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ईरान की अमेरिका को बड़ी धमकी, अमेरिका से जुड़े तेल ठिकानों को राख में बदल देंगे!
अंतर्राष्ट्रीय न्यूज
मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। तेल ठिकानों पर हमले जारी रहे तो अमेरिकी ऊर्जा सुविधाओं को नष्ट करने की धमकी, होर्मुज नाकाबंदी से वैश्विक तेल संकट गहराया।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब लगातार गहराता जा रहा है। पिछले लगभग पंद्रह दिनों से चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान ने साफ कहा है कि यदि उसके तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहे तो वह अमेरिका से जुड़ी तेल और ऊर्जा सुविधाओं को पूरी तरह तबाह कर देगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि इस संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
युद्ध के बढ़ते दायरे से वैश्विक चिंता
मध्य-पूर्व में शुरू हुआ यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। दो सप्ताह से अधिक समय से जारी हमलों और जवाबी कार्रवाई ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। खासकर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका लगातार जताई जा रही है।
ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी
ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अगर उनके तेल प्रतिष्ठानों पर किसी भी प्रकार का हमला जारी रहता है तो वे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कंपनियों से जुड़ी ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाएंगे। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाई के बाद ये प्रतिष्ठान पूरी तरह नष्ट हो सकते हैं। इस चेतावनी ने पहले से ही संवेदनशील स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव
ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी रणनीतिक पकड़ बनाए रखेगा। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने हाल ही में जारी बयान में कहा कि वे अपने पिता सैय्यद अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज क्षेत्र में नाकाबंदी जारी रहेगी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
दुनिया के तेल व्यापार पर बड़ा असर
विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से बढ़ा सकती है। वर्तमान हालात में भी तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।
भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है प्रभाव
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट और लंबा खिंचता है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में दुनिया के कई देश इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने की जरूरत महसूस कर रहे हैं।
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