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BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग और पुतिन आएंगे भारत
Digital Desk
शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। गलवान संघर्ष 2020 के बाद शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा होगी।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें BRICS Summit में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचेंगे। एक ही समय पर भारत आने वाले दोनों नेताओं की मौजूदगी से शिखर सम्मेलन का कूटनीतिक और रणनीतिक महत्व बढ़ गया है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को शी जिनपिंग की भारत यात्रा की पुष्टि की। इससे दो दिन पहले रूस ने भी राष्ट्रपति पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि की थी। शी की यह यात्रा 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत की पहली यात्रा होगी, जिसने भारत-चीन संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया था।
BRICS Summit का आयोजन 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होगा। समूह के 11 सदस्य देशों के नेताओं के इसमें शामिल होने की उम्मीद है।
गलवान के बाद पहली बार भारत आएंगे शी
शी जिनपिंग ने आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत का दौरा किया था। उस समय उन्होंने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।
इसके कुछ महीनों बाद पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून 2020 को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हुआ।
इस संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों की जान गई थी। चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की थी।
गलवान घटना के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे समय तक सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध बना रहा।
मोदी-शी की द्विपक्षीय बैठक संभव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के BRICS Summit से इतर द्विपक्षीय बैठक करने की संभावना है।
गलवान संघर्ष के बाद दोनों नेता अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार मिले हैं, लेकिन शी की भारत यात्रा का कूटनीतिक महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि वह कई वर्षों के अंतराल के बाद देश का दौरा करेंगे।
हाल के समय में दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने और लंबित मतभेदों को संभालने के लिए राजनयिक संपर्क बढ़ाया है।
भारत-चीन सीमा विवाद अहम मुद्दा
भारत-चीन संबंधों में सीमा विवाद अभी भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 24 अगस्त को चीन की यात्रा की थी। इसके दौरान 25 अगस्त को उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत की।
बैठक में सीमा संबंधी मुद्दों और अन्य द्विपक्षीय विषयों पर चर्चा हुई। यह दोनों देशों की ओर से सीमा पर तनाव कम करने और व्यापक संबंधों को स्थिर रखने की जारी कोशिशों को दर्शाता है।
नई दिल्ली में संभावित मोदी-शी बैठक दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य बनाने की दिशा में हुई प्रगति पर चर्चा का एक और अवसर दे सकती है।
व्यापार असंतुलन भी चिंता का विषय
सीमा विवाद के अलावा व्यापार और आर्थिक संबंध भी भारत-चीन संबंधों में महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
नई दिल्ली लंबे समय से चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करने और अधिक संतुलित आर्थिक संबंध विकसित करने की कोशिश कर रहा है।
भारत रेयर-अर्थ मैग्नेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात से जुड़ी निर्भरता और संभावित आपूर्ति जोखिमों को भी कम करना चाहता है।
आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिशों के बीच इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत हो सकती है।
पुतिन भी पहुंचेंगे नई दिल्ली
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी BRICS Summit में शामिल होने के लिए भारत आएंगे।
उनकी यात्रा भारत-रूस की लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत का अवसर देगी। पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक की भी संभावना है, जिसमें रक्षा सहयोग और अन्य रणनीतिक मुद्दे प्रमुख हो सकते हैं।
एक ही सम्मेलन में पुतिन और शी की मौजूदगी से नई दिल्ली में होने वाली बैठक का भू-राजनीतिक महत्व और बढ़ जाएगा।
भारत के पास BRICS की अध्यक्षता
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत नई दिल्ली में इस वर्ष का शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
विस्तारित BRICS में भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया समेत सदस्य देश शामिल हैं। इसके अलावा साझेदार देशों के साथ आउटरीच गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं।
पूरे वर्ष भारत के अलग-अलग शहरों में BRICS से जुड़े मंत्रीस्तरीय सम्मेलन, आधिकारिक बैठकें और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
ग्लोबल साउथ और आर्थिक सहयोग पर जोर
भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के दौरान Global South की आवाज मजबूत करने, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद विरोधी सहयोग और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं पर जोर दिया है।
नई दिल्ली BRICS को केवल भू-राजनीतिक चर्चाओं के मंच के रूप में सीमित रखने के बजाय व्यापार, निवेश और विकास सहयोग के लिए भी प्रभावी मंच के रूप में स्थापित करना चाहती है।
BRICS Summit में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की एक साथ मौजूदगी भारत को दो प्रमुख शक्तियों के साथ सीधे संवाद का महत्वपूर्ण अवसर देगी। साथ ही, इससे भारत को विस्तारित BRICS समूह में अपनी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का मंच भी मिलेगा।
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