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भोपाल मास्टर प्लान पर दिशा बैठक में बवाल, विधायक और जनपद अध्यक्ष आमने-सामने
भोपाल,(म.प्र.)
मास्टर प्लान लागू करने को लेकर कांग्रेस विधायकों और जनपद अध्यक्ष के बीच गरमागरम बहस, भाजपा विधायक ने भी स्मार्ट सिटी परियोजना पर उठाए सवाल; सांसद ने मुख्यमंत्री से जल्द चर्चा का भरोसा दिया।
भोपाल कलेक्ट्रेट में शुक्रवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक उस समय विवादों में आ गई, जब शहर के मास्टर प्लान को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। बैठक में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, विधायक आतिफ अकील और फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के बीच हुई नोकझोंक ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की ओर उंगली उठाकर तीखी टिप्पणियां कीं और कुछ समय के लिए बैठक का माहौल पूरी तरह गरमा गया। बैठक के दौरान शहर के नए मास्टर प्लान को लागू करने में हो रही देरी और विकास कार्यों को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मास्टर प्लान की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शहर का विकास इसी तरह चलता रहा तो भोपाल का संतुलित विकास संभव नहीं हो पाएगा। उनका कहना था कि लंबे समय से मास्टर प्लान लंबित होने के कारण शहर में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आम लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
इसी बीच फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत ने चर्चा के दौरान हस्तक्षेप किया। उनके बीच में बोलने और उंगली दिखाकर अपनी बात रखने पर विधायक आरिफ मसूद नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि वह सांसद से चर्चा कर रहे हैं और बीच में इस तरह बोलना उचित नहीं है। मसूद ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा मास्टर प्लान किस काम का है, जो वर्षों बाद भी लागू नहीं हो पा रहा। इस पर प्रमोद सिंह राजपूत ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक को "औकात में रहकर बात करने" की नसीहत दी। दोनों नेताओं के बीच करीब दस मिनट तक तीखी बहस चलती रही। बैठक में मौजूद अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी माहौल शांत कराने का प्रयास करते रहे, लेकिन कुछ समय तक दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर अड़े रहे।
विवाद के दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वह केवल सांसद से संवाद कर रहे थे और जनपद अध्यक्ष का इस तरह बीच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्यशैली से गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा प्रभावित होती है। विधायक आतिफ अकील भी इस मुद्दे पर मसूद के समर्थन में दिखाई दिए। बाद में दोनों विधायक बैठक से उठकर बाहर चले गए। बैठक में केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर भी कई जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस योजना के नाम पर भोपाल की मूलभूत व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि शहर में बड़ी-बड़ी इमारतें तो बना दी गईं, लेकिन उनमें आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। कई स्थानों पर लिफ्ट खराब रहती हैं, सामुदायिक भवनों की कमी है और सार्वजनिक स्थानों के विकास पर भी अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी क्षेत्र में बड़े व्यावसायिक प्लॉटों को छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाए, ताकि अधिक निवेशक आगे आएं और परियोजना की आय बढ़ सके। उनका मानना था कि वर्तमान स्वरूप में बड़े प्लॉटों की बिक्री नहीं हो पा रही है, जिससे परियोजना की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।
दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि इस तरह की समस्याएं उठा रहे हैं तो निश्चित रूप से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए। बैठक में भोपाल की महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर में स्मार्ट सिटी के तहत लगाई गई कई स्ट्रीट लाइटें समय पर ठीक नहीं हो पातीं, जिससे नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता बताई। स्मार्ट सिटी बोर्ड के चेयरमैन एवं कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बैठक में भरोसा दिलाया कि सभी शिकायतों और समस्याओं की अलग-अलग समीक्षा कर उनका समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल के सुनियोजित और दीर्घकालिक विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह करेंगे। सांसद ने यह भी कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। इसी कारण कई विकास कार्यों में टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाई जाए, जो सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर सके। बैठक के दौरान भोपाल की झीलों और जलाशयों के संरक्षण के लिए "भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण" गठित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। प्रस्ताव में संभागायुक्त को इसका अध्यक्ष बनाने तथा भोपाल और सीहोर के कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को सदस्य बनाने की सिफारिश की गई। इस प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी रखी गई।
