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सर्जरी में इतिहास रचा:इंसानों जैसे रोबोट ने पहली बार जीवित शरीर पर किया सफल ऑपरेशन
Digital Desk
अमेरिका के वैज्ञानिकों ने टेलीऑपरेटेड ह्यूमनॉइड रोबोट से प्रीक्लिनिकल ट्रायल में सफल गॉलब्लैडर सर्जरी की, भविष्य में दूरदराज के मरीजों तक पहुंच सकती है विशेषज्ञ इलाज की सुविधा।
चिकित्सा विज्ञान लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और अब सर्जरी के क्षेत्र में एक ऐसी उपलब्धि सामने आई है, जो भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल सकती है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो (UC San Diego) के वैज्ञानिकों और सर्जनों की टीम ने पहली बार इंसानों जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट की मदद से जीवित प्राणियों पर सफल न्यूनतम इनवेसिव (Minimally Invasive) सर्जरी करने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि आधुनिक रोबोटिक सर्जरी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस शोध के परिणाम प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर में 8 जुलाई 2026 को प्रकाशित किए गए। अध्ययन का शीर्षक "In vivo feasibility study of humanoid robots in surgery" है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह पहली बार है जब किसी ह्यूमनॉइड रोबोट ने जीवित शरीर पर सर्जिकल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया है। अब तक अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले रोबोटिक सर्जरी सिस्टम किसी विशेष ऑपरेशन के लिए तैयार किए गए बड़े और महंगे उपकरण होते हैं। इन्हें संचालित करने के लिए विशेष ऑपरेशन थिएटर, अलग इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित टीम की आवश्यकता होती है। लेकिन इस नई तकनीक में वैज्ञानिकों ने सामान्य उपयोग वाले ह्यूमनॉइड रोबोट को सर्जरी के लिए तैयार किया है, जिससे भविष्य में अस्पतालों की लागत और तकनीकी जटिलता दोनों कम हो सकती हैं।
शोधकर्ताओं ने इस रोबोटिक सिस्टम को "सर्जी" (Surgie) नाम दिया है। यह रोबोट लगभग पांच फीट लंबा और करीब 60 पाउंड वजन का है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अस्पतालों में पहले से इस्तेमाल होने वाले सामान्य लैप्रोस्कोपिक उपकरणों के साथ काम कर सकता है। इसके लिए किसी विशेष सर्जिकल मशीन या महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं पड़ती। परीक्षण के दौरान अनुभवी सर्जनों ने दूर बैठकर एक विशेष टेलीऑपरेशन सिस्टम के जरिए रोबोट को नियंत्रित किया। रोबोट सर्जन के हाथों की हर गतिविधि की नकल करते हुए उसी प्रकार ऑपरेशन करता रहा। इस तकनीक का उद्देश्य यह जांचना था कि क्या मौजूदा ह्यूमनॉइड रोबोट इतनी सटीकता, नियंत्रण और सुरक्षा के साथ सर्जरी कर सकते हैं, जितनी आधुनिक रोबोटिक सिस्टम से अपेक्षित होती है।
प्रीक्लिनिकल ट्रायल के तहत दो बड़े गैर-प्राइमेट स्तनधारी जीवों पर गॉलब्लैडर निकालने की सर्जरी की गई। पहले ऑपरेशन में एक ह्यूमनॉइड रोबोट ने मानव सर्जन के साथ मिलकर काम किया, जबकि दूसरे ऑपरेशन में दो टेलीऑपरेटेड ह्यूमनॉइड रोबोट ने मिलकर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया। दोनों ही मामलों में सर्जरी सफल रही और किसी बड़ी तकनीकी विफलता की सूचना नहीं मिली।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सफलता केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वास्तविक सर्जिकल परिस्थितियों में रोबोट की क्षमता को भी साबित करती है। इस परियोजना के दौरान पहले प्रयोगशाला परीक्षण, फिर ड्राई लैब और अंत में वास्तविक ऑपरेशन जैसी कई चरणों में तकनीक का मूल्यांकन किया गया। दुनिया के कई देशों में प्रशिक्षित सर्जनों की भारी कमी है। दूरदराज के इलाकों में मरीजों को समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिल पाते, जिससे इलाज में देरी होती है। ऐसे में टेलीऑपरेटेड ह्यूमनॉइड रोबोट भविष्य में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। यदि तकनीक और विकसित होती है, तो विशेषज्ञ डॉक्टर हजारों किलोमीटर दूर बैठकर भी मरीजों की सर्जरी कर सकेंगे।
यूसी सैन डिएगो के प्रोफेसर माइकल यिप के अनुसार, इस तकनीक से केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, वहां भी भविष्य में रोबोटिक सर्जरी के जरिए मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। इस शोध का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि ह्यूमनॉइड रोबोट बिना बड़े बदलाव के सामान्य ऑपरेशन थिएटर में आसानी से काम करने में सक्षम रहे। हालांकि कुछ विशेष एडाप्टर तैयार किए गए ताकि रोबोट सामान्य सर्जिकल उपकरण पकड़ सके, लेकिन अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही विशेषता भविष्य में इस तकनीक को अधिक उपयोगी बना सकती है।
हालांकि अभी यह तकनीक पूरी तरह व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार नहीं है। ऑपरेशन के दौरान रोबोट को कई बार दोबारा कैलिब्रेट करना पड़ा, जिससे सर्जरी सामान्य रोबोटिक सिस्टम की तुलना में अधिक समय तक चली। इसके अलावा सर्जन के आदेश और रोबोट की प्रतिक्रिया के बीच कुछ तकनीकी देरी (Latency) भी देखी गई, जिसे भविष्य में बेहतर बनाने की जरूरत होगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि नियंत्रण प्रणाली, सुरक्षा, विश्वसनीयता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में और सुधार होने के बाद ही इन रोबोट्स का वास्तविक अस्पतालों में नियमित उपयोग संभव हो सकेगा।
