कैबिनेट ने मंजूर की ₹23,731 करोड़ की GOBARdhan योजना, बायोगैस उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का बड़ा दांव

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कृषि अवशेष और जैविक कचरे से बनेगी कंप्रेस्ड बायोगैस, एलएनजी आयात घटाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए 10 साल की राष्ट्रीय योजना को मिली मंजूरी

देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 23,731 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना (GOBARdhan) को मंजूरी दे दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2027-28 से 2035-36 तक लागू रहेगी। इसके तहत कृषि अवशेष, गोबर, नगर निकायों से निकलने वाला जैविक कचरा और अन्य बायोमास का उपयोग कर बड़े पैमाने पर कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य स्वदेशी स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ एलएनजी (LNG) के आयात पर होने वाले खर्च को कम करना है।

सरकार का कहना है कि यह योजना केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सीधे लाभ पहुंचाएगी। वर्तमान में भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच सरकार अब घरेलू संसाधनों से ईंधन उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसी रणनीति के तहत GOBARdhan योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाएगा।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि देश में उत्पादित कंप्रेस्ड बायोगैस भविष्य में आयातित प्राकृतिक गैस का प्रभावी विकल्प बन सकती है। सरकार का अनुमान है कि इस योजना के सफल क्रियान्वयन से अगले दस वर्षों में विदेशी मुद्रा के रूप में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो सकती है। साथ ही देश में करीब 75 हजार करोड़ रुपये का नया बायोएनर्जी उद्योग विकसित होने की संभावना भी जताई गई है।

योजना को छह प्रमुख स्तंभों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए अनिवार्य बायोगैस मिश्रण (Blending) का लक्ष्य तय करना है। तय रोडमैप के अनुसार वर्ष 2027 में सीबीजी की हिस्सेदारी तीन प्रतिशत, वर्ष 2028 में चार प्रतिशत और वर्ष 2029 से इसे बढ़ाकर पांच प्रतिशत किया जाएगा। यह मिश्रण परिवहन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस दोनों पर लागू होगा।

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बायोगैस उत्पादन को आर्थिक रूप से आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने उत्पादकों के लिए प्रशासनिक मूल्य भी तय किया है। इसके तहत 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू (MMBTU) की दर निर्धारित की गई है, जिससे निवेशकों और उत्पादकों को दीर्घकालिक मूल्य स्थिरता मिल सके। सरकार का मानना है कि तय मूल्य मिलने से निजी निवेश बढ़ेगा और नई परियोजनाओं को गति मिलेगी।

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नई बायोगैस परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता का भी प्रावधान किया गया है। ग्रीनफील्ड सीबीजी प्लांट स्थापित करने वाली इकाइयों को उनकी क्षमता के आधार पर पूंजीगत सहायता दी जाएगी। पहले से संचालित संयंत्र यदि अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहते हैं तो वे भी इस योजना के तहत वित्तीय सहायता के पात्र होंगे। इसके अलावा बायोगैस संयंत्रों को मौजूदा गैस पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ने के लिए भी अलग से आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा ताकि उत्पादित गैस का वितरण आसान हो सके।

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सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए विशेष क्रेडिट गारंटी तंत्र भी तैयार किया है। इससे छोटे उद्यमियों को बैंक ऋण और वित्तीय सहायता प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही जिला स्तर पर कृषि अवशेष और अन्य जैविक सामग्री के संग्रहण, नई तकनीक अपनाने और परियोजनाओं के विकास के लिए चैलेंज फंड की व्यवस्था भी की गई है।

इस योजना के तहत खेतों में बचने वाले फसल अवशेष, पशुओं का गोबर, शुगर मिलों से निकलने वाला प्रेसमड, नगर निकायों का जैविक कचरा और अन्य बायोडिग्रेडेबल सामग्री का उपयोग बायोगैस उत्पादन में किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे खुले में कचरा जलाने और पराली जलाने जैसी समस्याओं में कमी आएगी। साथ ही जैविक खाद का उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिलेगा।

यह योजना केंद्र सरकार की पहले से संचालित SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) पहल को आगे बढ़ाने का काम करेगी। इस पहल के तहत देशभर में पहले ही 200 से अधिक कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र शुरू किए जा चुके हैं। अब नए नीति ढांचे के जरिए इस क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और बाजार की मांग को और मजबूत बनाने की तैयारी की गई है।