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भोपाल मास्टर प्लान पर दिशा बैठक में बवाल, विधायक और जनपद अध्यक्ष आमने-सामने
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल कलेक्ट्रेट में शुक्रवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक उस समय विवादों में आ गई, जब शहर के मास्टर प्लान को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। बैठक में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, विधायक आतिफ अकील और फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के बीच हुई नोकझोंक ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की ओर उंगली उठाकर तीखी टिप्पणियां कीं और कुछ समय के लिए बैठक का माहौल पूरी तरह गरमा गया। बैठक के दौरान शहर के नए मास्टर प्लान को लागू करने में हो रही देरी और विकास कार्यों को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मास्टर प्लान की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शहर का विकास इसी तरह चलता रहा तो भोपाल का संतुलित विकास संभव नहीं हो पाएगा। उनका कहना था कि लंबे समय से मास्टर प्लान लंबित होने के कारण शहर में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आम लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
इसी बीच फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत ने चर्चा के दौरान हस्तक्षेप किया। उनके बीच में बोलने और उंगली दिखाकर अपनी बात रखने पर विधायक आरिफ मसूद नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि वह सांसद से चर्चा कर रहे हैं और बीच में इस तरह बोलना उचित नहीं है। मसूद ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा मास्टर प्लान किस काम का है, जो वर्षों बाद भी लागू नहीं हो पा रहा। इस पर प्रमोद सिंह राजपूत ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक को "औकात में रहकर बात करने" की नसीहत दी। दोनों नेताओं के बीच करीब दस मिनट तक तीखी बहस चलती रही। बैठक में मौजूद अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी माहौल शांत कराने का प्रयास करते रहे, लेकिन कुछ समय तक दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर अड़े रहे।
विवाद के दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वह केवल सांसद से संवाद कर रहे थे और जनपद अध्यक्ष का इस तरह बीच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्यशैली से गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा प्रभावित होती है। विधायक आतिफ अकील भी इस मुद्दे पर मसूद के समर्थन में दिखाई दिए। बाद में दोनों विधायक बैठक से उठकर बाहर चले गए। बैठक में केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर भी कई जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस योजना के नाम पर भोपाल की मूलभूत व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि शहर में बड़ी-बड़ी इमारतें तो बना दी गईं, लेकिन उनमें आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। कई स्थानों पर लिफ्ट खराब रहती हैं, सामुदायिक भवनों की कमी है और सार्वजनिक स्थानों के विकास पर भी अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी क्षेत्र में बड़े व्यावसायिक प्लॉटों को छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाए, ताकि अधिक निवेशक आगे आएं और परियोजना की आय बढ़ सके। उनका मानना था कि वर्तमान स्वरूप में बड़े प्लॉटों की बिक्री नहीं हो पा रही है, जिससे परियोजना की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।
दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि इस तरह की समस्याएं उठा रहे हैं तो निश्चित रूप से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए। बैठक में भोपाल की महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर में स्मार्ट सिटी के तहत लगाई गई कई स्ट्रीट लाइटें समय पर ठीक नहीं हो पातीं, जिससे नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता बताई। स्मार्ट सिटी बोर्ड के चेयरमैन एवं कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बैठक में भरोसा दिलाया कि सभी शिकायतों और समस्याओं की अलग-अलग समीक्षा कर उनका समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल के सुनियोजित और दीर्घकालिक विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह करेंगे। सांसद ने यह भी कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। इसी कारण कई विकास कार्यों में टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाई जाए, जो सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर सके। बैठक के दौरान भोपाल की झीलों और जलाशयों के संरक्षण के लिए "भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण" गठित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। प्रस्ताव में संभागायुक्त को इसका अध्यक्ष बनाने तथा भोपाल और सीहोर के कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को सदस्य बनाने की सिफारिश की गई। इस प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी रखी गई।
