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चिन्मय मिशन ने दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन गीतापाठ कार्यक्रम का आयोजन किया
Digital Desk
“चिन्मय गीता समर्पणम्” के दौरान गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की कोशिश में, पूरी दुनिया के लोगों ने एक साथ मिलकर भगवद गीता के 15वें अध्याय का पाठ किया।
चिन्मय आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित 'चिन्मय अमृत महोत्सव' के हिस्से के रूप में, चिन्मय मिशन ने 9 मई, 2026 को शाम 7:30 बजे (IST) 'चिन्मय गीता समर्पणम्' का आयोजन किया। इसमें दुनिया भर से लोगों ने ऑनलाइन जुड़कर भगवद गीता के 15वें अध्याय, 'पुरुषोत्तम योग' का पाठ किया।
यह पहल पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद की सोच से प्रेरित थी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन गीता के ज्ञान को जन-जन तक पहुँचानेमें समर्पित कर दिया।इसेभक्ति, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक एकता की एक सामूहिक भेंट के रूप मेंशुरू किया गया था।
इस वैश्विक प्रयास के तहत, चिन्मय मिशन इस कार्यक्रम को 'सबसे अधिक लोगों द्वारा एक साथ ऑनलाइन पाठ करने' के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भेज रहा है। अलग-अलग ऑनलाइन सत्रों की रिकॉर्डिंग अभी इकट्ठा की जा रही है, जिन्हें जाँच के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अधिकारियों को भेजा जाएगा। इसका आधिकारिक परिणाम अगले कुछ हफ़्तों में आने की उम्मीद है।
इस कार्यक्रम ने एक साझा आध्यात्मिक अनुभव के लिए 70 से अधिक देशों के 35,000 से भी ज्यादा लोगों को एक साथ जोड़ा। इस पहल की सबसे खास बात इसमें दिखा सहयोग का अद्भुत जज्बा था। दुनिया के अलग-अलग देशों से आए लगभग 1,000 वॉलंटियर्स को कई हफ्तों तक ट्रेनिंग दी गई, ताकि वे वर्चुअल मीटिंग्स को संभाल सकें, लोगों का मार्गदर्शन कर सकें और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की जरूरतों के हिसाब से सेशन को रिकॉर्ड कर सकें।
यह कार्यक्रम चिन्मय मिशन के तकनीकी साथी 'सिस्को वेबेक्स' (Cisco Webex) के माध्यम से ऑनलाइन आयोजित किया गया। इसमें कई देशों के भक्तों, छात्रों और परिवारों ने हिस्सा लिया, जो यह दिखाता है कि भगवद गीता की शिक्षाएँ आज पूरी दुनिया में कितनी लोकप्रिय हो रही हैं।इसके अलावा, भगवद गीता के 15वें अध्याय, 'पुरुषोत्तम योग'के सामूहिक पाठ का गहरा आध्यात्मिक महत्व भी था, जो साधकों को परमात्मा और मानव जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य को समझने की राह दिखाता है।
इस पहल के बारे में बात करते हुए, चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख, पूज्य स्वामी स्वरूपानंदने कहा, "चिन्मय गीता समर्पणम् की कल्पना एक ऐसी सामूहिक आध्यात्मिक भेंट के रूप में की गई थी, जिसने भौगोलिक सीमाओं को मिटाकर सभी को भगवद गीता के ज्ञान के माध्यम से एक सूत्र में पिरो दिया। जब हजारों लोग एक मन और एक ही उद्देश्य के साथ मिलकर 'लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु' (सभी जीव सुखी हों)का पाठ करते हैं, तो यह पूरी दुनिया के कल्याण के लिए एक शक्तिशाली प्रार्थना बन जाती है।जैसे-जैसे चिन्मय मिशन अपने 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है, यह पहल वेदांत के ज्ञान को फैलाने और लोगों को दैनिक जीवन में गीता की शिक्षाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। दुनिया भर से मिली इस भारी भागीदारी ने इसे वास्तव में एक ऐतिहासिक और यादगार अवसर बना दिया है।"
इस पहल को दुनिया भर के विभिन्न सनातन धर्म संगठनों और आध्यात्मिक समुदायों का भी भरपूर समर्थन और भागीदारी मिली। इसने सांस्कृतिक जुड़ाव और आध्यात्मिक सद्भाव (Spiritual Harmony) की भावना को और अधिक मजबूती प्रदान की।
यह कार्यक्रमचिन्मय अमृत महोत्सवका एक मुख्य हिस्सा था। यह साल भर चलने वाला एक वैश्विक उत्सव है, जो आध्यात्मिकता, शिक्षा, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्रों में चिन्मय मिशन के 75 वर्षों के योगदान के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है।
