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गॉल टेस्ट से पहले स्पिन चुनौती के लिए भारत की खास तैयारी, गंभीर ने बदली रणनीति
स्पोर्ट्स डेस्क
श्रीलंका जैसी टर्निंग पिच पर कराया अभ्यास, स्थानीय युवा स्पिनरों के सामने बल्लेबाजों ने घंटों बहाया पसीना
श्रीलंका दौरे पर टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय टीम ने अपनी तैयारियों को नया रूप दिया है। 15 अगस्त से गॉल में खेले जाने वाले पहले टेस्ट को ध्यान में रखते हुए हेड कोच गौतम गंभीर ने अभ्यास सत्र में ऐसी पिच तैयार कराई, जो श्रीलंका की स्पिन और अनियमित उछाल वाली विकेट जैसी हो। टीम का फोकस बल्लेबाजों को शुरुआती दिन नहीं, बल्कि टेस्ट के अंतिम दिनों जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए तैयार करना रहा। इसी वजह से नेट्स में खिलाड़ियों ने सामान्य अभ्यास के बजाय मुश्किल हालात में बल्लेबाजी पर ज्यादा समय दिया।
भारतीय टीम निर्धारित मुकाबले से कई दिन पहले ही कोलंबो पहुंच गई थी और लगातार अभ्यास सत्र में हिस्सा ले रही है। टीम का ट्रेनिंग बेस नॉनडिस्क्रिप्ट क्रिकेट क्लब (NCC) मैदान बना हुआ है, जहां कोचिंग स्टाफ ने एक अलग अभ्यास विकेट तैयार कराया। इस पिच पर जानबूझकर दरारें छोड़ी गईं, घास को पूरी तरह नहीं हटाया गया और सतह को इस तरह रखा गया कि गेंद कभी तेज टर्न ले तो कभी नीची रहे। इसका मकसद बल्लेबाजों को गॉल की वास्तविक परिस्थितियों से पहले ही रूबरू कराना था।
नेट्स में शुरुआत भारतीय टीम के नियमित नेट गेंदबाजों ने की, लेकिन बाद में स्थानीय स्कूल क्रिकेटरों और युवा स्पिन गेंदबाजों को भी बुलाया गया। इन गेंदबाजों ने लगातार अलग-अलग एंगल और स्पिन के साथ गेंदबाजी की। बल्लेबाजों ने लंबे समय तक क्रीज पर टिककर खेलने, पैरों का इस्तेमाल करने और स्पिन के खिलाफ धैर्य बनाए रखने का अभ्यास किया। टीम प्रबंधन चाहता है कि बल्लेबाज किसी भी तरह की टर्निंग ट्रैक पर मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार रहें।
अभ्यास के दौरान कप्तान शुभमन गिल भी मैदान पर सक्रिय नजर आए। कुछ दिन पहले ट्रेनिंग के दौरान उनकी उंगली में चोट लगी थी, लेकिन बाद के सत्र में उन्होंने बल्लेबाजी की और फिटनेस को लेकर कोई बड़ी परेशानी नहीं दिखी। केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल, यशस्वी जायसवाल और अन्य बल्लेबाजों ने भी रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव जैसे स्पिनरों के खिलाफ लंबा अभ्यास किया। बल्लेबाजी के साथ-साथ फील्डिंग और कैचिंग ड्रिल पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
भारतीय टीम के लिए यह सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से भी काफी अहम मानी जा रही है। पिछली कुछ टेस्ट सीरीज के परिणामों के बाद टीम अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। ऐसे में श्रीलंका की परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करना टीम की प्राथमिकता है। इसी वजह से तैयारी का पूरा फोकस स्थानीय हालात को समझने और उसी के अनुरूप रणनीति बनाने पर रखा गया है।
इस दौरे में कुछ खिलाड़ी उपलब्ध नहीं हैं। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर पहले टेस्ट का हिस्सा नहीं होंगे, जबकि युवा बल्लेबाज साई सुदर्शन की वापसी को लेकर अंतिम फैसला फिटनेस रिपोर्ट के बाद होगा। नेट्स में अतिरिक्त अभ्यास के लिए हर्ष दुबे, तनुष कोटियान, विप्रज निगम और शिवांग कुमार जैसे युवा स्पिन गेंदबाज भी टीम के साथ जुड़े हुए हैं।
भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट क्रिकेट का रिकॉर्ड भी टीम इंडिया के पक्ष में रहा है। पिछले कई वर्षों से भारतीय टीम इस प्रतिद्वंद्विता में मजबूत प्रदर्शन करती रही है और श्रीलंका को लंबे समय से टेस्ट सीरीज में जीत नहीं मिली है। इसी रिकॉर्ड को बरकरार रखने के इरादे से भारतीय टीम इस बार भी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती।