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07 Aug 2026 By Priyanka

कैबिनेट ने मंजूर की ₹23,731 करोड़ की GOBARdhan योजना, बायोगैस उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का बड़ा दांव

Digital Desk

देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 23,731 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना (GOBARdhan) को मंजूरी दे दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2027-28 से 2035-36 तक लागू रहेगी। इसके तहत कृषि अवशेष, गोबर, नगर निकायों से निकलने वाला जैविक कचरा और अन्य बायोमास का उपयोग कर बड़े पैमाने पर कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य स्वदेशी स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ एलएनजी (LNG) के आयात पर होने वाले खर्च को कम करना है।

सरकार का कहना है कि यह योजना केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सीधे लाभ पहुंचाएगी। वर्तमान में भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच सरकार अब घरेलू संसाधनों से ईंधन उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसी रणनीति के तहत GOBARdhan योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाएगा।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि देश में उत्पादित कंप्रेस्ड बायोगैस भविष्य में आयातित प्राकृतिक गैस का प्रभावी विकल्प बन सकती है। सरकार का अनुमान है कि इस योजना के सफल क्रियान्वयन से अगले दस वर्षों में विदेशी मुद्रा के रूप में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो सकती है। साथ ही देश में करीब 75 हजार करोड़ रुपये का नया बायोएनर्जी उद्योग विकसित होने की संभावना भी जताई गई है।

योजना को छह प्रमुख स्तंभों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए अनिवार्य बायोगैस मिश्रण (Blending) का लक्ष्य तय करना है। तय रोडमैप के अनुसार वर्ष 2027 में सीबीजी की हिस्सेदारी तीन प्रतिशत, वर्ष 2028 में चार प्रतिशत और वर्ष 2029 से इसे बढ़ाकर पांच प्रतिशत किया जाएगा। यह मिश्रण परिवहन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस दोनों पर लागू होगा।

बायोगैस उत्पादन को आर्थिक रूप से आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने उत्पादकों के लिए प्रशासनिक मूल्य भी तय किया है। इसके तहत 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू (MMBTU) की दर निर्धारित की गई है, जिससे निवेशकों और उत्पादकों को दीर्घकालिक मूल्य स्थिरता मिल सके। सरकार का मानना है कि तय मूल्य मिलने से निजी निवेश बढ़ेगा और नई परियोजनाओं को गति मिलेगी।

नई बायोगैस परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता का भी प्रावधान किया गया है। ग्रीनफील्ड सीबीजी प्लांट स्थापित करने वाली इकाइयों को उनकी क्षमता के आधार पर पूंजीगत सहायता दी जाएगी। पहले से संचालित संयंत्र यदि अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहते हैं तो वे भी इस योजना के तहत वित्तीय सहायता के पात्र होंगे। इसके अलावा बायोगैस संयंत्रों को मौजूदा गैस पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ने के लिए भी अलग से आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा ताकि उत्पादित गैस का वितरण आसान हो सके।

सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए विशेष क्रेडिट गारंटी तंत्र भी तैयार किया है। इससे छोटे उद्यमियों को बैंक ऋण और वित्तीय सहायता प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही जिला स्तर पर कृषि अवशेष और अन्य जैविक सामग्री के संग्रहण, नई तकनीक अपनाने और परियोजनाओं के विकास के लिए चैलेंज फंड की व्यवस्था भी की गई है।

इस योजना के तहत खेतों में बचने वाले फसल अवशेष, पशुओं का गोबर, शुगर मिलों से निकलने वाला प्रेसमड, नगर निकायों का जैविक कचरा और अन्य बायोडिग्रेडेबल सामग्री का उपयोग बायोगैस उत्पादन में किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे खुले में कचरा जलाने और पराली जलाने जैसी समस्याओं में कमी आएगी। साथ ही जैविक खाद का उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिलेगा।

यह योजना केंद्र सरकार की पहले से संचालित SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) पहल को आगे बढ़ाने का काम करेगी। इस पहल के तहत देशभर में पहले ही 200 से अधिक कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र शुरू किए जा चुके हैं। अब नए नीति ढांचे के जरिए इस क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और बाजार की मांग को और मजबूत बनाने की तैयारी की गई है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/cabinet-approves-%E2%82%B923731-crore-gobardhan-scheme-governments-big-bet-on/article-60934

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