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तेहरान में तबाही, 1300 से अधिक लोगों की मौत, दुनिया की निगाहें युद्ध पर
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों को 14 दिन हो चुके हैं और इस दौरान हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में बमबारी से भारी तबाही हुई है। अब तक 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल बताए जा रहे हैं।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर सैन्य हमला शुरू किया। शुरुआती हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत हो गई। माना जा रहा था कि नेतृत्व खत्म होने के बाद ईरान की सरकार कमजोर पड़ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।इसके बाद संघर्ष और बढ़ गया और अब यह युद्ध पूरे क्षेत्र में फैलता दिखाई दे रहा है।
तेहरान और अल्बोर्ज प्रांत में कई तेल भंडारण केंद्र और तेल ट्रांसफर स्टेशन पर बमबारी की गई। इससे शहर में घना धुआं फैल गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि जलते तेल के कारण वातावरण में जहरीले तत्व फैल रहे हैं और बारिश के साथ प्रदूषित पानी गिर सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 10,000 नागरिक ठिकानों पर हमले हुए हैं। अब तक 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।सबसे दर्दनाक घटना पहले ही दिन हुई, जब दक्षिणी शहर मीनाब के एक लड़कियों के स्कूल पर हमला हुआ। इस हमले में 160 छात्राओं और शिक्षकों की मौत हो गई।
लाखों लोग घर छोड़ने को मजबूर
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हमले शुरू होने के बाद पहले दो दिनों में ही लगभग एक लाख लोग तेहरान छोड़कर सुरक्षित जगहों की ओर चले गए। कई शहरों में लोग घरों में ही छिपे हुए हैं और सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
हमले के बाद अयातुल्ला ख़ामेनेई के बेटे मोजतबा ख़ामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और कई वरिष्ठ नेताओं ने उनका समर्थन किया है। इससे संकेत मिलते हैं कि ईरान युद्ध जारी रखने के लिए तैयार है।
यह संघर्ष अब केवल ईरान तक सीमित नहीं रहा। ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात में भी सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए हैं।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार साइप्रस में ब्रिटेन के सैन्य ठिकाने पर भी हमला हुआ। वहीं लेबनान में इज़राइल की जमीनी कार्रवाई के बाद लगभग 8 लाख लोग विस्थापित हो गए हैं।
तेल आपूर्ति पर असर
ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है। यह रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
दुनिया की प्रतिक्रिया
रूस और चीन ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है। कई देशों ने युद्ध को रोकने और बातचीत से समाधान निकालने की अपील की है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में चार संभावित स्थितियां बन सकती हैं:
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मध्यस्थता के जरिए युद्धविराम
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लंबा और थकाऊ युद्ध
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जमीनी लड़ाई और बड़े सैन्य अभियान
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ऐसा बड़ा टकराव जो वैश्विक स्तर पर गंभीर संकट पैदा कर सकता है
सामान्य लोगों पर सबसे ज्यादा असर
युद्ध का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। तेहरान के लोग लगातार बमबारी के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। कई परिवार हर समय सुरक्षित जगहों पर जाने की तैयारी में रहते हैं।
फिलहाल दुनिया की निगाहें इस संघर्ष पर टिकी हुई हैं और सभी को उम्मीद है कि जल्द ही शांति का रास्ता निकलेगा।
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