऐलान
भोपाल,(म.प्र.)
चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव में सीएम ने विधानसभा आने का दिया निमंत्रण, कहा- संतों का सान्निध्य समाज और राष्ट्र को सही दिशा देता है
राजधानी भोपाल में आयोजित आचार्य समय सागर महाराज ससंघ के भव्य चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए आचार्य समय सागर महाराज को मध्य प्रदेश का राजकीय अतिथि घोषित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुदेव के पुनः भोपाल आगमन पर राज्य सरकार उनकी आध्यात्मिक गरिमा और समाज में उनके योगदान का सम्मान करते हुए उन्हें राजकीय अतिथि के रूप में स्वीकार करती है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के साथ ही समारोह स्थल जयघोष और तालियों की गूंज से भर उठा। जैन समाज और उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए स्वागत किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में आचार्य समय सागर महाराज के पाद प्रक्षालन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर आचार्य श्री ने मुख्यमंत्री को धार्मिक ग्रंथ भेंट किए। समारोह में देश और विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम में ट्रस्ट अध्यक्ष पंकज सुपारी, पूर्व अध्यक्ष मनोज बांगा, प्रमोद जैन, हिमांशु जैन सहित अनेक समाजसेवियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मंत्री विश्वास सारंग, विधायक आलोक शर्मा, राहुल कोठारी, रविंद्र यति, राजकुमार पटेल सहित कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
संतों का सान्निध्य जीवन को देता है नई दिशा
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में संतों और आचार्यों का स्थान सर्वोच्च रहा है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन 84 लाख योनियों के बाद प्राप्त होता है और इस जीवन के सामने दो रास्ते होते हैं—एक देवत्व की ओर और दूसरा पतन की ओर। यदि किसी व्यक्ति को संतों का सान्निध्य मिल जाए तो उसका जीवन स्वतः ही सदाचार, सेवा और आध्यात्मिकता के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
मुख्यमंत्री ने आचार्य विद्यासागर महाराज के साथ अपने वर्षों पुराने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि उन्हें अनेक अवसरों पर उनके दर्शन और मार्गदर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि आज आचार्य समय सागर महाराज उसी महान आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और समाज को संयम, सेवा तथा अहिंसा का संदेश दे रहे हैं।
भारत की पहचान आध्यात्मिक विरासत से
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिक विरासत, संत परंपरा और सेवा भावना से होती है। दुनिया जहां संघर्ष और शक्ति प्रदर्शन की राह पर आगे बढ़ रही है, वहीं भारत ने सदियों से अहिंसा, करुणा और आत्मसंयम का मार्ग अपनाया है। उन्होंने कहा कि संत समाज का मार्गदर्शन केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह सामाजिक और राष्ट्रीय विकास की दिशा भी तय करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व केवल शासन चलाना नहीं बल्कि समाज की सेवा करना है। सरकार की प्रत्येक योजना और निर्णय का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना होना चाहिए।
आचार्य समय सागर महाराज का सेवा और अहिंसा का संदेश
अपने आशीर्वचन में आचार्य समय सागर महाराज ने कहा कि अहिंसा केवल जैन धर्म की नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानवता की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य समाज में करुणा, दया और सेवा की भावना विकसित करना है। वर्षायोग की महत्ता बताते हुए उन्होंने समाज से आग्रह किया कि आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा के अनुरूप शिक्षा, चिकित्सा, जीव दया, पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाया जाए।
आचार्य श्री ने कहा कि पूजा-पाठ तभी सार्थक है जब उसके साथ समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की सेवा भी जुड़ी हो। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से संयमित जीवन अपनाने और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान किया।
विधानसभा आने का दिया विशेष निमंत्रण
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आचार्य समय सागर महाराज को मध्य प्रदेश विधानसभा आने का विशेष निमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि गुरुदेव विधानसभा पधारेंगे तो प्रदेश के सभी विधायक उनके मार्गदर्शन का लाभ प्राप्त करेंगे। इससे जनप्रतिनिधियों को सेवा, संयम, नैतिकता और लोककल्याण की भावना के साथ कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को भी समान महत्व देती है। गरीब, किसान, महिला और युवा के कल्याण के साथ सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
देश-विदेश से उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन के दौरान त्यागी-व्रतियों का सम्मान एवं अनुमोदना भी की गई। समाज प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि चातुर्मास के दौरान विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सेवा गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिससे समाज में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने आचार्य समय सागर महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें राजकीय अतिथि घोषित किए जाने की घोषणा को जैन समाज ने ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे संत परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का संदेश पूरे देश में जाएगा।
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आचार्य समय सागर महाराज मध्य प्रदेश के राजकीय अतिथि घोषित, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में किया ऐतिहासिक ऐलान
भोपाल,(म.प्र.)