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सर्जरी में इतिहास रचा:इंसानों जैसे रोबोट ने पहली बार जीवित शरीर पर किया सफल ऑपरेशन
Digital Desk
चिकित्सा विज्ञान लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और अब सर्जरी के क्षेत्र में एक ऐसी उपलब्धि सामने आई है, जो भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल सकती है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो (UC San Diego) के वैज्ञानिकों और सर्जनों की टीम ने पहली बार इंसानों जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट की मदद से जीवित प्राणियों पर सफल न्यूनतम इनवेसिव (Minimally Invasive) सर्जरी करने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि आधुनिक रोबोटिक सर्जरी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस शोध के परिणाम प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर में 8 जुलाई 2026 को प्रकाशित किए गए। अध्ययन का शीर्षक "In vivo feasibility study of humanoid robots in surgery" है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह पहली बार है जब किसी ह्यूमनॉइड रोबोट ने जीवित शरीर पर सर्जिकल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया है। अब तक अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले रोबोटिक सर्जरी सिस्टम किसी विशेष ऑपरेशन के लिए तैयार किए गए बड़े और महंगे उपकरण होते हैं। इन्हें संचालित करने के लिए विशेष ऑपरेशन थिएटर, अलग इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित टीम की आवश्यकता होती है। लेकिन इस नई तकनीक में वैज्ञानिकों ने सामान्य उपयोग वाले ह्यूमनॉइड रोबोट को सर्जरी के लिए तैयार किया है, जिससे भविष्य में अस्पतालों की लागत और तकनीकी जटिलता दोनों कम हो सकती हैं।
शोधकर्ताओं ने इस रोबोटिक सिस्टम को "सर्जी" (Surgie) नाम दिया है। यह रोबोट लगभग पांच फीट लंबा और करीब 60 पाउंड वजन का है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अस्पतालों में पहले से इस्तेमाल होने वाले सामान्य लैप्रोस्कोपिक उपकरणों के साथ काम कर सकता है। इसके लिए किसी विशेष सर्जिकल मशीन या महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं पड़ती। परीक्षण के दौरान अनुभवी सर्जनों ने दूर बैठकर एक विशेष टेलीऑपरेशन सिस्टम के जरिए रोबोट को नियंत्रित किया। रोबोट सर्जन के हाथों की हर गतिविधि की नकल करते हुए उसी प्रकार ऑपरेशन करता रहा। इस तकनीक का उद्देश्य यह जांचना था कि क्या मौजूदा ह्यूमनॉइड रोबोट इतनी सटीकता, नियंत्रण और सुरक्षा के साथ सर्जरी कर सकते हैं, जितनी आधुनिक रोबोटिक सिस्टम से अपेक्षित होती है।
प्रीक्लिनिकल ट्रायल के तहत दो बड़े गैर-प्राइमेट स्तनधारी जीवों पर गॉलब्लैडर निकालने की सर्जरी की गई। पहले ऑपरेशन में एक ह्यूमनॉइड रोबोट ने मानव सर्जन के साथ मिलकर काम किया, जबकि दूसरे ऑपरेशन में दो टेलीऑपरेटेड ह्यूमनॉइड रोबोट ने मिलकर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया। दोनों ही मामलों में सर्जरी सफल रही और किसी बड़ी तकनीकी विफलता की सूचना नहीं मिली।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सफलता केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वास्तविक सर्जिकल परिस्थितियों में रोबोट की क्षमता को भी साबित करती है। इस परियोजना के दौरान पहले प्रयोगशाला परीक्षण, फिर ड्राई लैब और अंत में वास्तविक ऑपरेशन जैसी कई चरणों में तकनीक का मूल्यांकन किया गया। दुनिया के कई देशों में प्रशिक्षित सर्जनों की भारी कमी है। दूरदराज के इलाकों में मरीजों को समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिल पाते, जिससे इलाज में देरी होती है। ऐसे में टेलीऑपरेटेड ह्यूमनॉइड रोबोट भविष्य में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। यदि तकनीक और विकसित होती है, तो विशेषज्ञ डॉक्टर हजारों किलोमीटर दूर बैठकर भी मरीजों की सर्जरी कर सकेंगे।
यूसी सैन डिएगो के प्रोफेसर माइकल यिप के अनुसार, इस तकनीक से केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, वहां भी भविष्य में रोबोटिक सर्जरी के जरिए मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। इस शोध का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि ह्यूमनॉइड रोबोट बिना बड़े बदलाव के सामान्य ऑपरेशन थिएटर में आसानी से काम करने में सक्षम रहे। हालांकि कुछ विशेष एडाप्टर तैयार किए गए ताकि रोबोट सामान्य सर्जिकल उपकरण पकड़ सके, लेकिन अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही विशेषता भविष्य में इस तकनीक को अधिक उपयोगी बना सकती है।
हालांकि अभी यह तकनीक पूरी तरह व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार नहीं है। ऑपरेशन के दौरान रोबोट को कई बार दोबारा कैलिब्रेट करना पड़ा, जिससे सर्जरी सामान्य रोबोटिक सिस्टम की तुलना में अधिक समय तक चली। इसके अलावा सर्जन के आदेश और रोबोट की प्रतिक्रिया के बीच कुछ तकनीकी देरी (Latency) भी देखी गई, जिसे भविष्य में बेहतर बनाने की जरूरत होगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि नियंत्रण प्रणाली, सुरक्षा, विश्वसनीयता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में और सुधार होने के बाद ही इन रोबोट्स का वास्तविक अस्पतालों में नियमित उपयोग संभव हो सकेगा।
