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ट्रंप का बड़ा दावा- ईरान के बाद अमेरिकी क्षेत्र घोषित होगा होर्मुज
अंतराष्ट्रीय न्यूज
न्यूयॉर्क रैली में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा- ईरान को हराने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को US territory घोषित करेंगे, USS Abraham Lincoln की तैनाती पर भी बोले
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को न्यूयॉर्क में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई पूरी होने के बाद वह होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का क्षेत्र घोषित करेंगे। उनके इस बयान के बाद रैली में मौजूद समर्थकों ने जोरदार प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान इस समय बुरी तरह कमजोर हो रहा है और जल्द ही अमेरिका की ओर से होर्मुज को लेकर बड़ा फैसला लिया जाएगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर भी टकराव की स्थिति बनी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। अपने सबसे संकरे हिस्से में इसका क्षेत्र ईरान और ओमान की समुद्री सीमाओं के बीच आता है। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय जहाज इस रास्ते का इस्तेमाल करते रहे हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ने के साथ इस जलमार्ग को लेकर पहले भी कई बार चिंता सामने आती रही है। ईरान की तरफ से समुद्री यातायात पर नियंत्रण बढ़ाने और जहाजों के लिए अतिरिक्त शर्तें रखने की बातें सामने आती रही हैं।
कुछ मामलों में जहाजों को ईरानी तट के करीब से गुजरने और अनुमति लेने की जरूरत को लेकर भी विवाद हुआ है। ऐसी परिस्थितियों में यहां से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। ईरान की ओर से जलडमरूमध्य में टोल लगाने की संभावना पर भी चर्चा होती रही है, जबकि ट्रंप प्रशासन इस तरह की व्यवस्था का विरोध करता रहा है। दूसरी तरफ ट्रंप ने खुद अमेरिका की ओर से टोल लगाने का विचार सामने रखा है। अब अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने वाला उनका बयान इस पूरे विवाद को और ज्यादा राजनीतिक बना रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप की टिप्पणी के साथ ही अमेरिकी नौसेना की पश्चिम एशिया में मौजूदगी भी चर्चा में है। शुक्रवार को ट्रंप ने USS Abraham Lincoln की लंबे समय से चली आ रही तैनाती पर सवालों का जवाब दिया। इस अमेरिकी विमानवाहक पोत की पश्चिम एशिया में करीब नौ महीने से मौजूदगी बताई जा रही है और ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान इसकी भूमिका अहम रही है। जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या जहाज की तैनाती जरूरत से ज्यादा लंबी हो गई है, तो उन्होंने इससे सहमति नहीं जताई। ट्रंप ने कहा कि यह तैनाती ‘लगभग पर्याप्त लंबी भी नहीं’ रही है।
Joint Base Andrews से न्यूयॉर्क रवाना होने से पहले ट्रंप से जब अमेरिकी सैन्यकर्मियों के परिवारों की चिंता को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने ऐसी चिंताओं को खारिज कर दिया। एक रिपोर्टर ने उनसे कहा कि जहाज पर तैनात सैनिकों के परिवार हालात को लेकर परेशान हैं। इस पर ट्रंप ने कहा कि ऐसा नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि USS Abraham Lincoln को बदलने की प्रक्रिया चल रही है। ट्रंप के मुताबिक यह जहाज अभी आगे बढ़ रहा है या जल्द ही आगे बढ़ेगा और इसकी जगह एक दूसरे समान विमानवाहक पोत को तैनात किया जाएगा। अमेरिकी नौसेना की इस तैनाती को पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत के कारण यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता। इस रास्ते से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की बड़ी मात्रा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में जहाजों की आवाजाही में रुकावट आने पर वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ट्रंप के बयान ने इसी वजह से होर्मुज को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से इसे अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने की बात ऐसे समय कही गई है, जब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले जहाजों को लेकर ईरान के साथ अमेरिका का तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। दूसरी तरफ USS Abraham Lincoln की जगह दूसरे विमानवाहक पोत की तैनाती की बात से भी साफ है कि पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी फिलहाल बनी रहने वाली है। ईरान के खिलाफ अमेरिकी रणनीति और होर्मुज को लेकर ट्रंप के ताजा बयान के बीच समुद्री मार्ग की सुरक्षा, जहाजों की आवाजाही और सैन्य तैनाती पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