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चिन्मय मिशन ने दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन गीतापाठ कार्यक्रम का आयोजन किया
Digital Desk
चिन्मय आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित 'चिन्मय अमृत महोत्सव' के हिस्से के रूप में, चिन्मय मिशन ने 9 मई, 2026 को शाम 7:30 बजे (IST) 'चिन्मय गीता समर्पणम्' का आयोजन किया। इसमें दुनिया भर से लोगों ने ऑनलाइन जुड़कर भगवद गीता के 15वें अध्याय, 'पुरुषोत्तम योग' का पाठ किया।
यह पहल पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद की सोच से प्रेरित थी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन गीता के ज्ञान को जन-जन तक पहुँचानेमें समर्पित कर दिया।इसेभक्ति, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक एकता की एक सामूहिक भेंट के रूप मेंशुरू किया गया था।
इस वैश्विक प्रयास के तहत, चिन्मय मिशन इस कार्यक्रम को 'सबसे अधिक लोगों द्वारा एक साथ ऑनलाइन पाठ करने' के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भेज रहा है। अलग-अलग ऑनलाइन सत्रों की रिकॉर्डिंग अभी इकट्ठा की जा रही है, जिन्हें जाँच के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अधिकारियों को भेजा जाएगा। इसका आधिकारिक परिणाम अगले कुछ हफ़्तों में आने की उम्मीद है।
इस कार्यक्रम ने एक साझा आध्यात्मिक अनुभव के लिए 70 से अधिक देशों के 35,000 से भी ज्यादा लोगों को एक साथ जोड़ा। इस पहल की सबसे खास बात इसमें दिखा सहयोग का अद्भुत जज्बा था। दुनिया के अलग-अलग देशों से आए लगभग 1,000 वॉलंटियर्स को कई हफ्तों तक ट्रेनिंग दी गई, ताकि वे वर्चुअल मीटिंग्स को संभाल सकें, लोगों का मार्गदर्शन कर सकें और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की जरूरतों के हिसाब से सेशन को रिकॉर्ड कर सकें।
यह कार्यक्रम चिन्मय मिशन के तकनीकी साथी 'सिस्को वेबेक्स' (Cisco Webex) के माध्यम से ऑनलाइन आयोजित किया गया। इसमें कई देशों के भक्तों, छात्रों और परिवारों ने हिस्सा लिया, जो यह दिखाता है कि भगवद गीता की शिक्षाएँ आज पूरी दुनिया में कितनी लोकप्रिय हो रही हैं।इसके अलावा, भगवद गीता के 15वें अध्याय, 'पुरुषोत्तम योग'के सामूहिक पाठ का गहरा आध्यात्मिक महत्व भी था, जो साधकों को परमात्मा और मानव जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य को समझने की राह दिखाता है।
इस पहल के बारे में बात करते हुए, चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख, पूज्य स्वामी स्वरूपानंदने कहा, "चिन्मय गीता समर्पणम् की कल्पना एक ऐसी सामूहिक आध्यात्मिक भेंट के रूप में की गई थी, जिसने भौगोलिक सीमाओं को मिटाकर सभी को भगवद गीता के ज्ञान के माध्यम से एक सूत्र में पिरो दिया। जब हजारों लोग एक मन और एक ही उद्देश्य के साथ मिलकर 'लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु' (सभी जीव सुखी हों)का पाठ करते हैं, तो यह पूरी दुनिया के कल्याण के लिए एक शक्तिशाली प्रार्थना बन जाती है।जैसे-जैसे चिन्मय मिशन अपने 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है, यह पहल वेदांत के ज्ञान को फैलाने और लोगों को दैनिक जीवन में गीता की शिक्षाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। दुनिया भर से मिली इस भारी भागीदारी ने इसे वास्तव में एक ऐतिहासिक और यादगार अवसर बना दिया है।"
इस पहल को दुनिया भर के विभिन्न सनातन धर्म संगठनों और आध्यात्मिक समुदायों का भी भरपूर समर्थन और भागीदारी मिली। इसने सांस्कृतिक जुड़ाव और आध्यात्मिक सद्भाव (Spiritual Harmony) की भावना को और अधिक मजबूती प्रदान की।
यह कार्यक्रमचिन्मय अमृत महोत्सवका एक मुख्य हिस्सा था। यह साल भर चलने वाला एक वैश्विक उत्सव है, जो आध्यात्मिकता, शिक्षा, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्रों में चिन्मय मिशन के 75 वर्षों के योगदान के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है।