राजधानी भोपाल में आयोजित आचार्य समय सागर महाराज ससंघ के भव्य चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए आचार्य समय सागर महाराज को मध्य प्रदेश का राजकीय अतिथि घोषित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुदेव के पुनः भोपाल आगमन पर राज्य सरकार उनकी आध्यात्मिक गरिमा और समाज में उनके योगदान का सम्मान करते हुए उन्हें राजकीय अतिथि के रूप में स्वीकार करती है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के साथ ही समारोह स्थल जयघोष और तालियों की गूंज से भर उठा। जैन समाज और उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए स्वागत किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में आचार्य समय सागर महाराज के पाद प्रक्षालन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर आचार्य श्री ने मुख्यमंत्री को धार्मिक ग्रंथ भेंट किए। समारोह में देश और विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम में ट्रस्ट अध्यक्ष पंकज सुपारी, पूर्व अध्यक्ष मनोज बांगा, प्रमोद जैन, हिमांशु जैन सहित अनेक समाजसेवियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मंत्री विश्वास सारंग, विधायक आलोक शर्मा, राहुल कोठारी, रविंद्र यति, राजकुमार पटेल सहित कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
संतों का सान्निध्य जीवन को देता है नई दिशा
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में संतों और आचार्यों का स्थान सर्वोच्च रहा है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन 84 लाख योनियों के बाद प्राप्त होता है और इस जीवन के सामने दो रास्ते होते हैं—एक देवत्व की ओर और दूसरा पतन की ओर। यदि किसी व्यक्ति को संतों का सान्निध्य मिल जाए तो उसका जीवन स्वतः ही सदाचार, सेवा और आध्यात्मिकता के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
मुख्यमंत्री ने आचार्य विद्यासागर महाराज के साथ अपने वर्षों पुराने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि उन्हें अनेक अवसरों पर उनके दर्शन और मार्गदर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि आज आचार्य समय सागर महाराज उसी महान आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और समाज को संयम, सेवा तथा अहिंसा का संदेश दे रहे हैं।
भारत की पहचान आध्यात्मिक विरासत से
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिक विरासत, संत परंपरा और सेवा भावना से होती है। दुनिया जहां संघर्ष और शक्ति प्रदर्शन की राह पर आगे बढ़ रही है, वहीं भारत ने सदियों से अहिंसा, करुणा और आत्मसंयम का मार्ग अपनाया है। उन्होंने कहा कि संत समाज का मार्गदर्शन केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह सामाजिक और राष्ट्रीय विकास की दिशा भी तय करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व केवल शासन चलाना नहीं बल्कि समाज की सेवा करना है। सरकार की प्रत्येक योजना और निर्णय का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना होना चाहिए।
आचार्य समय सागर महाराज का सेवा और अहिंसा का संदेश
अपने आशीर्वचन में आचार्य समय सागर महाराज ने कहा कि अहिंसा केवल जैन धर्म की नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानवता की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य समाज में करुणा, दया और सेवा की भावना विकसित करना है। वर्षायोग की महत्ता बताते हुए उन्होंने समाज से आग्रह किया कि आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा के अनुरूप शिक्षा, चिकित्सा, जीव दया, पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाया जाए।
आचार्य श्री ने कहा कि पूजा-पाठ तभी सार्थक है जब उसके साथ समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की सेवा भी जुड़ी हो। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से संयमित जीवन अपनाने और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान किया।
विधानसभा आने का दिया विशेष निमंत्रण
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आचार्य समय सागर महाराज को मध्य प्रदेश विधानसभा आने का विशेष निमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि गुरुदेव विधानसभा पधारेंगे तो प्रदेश के सभी विधायक उनके मार्गदर्शन का लाभ प्राप्त करेंगे। इससे जनप्रतिनिधियों को सेवा, संयम, नैतिकता और लोककल्याण की भावना के साथ कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को भी समान महत्व देती है। गरीब, किसान, महिला और युवा के कल्याण के साथ सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
देश-विदेश से उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन के दौरान त्यागी-व्रतियों का सम्मान एवं अनुमोदना भी की गई। समाज प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि चातुर्मास के दौरान विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सेवा गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिससे समाज में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने आचार्य समय सागर महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें राजकीय अतिथि घोषित किए जाने की घोषणा को जैन समाज ने ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे संत परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का संदेश पूरे देश में जाएगा।
