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भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर अमेरिका का बड़ा सम्मान, 15 अगस्त बना 'इंडिया डे'
Digital Desk
गवर्नर मौरा हीली और बोस्टन मेयर मिशेल वू ने भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर किया ऐलान, भारतीय-अमेरिकियों की उपलब्धियों को सराहा
अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य ने भारत और भारतीय समुदाय के सम्मान में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य की गवर्नर मौरा हीली ने आधिकारिक रूप से 15 अगस्त को "इंडिया डे" घोषित करने की घोषणा की है। यह फैसला भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लिया गया है। इसके साथ ही बोस्टन शहर की मेयर मिशेल वू ने भी 15 अगस्त को "इंडिया डे" घोषित करते हुए भारतीय मूल के लोगों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक योगदान को विशेष सम्मान दिया है।
यह घोषणा केवल एक औपचारिक सम्मान नहीं मानी जा रही, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों का भी प्रतीक है। खास बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय आया है जब बोस्टन में भारत के नए महावाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट जनरल) का औपचारिक उद्घाटन भी किया गया है। इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक नई उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
मैसाचुसेट्स सरकार की ओर से जारी आधिकारिक घोषणा में भारत को विविध संस्कृतियों, भाषाओं, परंपराओं और धर्मों से समृद्ध एक महान सभ्यता बताया गया है। साथ ही कहा गया कि 15 अगस्त 1947 केवल भारत की आजादी का दिन नहीं था, बल्कि उसी दिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नींव भी रखी गई थी।
गवर्नर मौरा हीली ने अपने संदेश में कहा कि भारत का लोकतांत्रिक सफर पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने भारतीय समुदाय की मेहनत, प्रतिभा और समाज के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय-अमेरिकी नागरिक मैसाचुसेट्स के विकास में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
बोस्टन की मेयर मिशेल वू ने भी अपने संदेश में भारतीय समुदाय की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, व्यवसाय, शोध और सार्वजनिक सेवा जैसे क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोगों ने उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनकी उपलब्धियों ने न केवल बोस्टन बल्कि पूरे राज्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को नई दिशा दी है।
मैसाचुसेट्स अमेरिका के उन प्रमुख राज्यों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। यहां हजारों भारतीय छात्र, वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और उद्यमी कार्यरत हैं। राज्य के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और तकनीकी कंपनियों में भारतीय प्रतिभाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी है।
"इंडिया डे" घोषित करने का फैसला भारतीय समुदाय के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती देगा। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, शिक्षा, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है।
भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले एक दशक में नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, वैश्विक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ऐसे में भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक सेतु की भूमिका निभा रहा है।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय आज अमेरिका के सबसे प्रभावशाली प्रवासी समुदायों में गिना जाता है। चिकित्सा, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, शिक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान और सार्वजनिक प्रशासन जैसे क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोगों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों के शीर्ष पदों पर भारतीय मूल के अधिकारी कार्य कर रहे हैं, जबकि राजनीति में भी उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
मैसाचुसेट्स की घोषणा में विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च शिक्षा, बायोटेक्नोलॉजी, नवाचार और उद्यमिता में भारतीयों की भूमिका का उल्लेख किया गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी भारतीय मूल के डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था, जिसकी व्यापक सराहना हुई थी।
बोस्टन में भारतीय महावाणिज्य दूतावास की शुरुआत भी इस अवसर को और खास बना रही है। नए कॉन्सुलेट के खुलने से न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों और छात्रों को वीजा, पासपोर्ट, कांसुलर सेवाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़ी सुविधाएं अधिक आसानी से मिल सकेंगी।
भारत के स्वतंत्रता दिवस को "इंडिया डे" के रूप में मनाने का निर्णय भारतीय संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रवासी भारतीयों की उपलब्धियों को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह फैसला आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने के साथ-साथ दोनों देशों के नागरिकों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को भी नई ऊर्जा देगा।
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भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर अमेरिका का बड़ा सम्मान, 15 अगस्त बना 'इंडिया डे'
Digital Desk
अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य ने भारत और भारतीय समुदाय के सम्मान में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य की गवर्नर मौरा हीली ने आधिकारिक रूप से 15 अगस्त को "इंडिया डे" घोषित करने की घोषणा की है। यह फैसला भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लिया गया है। इसके साथ ही बोस्टन शहर की मेयर मिशेल वू ने भी 15 अगस्त को "इंडिया डे" घोषित करते हुए भारतीय मूल के लोगों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक योगदान को विशेष सम्मान दिया है।
यह घोषणा केवल एक औपचारिक सम्मान नहीं मानी जा रही, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों का भी प्रतीक है। खास बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय आया है जब बोस्टन में भारत के नए महावाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट जनरल) का औपचारिक उद्घाटन भी किया गया है। इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक नई उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
मैसाचुसेट्स सरकार की ओर से जारी आधिकारिक घोषणा में भारत को विविध संस्कृतियों, भाषाओं, परंपराओं और धर्मों से समृद्ध एक महान सभ्यता बताया गया है। साथ ही कहा गया कि 15 अगस्त 1947 केवल भारत की आजादी का दिन नहीं था, बल्कि उसी दिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नींव भी रखी गई थी।
गवर्नर मौरा हीली ने अपने संदेश में कहा कि भारत का लोकतांत्रिक सफर पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने भारतीय समुदाय की मेहनत, प्रतिभा और समाज के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय-अमेरिकी नागरिक मैसाचुसेट्स के विकास में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
बोस्टन की मेयर मिशेल वू ने भी अपने संदेश में भारतीय समुदाय की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, व्यवसाय, शोध और सार्वजनिक सेवा जैसे क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोगों ने उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनकी उपलब्धियों ने न केवल बोस्टन बल्कि पूरे राज्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को नई दिशा दी है।
मैसाचुसेट्स अमेरिका के उन प्रमुख राज्यों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। यहां हजारों भारतीय छात्र, वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और उद्यमी कार्यरत हैं। राज्य के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और तकनीकी कंपनियों में भारतीय प्रतिभाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी है।
"इंडिया डे" घोषित करने का फैसला भारतीय समुदाय के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती देगा। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, शिक्षा, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है।
भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले एक दशक में नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, वैश्विक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ऐसे में भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक सेतु की भूमिका निभा रहा है।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय आज अमेरिका के सबसे प्रभावशाली प्रवासी समुदायों में गिना जाता है। चिकित्सा, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, शिक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान और सार्वजनिक प्रशासन जैसे क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोगों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों के शीर्ष पदों पर भारतीय मूल के अधिकारी कार्य कर रहे हैं, जबकि राजनीति में भी उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
मैसाचुसेट्स की घोषणा में विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च शिक्षा, बायोटेक्नोलॉजी, नवाचार और उद्यमिता में भारतीयों की भूमिका का उल्लेख किया गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी भारतीय मूल के डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था, जिसकी व्यापक सराहना हुई थी।
बोस्टन में भारतीय महावाणिज्य दूतावास की शुरुआत भी इस अवसर को और खास बना रही है। नए कॉन्सुलेट के खुलने से न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों और छात्रों को वीजा, पासपोर्ट, कांसुलर सेवाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़ी सुविधाएं अधिक आसानी से मिल सकेंगी।
भारत के स्वतंत्रता दिवस को "इंडिया डे" के रूप में मनाने का निर्णय भारतीय संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रवासी भारतीयों की उपलब्धियों को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह फैसला आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने के साथ-साथ दोनों देशों के नागरिकों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को भी नई ऊर्जा देगा।