ट्रंप का बड़ा दावा- ईरान के बाद अमेरिकी क्षेत्र घोषित होगा होर्मुज
अंतराष्ट्रीय न्यूज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को न्यूयॉर्क में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई पूरी होने के बाद वह होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का क्षेत्र घोषित करेंगे। उनके इस बयान के बाद रैली में मौजूद समर्थकों ने जोरदार प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान इस समय बुरी तरह कमजोर हो रहा है और जल्द ही अमेरिका की ओर से होर्मुज को लेकर बड़ा फैसला लिया जाएगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर भी टकराव की स्थिति बनी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। अपने सबसे संकरे हिस्से में इसका क्षेत्र ईरान और ओमान की समुद्री सीमाओं के बीच आता है। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय जहाज इस रास्ते का इस्तेमाल करते रहे हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ने के साथ इस जलमार्ग को लेकर पहले भी कई बार चिंता सामने आती रही है। ईरान की तरफ से समुद्री यातायात पर नियंत्रण बढ़ाने और जहाजों के लिए अतिरिक्त शर्तें रखने की बातें सामने आती रही हैं।
कुछ मामलों में जहाजों को ईरानी तट के करीब से गुजरने और अनुमति लेने की जरूरत को लेकर भी विवाद हुआ है। ऐसी परिस्थितियों में यहां से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। ईरान की ओर से जलडमरूमध्य में टोल लगाने की संभावना पर भी चर्चा होती रही है, जबकि ट्रंप प्रशासन इस तरह की व्यवस्था का विरोध करता रहा है। दूसरी तरफ ट्रंप ने खुद अमेरिका की ओर से टोल लगाने का विचार सामने रखा है। अब अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने वाला उनका बयान इस पूरे विवाद को और ज्यादा राजनीतिक बना रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप की टिप्पणी के साथ ही अमेरिकी नौसेना की पश्चिम एशिया में मौजूदगी भी चर्चा में है। शुक्रवार को ट्रंप ने USS Abraham Lincoln की लंबे समय से चली आ रही तैनाती पर सवालों का जवाब दिया। इस अमेरिकी विमानवाहक पोत की पश्चिम एशिया में करीब नौ महीने से मौजूदगी बताई जा रही है और ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान इसकी भूमिका अहम रही है। जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या जहाज की तैनाती जरूरत से ज्यादा लंबी हो गई है, तो उन्होंने इससे सहमति नहीं जताई। ट्रंप ने कहा कि यह तैनाती ‘लगभग पर्याप्त लंबी भी नहीं’ रही है।
Joint Base Andrews से न्यूयॉर्क रवाना होने से पहले ट्रंप से जब अमेरिकी सैन्यकर्मियों के परिवारों की चिंता को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने ऐसी चिंताओं को खारिज कर दिया। एक रिपोर्टर ने उनसे कहा कि जहाज पर तैनात सैनिकों के परिवार हालात को लेकर परेशान हैं। इस पर ट्रंप ने कहा कि ऐसा नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि USS Abraham Lincoln को बदलने की प्रक्रिया चल रही है। ट्रंप के मुताबिक यह जहाज अभी आगे बढ़ रहा है या जल्द ही आगे बढ़ेगा और इसकी जगह एक दूसरे समान विमानवाहक पोत को तैनात किया जाएगा। अमेरिकी नौसेना की इस तैनाती को पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत के कारण यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता। इस रास्ते से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की बड़ी मात्रा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में जहाजों की आवाजाही में रुकावट आने पर वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ट्रंप के बयान ने इसी वजह से होर्मुज को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से इसे अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने की बात ऐसे समय कही गई है, जब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले जहाजों को लेकर ईरान के साथ अमेरिका का तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। दूसरी तरफ USS Abraham Lincoln की जगह दूसरे विमानवाहक पोत की तैनाती की बात से भी साफ है कि पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी फिलहाल बनी रहने वाली है। ईरान के खिलाफ अमेरिकी रणनीति और होर्मुज को लेकर ट्रंप के ताजा बयान के बीच समुद्री मार्ग की सुरक्षा, जहाजों की आवाजाही और सैन्य तैनाती पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
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