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चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल से अमेरिका के बड़े सैन्य विमान खतरे में: रिपोर्ट में लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता का दावा
अंतराष्ट्रीय न्यूज
नई हथियार क्षमता से इंडो-पैसिफिक में बदलेगा हवाई युद्ध का समीकरण? DF-17 और DF-27 जैसे सिस्टम की रेंज को लेकर सामने आई अहम जानकारी
चीन की सैन्य तकनीक को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने अमेरिका की हवाई सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ऐसे हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल विकसित कर चुका है, जिनका इस्तेमाल लंबी दूरी पर उड़ रहे महत्वपूर्ण सैन्य विमानों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। इस क्षमता का संभावित असर उन अमेरिकी विमानों पर पड़ सकता है जो सीधे युद्ध में शामिल होने के बजाय लड़ाकू विमानों को जरूरी सहायता देते हैं। इनमें एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट (AWACS) और एयरबोर्न कमांड सेंटर जैसे विमान शामिल हैं। इन विमानों की मदद से लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन, निगरानी, सूचना और कमांड सपोर्ट मिलता है। ऐसे में इन्हें दूर से निशाना बनाने की क्षमता किसी भी बड़े सैन्य अभियान की रणनीति को प्रभावित कर सकती है।
हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल क्या है?
हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल यानी HGV को आम तौर पर रॉकेट या मिसाइल की मदद से ऊंचाई तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद यह वातावरण में बेहद तेज गति से आगे बढ़ता है। इसकी खासियत केवल रफ्तार नहीं, बल्कि उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता भी है। हाइपरसोनिक हथियारों की गति मैक-5 यानी आवाज की गति से पांच गुना से ज्यादा हो सकती है। पारंपरिक बैलिस्टिक हथियारों की तुलना में इनके रास्ते में बदलाव की क्षमता इन्हें ट्रैक और इंटरसेप्ट करना ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना सकती है।
DF-17 से हजारों किलोमीटर तक पहुंच की बात
रिपोर्ट में चीन की DF-17 मिसाइल से जुड़े हाइपरसोनिक सिस्टम का भी उल्लेख किया गया है। इसके जरिए करीब 2,400 किलोमीटर तक की दूरी तय करने की क्षमता का दावा किया गया है। यह दूरी चीन से गुआम तक के अंतर के करीब है। गुआम प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र है और वहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी लंबे समय से बनी हुई है।
DF-27 की रेंज और ज्यादा बताई गई
चीन के DF-27 सिस्टम को इससे भी अधिक लंबी दूरी वाला हथियार माना जाता है। रिपोर्ट में इसकी संभावित रेंज लगभग 8,000 किलोमीटर तक बताई गई है। इतनी दूरी का मतलब है कि चीन के पास क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में काफी दूर स्थित लक्ष्यों तक पहुंचने वाले मिसाइल सिस्टम का विकल्प मौजूद हो सकता है। हालांकि किसी चलते हुए विमान को इतनी दूरी से सटीक तरीके से निशाना बनाना अलग और बेहद जटिल चुनौती है।
चलते विमान को ट्रैक करना सबसे बड़ी चुनौती
किसी निश्चित जमीन या स्थिर लक्ष्य की तुलना में हवा में लगातार गति बदल रहे विमान को निशाना बनाना काफी मुश्किल होता है। लंबी दूरी की मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने में कई मिनट लग सकते हैं और इस दौरान विमान अपनी स्थिति बदल सकता है। ऐसे हमले के लिए केवल लंबी दूरी की मिसाइल पर्याप्त नहीं होगी। लगातार काम करने वाली सैटेलाइट, रडार, सेंसर और कम्युनिकेशन नेटवर्क की जरूरत होगी, ताकि लक्ष्य की सही लोकेशन की जानकारी हथियार तक पहुंचती रहे। इसे सैन्य भाषा में एक लंबी ‘किल चेन’ के तौर पर देखा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर सूचना टूटने या गलत होने से हमले की सटीकता प्रभावित हो सकती है।
मिसाइल लॉन्च से बढ़ सकता है गलतफहमी का खतरा
इतनी लंबी दूरी से बैलिस्टिक या हाइपरसोनिक मिसाइल के इस्तेमाल में एक और बड़ी चिंता जुड़ी है। किसी देश की ओर से किए गए मिसाइल लॉन्च की शुरुआती पहचान के दौरान यह स्पष्ट करना मुश्किल हो सकता है कि हथियार किस प्रकार के लक्ष्य के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। बड़े सैन्य तनाव के दौरान ऐसी स्थिति गलत आकलन और तेजी से बढ़ते टकराव का कारण बन सकती है। खासकर तब, जब संबंधित देश के पास परमाणु क्षमता भी मौजूद हो।
चीन के मिसाइल कार्यक्रम का लगातार विस्तार
चीन पिछले कुछ वर्षों में अपने मिसाइल शस्त्रागार और हाइपरसोनिक तकनीक को तेजी से विकसित कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग कुछ हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में एयर-टू-एयर क्षमता और कुछ अन्य मिसाइल प्रणालियों में एंटी-शिप क्षमता जोड़ने पर भी काम कर रहा है। अमेरिकी आकलनों के मुताबिक, 2024 तक चीन के पास 3,150 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा भंडार था। लंबी दूरी के मिसाइल सिस्टम, हाइपरसोनिक हथियार और बेहतर निगरानी नेटवर्क पर बढ़ता जोर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य रणनीति के लिए अहम माना जा रहा है।
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