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गॉल टेस्ट से पहले स्पिन चुनौती के लिए भारत की खास तैयारी, गंभीर ने बदली रणनीति
स्पोर्ट्स डेस्क
श्रीलंका दौरे पर टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय टीम ने अपनी तैयारियों को नया रूप दिया है। 15 अगस्त से गॉल में खेले जाने वाले पहले टेस्ट को ध्यान में रखते हुए हेड कोच गौतम गंभीर ने अभ्यास सत्र में ऐसी पिच तैयार कराई, जो श्रीलंका की स्पिन और अनियमित उछाल वाली विकेट जैसी हो। टीम का फोकस बल्लेबाजों को शुरुआती दिन नहीं, बल्कि टेस्ट के अंतिम दिनों जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए तैयार करना रहा। इसी वजह से नेट्स में खिलाड़ियों ने सामान्य अभ्यास के बजाय मुश्किल हालात में बल्लेबाजी पर ज्यादा समय दिया।
भारतीय टीम निर्धारित मुकाबले से कई दिन पहले ही कोलंबो पहुंच गई थी और लगातार अभ्यास सत्र में हिस्सा ले रही है। टीम का ट्रेनिंग बेस नॉनडिस्क्रिप्ट क्रिकेट क्लब (NCC) मैदान बना हुआ है, जहां कोचिंग स्टाफ ने एक अलग अभ्यास विकेट तैयार कराया। इस पिच पर जानबूझकर दरारें छोड़ी गईं, घास को पूरी तरह नहीं हटाया गया और सतह को इस तरह रखा गया कि गेंद कभी तेज टर्न ले तो कभी नीची रहे। इसका मकसद बल्लेबाजों को गॉल की वास्तविक परिस्थितियों से पहले ही रूबरू कराना था।
नेट्स में शुरुआत भारतीय टीम के नियमित नेट गेंदबाजों ने की, लेकिन बाद में स्थानीय स्कूल क्रिकेटरों और युवा स्पिन गेंदबाजों को भी बुलाया गया। इन गेंदबाजों ने लगातार अलग-अलग एंगल और स्पिन के साथ गेंदबाजी की। बल्लेबाजों ने लंबे समय तक क्रीज पर टिककर खेलने, पैरों का इस्तेमाल करने और स्पिन के खिलाफ धैर्य बनाए रखने का अभ्यास किया। टीम प्रबंधन चाहता है कि बल्लेबाज किसी भी तरह की टर्निंग ट्रैक पर मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार रहें।
अभ्यास के दौरान कप्तान शुभमन गिल भी मैदान पर सक्रिय नजर आए। कुछ दिन पहले ट्रेनिंग के दौरान उनकी उंगली में चोट लगी थी, लेकिन बाद के सत्र में उन्होंने बल्लेबाजी की और फिटनेस को लेकर कोई बड़ी परेशानी नहीं दिखी। केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल, यशस्वी जायसवाल और अन्य बल्लेबाजों ने भी रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव जैसे स्पिनरों के खिलाफ लंबा अभ्यास किया। बल्लेबाजी के साथ-साथ फील्डिंग और कैचिंग ड्रिल पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
भारतीय टीम के लिए यह सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से भी काफी अहम मानी जा रही है। पिछली कुछ टेस्ट सीरीज के परिणामों के बाद टीम अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। ऐसे में श्रीलंका की परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करना टीम की प्राथमिकता है। इसी वजह से तैयारी का पूरा फोकस स्थानीय हालात को समझने और उसी के अनुरूप रणनीति बनाने पर रखा गया है।
इस दौरे में कुछ खिलाड़ी उपलब्ध नहीं हैं। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर पहले टेस्ट का हिस्सा नहीं होंगे, जबकि युवा बल्लेबाज साई सुदर्शन की वापसी को लेकर अंतिम फैसला फिटनेस रिपोर्ट के बाद होगा। नेट्स में अतिरिक्त अभ्यास के लिए हर्ष दुबे, तनुष कोटियान, विप्रज निगम और शिवांग कुमार जैसे युवा स्पिन गेंदबाज भी टीम के साथ जुड़े हुए हैं।
भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट क्रिकेट का रिकॉर्ड भी टीम इंडिया के पक्ष में रहा है। पिछले कई वर्षों से भारतीय टीम इस प्रतिद्वंद्विता में मजबूत प्रदर्शन करती रही है और श्रीलंका को लंबे समय से टेस्ट सीरीज में जीत नहीं मिली है। इसी रिकॉर्ड को बरकरार रखने के इरादे से भारतीय टीम इस बार भी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती।
