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करूर हादसे पर भावुक हुए सीएम विजय, पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल
पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल, भीड़ प्रबंधन में लापरवाही का लगाया आरोप; हादसे में जान गंवाने वालों की याद में स्मारक बनाने का किया ऐलान
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय ने करूर भगदड़ हादसे के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से इस घटना पर विस्तार से अपनी प्रतिक्रिया दी। करूर पहुंचकर आयोजित सभा में मुख्यमंत्री विजय ने हादसे को अपनी राजनीतिक यात्रा का सबसे बड़ा और सबसे गहरा घाव बताया। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी ने उन्हें व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गहरा आघात पहुंचाया है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भीड़ प्रबंधन को लेकर पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो इतने बड़े हादसे से बचा जा सकता था। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में कई तरह की चुनौतियां और कठिन परिस्थितियां सामने आती हैं, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिन्हें जीवन भर भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि करूर की घटना उनके लिए सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम में हुई दुर्घटना नहीं, बल्कि ऐसा दर्द है जिसे वे हमेशा अपने साथ लेकर चलेंगे। उन्होंने कहा कि इस हादसे में जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनमें कई बच्चे भी शामिल थे, जिनकी याद उन्हें लगातार विचलित करती है। अपने संबोधन में विजय ने कहा कि उनकी राज्यव्यापी 'पीपल्स मीट' यात्रा का उद्देश्य प्रदेश के लोगों से सीधे संवाद करना, उनकी समस्याओं को समझना और जनसंपर्क मजबूत करना था। इसी क्रम में करूर में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में प्रशासन और पुलिस के साथ लगातार समन्वय बनाया गया था ताकि कार्यक्रम सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकें।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि करूर कार्यक्रम से पहले पुलिस प्रशासन की ओर से उन्हें किसी भी प्रकार की विशेष चेतावनी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस को यह महसूस हो रहा था कि कार्यक्रम स्थल पर अत्यधिक भीड़ एकत्रित होने वाली है या सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, तो कार्यक्रम को स्थगित करने या आवश्यक बदलाव करने का सुझाव दिया जा सकता था। उनके अनुसार पुलिस के पास ऐसा करने का अधिकार भी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। विजय ने कहा कि उन्होंने पुलिस प्रशासन पर पूरा भरोसा किया था और कार्यक्रम के दौरान भी अधिकारियों का धन्यवाद किया था। उन्हें विश्वास था कि सभी व्यवस्थाएं उचित ढंग से की गई हैं। लेकिन हादसे के बाद जब पूरे घटनाक्रम की जानकारी सामने आई तो उन्हें गहरा दुख हुआ। उन्होंने कहा कि यदि भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम होते तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी। सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद क्या पर्याप्त पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों और अन्य लोगों को याद करते हुए भावुक शब्दों में कहा कि कई बच्चे उनसे मिलने और कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, लेकिन दुर्भाग्यवश वे इस दुनिया से चले गए। उन्होंने कहा कि यह क्षति उनके लिए बेहद व्यक्तिगत है और इसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। उन्होंने सभी दिवंगत लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार उनके साथ खड़ी है। इस दौरान विजय ने यह भी कहा कि हादसे के बाद उन्हें कई तरह की आलोचनाओं और आरोपों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में भी उनके ऊपर विभिन्न प्रकार के सवाल उठाए गए, जबकि उनकी प्राथमिकता केवल प्रभावित परिवारों की सहायता और स्थिति को संभालना थी। उन्होंने कहा कि किसी भी त्रासदी को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए और ऐसे संवेदनशील मामलों में सभी पक्षों को जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में एक स्मारक बनाने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि तमिलगा वेत्री कड़गम की ओर से करूर में स्मारक का निर्माण कराया जाएगा ताकि भविष्य की पीढ़ियां इस घटना को याद रख सकें और ऐसी त्रासदियों से सबक लिया जा सके। उन्होंने कहा कि स्मारक केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक नहीं होगा बल्कि यह जनसुरक्षा और जिम्मेदारी के महत्व का संदेश भी देगा। सभा के दौरान विजय ने प्रशासनिक जवाबदेही, बेहतर भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बड़े आयोजनों में सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासन और आयोजकों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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करूर हादसे पर भावुक हुए सीएम विजय, पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय ने करूर भगदड़ हादसे के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से इस घटना पर विस्तार से अपनी प्रतिक्रिया दी। करूर पहुंचकर आयोजित सभा में मुख्यमंत्री विजय ने हादसे को अपनी राजनीतिक यात्रा का सबसे बड़ा और सबसे गहरा घाव बताया। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी ने उन्हें व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गहरा आघात पहुंचाया है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भीड़ प्रबंधन को लेकर पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो इतने बड़े हादसे से बचा जा सकता था। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में कई तरह की चुनौतियां और कठिन परिस्थितियां सामने आती हैं, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिन्हें जीवन भर भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि करूर की घटना उनके लिए सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम में हुई दुर्घटना नहीं, बल्कि ऐसा दर्द है जिसे वे हमेशा अपने साथ लेकर चलेंगे। उन्होंने कहा कि इस हादसे में जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनमें कई बच्चे भी शामिल थे, जिनकी याद उन्हें लगातार विचलित करती है। अपने संबोधन में विजय ने कहा कि उनकी राज्यव्यापी 'पीपल्स मीट' यात्रा का उद्देश्य प्रदेश के लोगों से सीधे संवाद करना, उनकी समस्याओं को समझना और जनसंपर्क मजबूत करना था। इसी क्रम में करूर में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में प्रशासन और पुलिस के साथ लगातार समन्वय बनाया गया था ताकि कार्यक्रम सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकें।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि करूर कार्यक्रम से पहले पुलिस प्रशासन की ओर से उन्हें किसी भी प्रकार की विशेष चेतावनी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस को यह महसूस हो रहा था कि कार्यक्रम स्थल पर अत्यधिक भीड़ एकत्रित होने वाली है या सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, तो कार्यक्रम को स्थगित करने या आवश्यक बदलाव करने का सुझाव दिया जा सकता था। उनके अनुसार पुलिस के पास ऐसा करने का अधिकार भी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। विजय ने कहा कि उन्होंने पुलिस प्रशासन पर पूरा भरोसा किया था और कार्यक्रम के दौरान भी अधिकारियों का धन्यवाद किया था। उन्हें विश्वास था कि सभी व्यवस्थाएं उचित ढंग से की गई हैं। लेकिन हादसे के बाद जब पूरे घटनाक्रम की जानकारी सामने आई तो उन्हें गहरा दुख हुआ। उन्होंने कहा कि यदि भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम होते तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी। सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद क्या पर्याप्त पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों और अन्य लोगों को याद करते हुए भावुक शब्दों में कहा कि कई बच्चे उनसे मिलने और कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, लेकिन दुर्भाग्यवश वे इस दुनिया से चले गए। उन्होंने कहा कि यह क्षति उनके लिए बेहद व्यक्तिगत है और इसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। उन्होंने सभी दिवंगत लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार उनके साथ खड़ी है। इस दौरान विजय ने यह भी कहा कि हादसे के बाद उन्हें कई तरह की आलोचनाओं और आरोपों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में भी उनके ऊपर विभिन्न प्रकार के सवाल उठाए गए, जबकि उनकी प्राथमिकता केवल प्रभावित परिवारों की सहायता और स्थिति को संभालना थी। उन्होंने कहा कि किसी भी त्रासदी को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए और ऐसे संवेदनशील मामलों में सभी पक्षों को जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में एक स्मारक बनाने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि तमिलगा वेत्री कड़गम की ओर से करूर में स्मारक का निर्माण कराया जाएगा ताकि भविष्य की पीढ़ियां इस घटना को याद रख सकें और ऐसी त्रासदियों से सबक लिया जा सके। उन्होंने कहा कि स्मारक केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक नहीं होगा बल्कि यह जनसुरक्षा और जिम्मेदारी के महत्व का संदेश भी देगा। सभा के दौरान विजय ने प्रशासनिक जवाबदेही, बेहतर भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बड़े आयोजनों में सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासन और आयोजकों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
