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एस्टोनिया के रक्षा मंत्री ने ₹770 करोड़ के गोला-बारूद सौदे पर दिया इस्तीफा
Digital Desk
एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हैनो पेवकुर ने यूक्रेन के लिए €70 मिलियन के गोला-बारूद सौदे पर ऑडिट आपत्तियों के बीच इस्तीफा दिया।
एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हैनो पेवकुर ने यूक्रेन के लिए 155 मिमी तोपों के गोले खरीदने से जुड़े €70 मिलियन (करीब ₹770 करोड़) के विवादित सौदे को लेकर इस्तीफा दे दिया है। पेवकुर ने 2 सितंबर को राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की घोषणा की। यह मामला एस्टोनिया के राष्ट्रीय लेखा परीक्षा कार्यालय की उन आपत्तियों के बाद सामने आया, जिनमें रक्षा क्षेत्र की खरीद प्रक्रिया और वित्तीय नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
विवाद का केंद्र Datasel S.R.L. नाम की इटली में पंजीकृत कंपनी है, जिसका स्वामित्व भारतीय रक्षा निर्माता Neco Defence Munitions के पास है। यूक्रेन को 155 मिमी तोपों के गोले उपलब्ध कराने के लिए किए गए इस सौदे में भुगतान पहले कर दिया गया था, लेकिन डिलीवरी में देरी हुई और बाद में पहुंची सामग्री की गुणवत्ता तथा पूर्णता को लेकर एस्टोनियाई अधिकारियों ने आपत्ति जताई।
यह खरीद यूरोपीय संघ के European Peace Facility (EPF) के जरिए वित्तपोषित थी। कंपनी ने एस्टोनिया के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि वह अनुबंध पूरा करने में सक्षम थी।
पेवकुर ने ली राजनीतिक जिम्मेदारी
पेवकुर ने कहा कि उनका इस्तीफा अनुबंधों पर व्यक्तिगत बातचीत में उनकी भूमिका के कारण नहीं, बल्कि रक्षा मंत्रालय की व्यापक राजनीतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए है।
उन्होंने तर्क दिया कि कोई रक्षा मंत्री मंत्रालय की हर खरीद प्रक्रिया को व्यक्तिगत रूप से नहीं संभाल सकता, लेकिन रक्षा क्षेत्र के कामकाज की अंतिम राजनीतिक जिम्मेदारी मंत्री की होती है।
पेवकुर 2022 से रक्षा मंत्री के पद पर थे। उनके इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री क्रिस्टेन मिखाल ने नए रक्षा मंत्री की तलाश की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस्तीफे से पहले राष्ट्रीय लेखा परीक्षा कार्यालय की रिपोर्ट के बाद सरकार और विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया था।
€70 मिलियन के सौदे पर सवाल
गोला-बारूद की खरीद का अनुबंध 2024 में उस समय किया गया था जब यूरोपीय देश यूक्रेन की बढ़ती सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए तोपखाने के गोले की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे।
एस्टोनिया के Centre for Defence Investments (RKIK) ने Datasel को गोला-बारूद की खरीद के लिए करीब €70 मिलियन की अग्रिम राशि दी थी।
रिपोर्टों के अनुसार, अनुबंध किए जाने के समय कंपनी के पास तोपखाने के गोले बेचने का स्थापित ट्रैक रिकॉर्ड नहीं था। इसके बाद डिलीवरी में देरी हुई और अपेक्षित समयसीमा के मुताबिक सामग्री उपलब्ध नहीं हो सकी।
राष्ट्रीय लेखा परीक्षा कार्यालय ने चेतावनी दी है कि यदि अग्रिम भुगतान की राशि वापस नहीं मिलती है तो एस्टोनिया को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
गोला-बारूद की गुणवत्ता पर विवाद
विवाद तब और बढ़ गया जब गोला-बारूद की डिलीवरी शुरू हुई। एस्टोनियाई अधिकारियों ने सामग्री की गुणवत्ता और उसकी पूर्णता पर सवाल उठाए।
पेवकुर ने ERR से बातचीत में कहा था कि गोला-बारूद को पूरी तरह अनुपयोगी बताना सही नहीं होगा, लेकिन उन्होंने माना कि इसकी गुणवत्ता पर्याप्त नहीं थी और सामग्री अधूरी थी।
इसके बाद एस्टोनिया ने संबंधित अनुबंध समाप्त कर दिए। वित्तीय विवाद अब मध्यस्थता की प्रक्रिया की ओर बढ़ गया है।
इस घटनाक्रम ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि इतनी बड़ी अग्रिम राशि देने से पहले आपूर्तिकर्ता और उसके उत्पादन एवं आपूर्ति रिकॉर्ड का मूल्यांकन किस तरह किया गया था।
भारतीय कंपनी ने आरोप नकारे
विवाद में शामिल कंपनी ने एस्टोनिया के दावों को स्वीकार नहीं किया है। ERR के अनुसार, भारतीय स्वामित्व वाली कंपनी का कहना है कि उसने अनुबंधित गोला-बारूद का बड़ा हिस्सा उपलब्ध करा दिया था।
कंपनी का दावा है कि यदि एस्टोनिया ने समझौता समाप्त नहीं किया होता तो वह अपनी बाकी जिम्मेदारियां भी पूरी कर सकती थी।
इसलिए इस पूरे मामले में कंपनी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अभी स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। अनुबंध समाप्त करने के एस्टोनिया के आधार को कंपनी चुनौती दे रही है और मामला कानूनी एवं व्यावसायिक विवाद के रूप में जारी है।
इस मामले में भारतीय कनेक्शन Neco Defence Munitions के Datasel में स्वामित्व से जुड़ा है। Datasel ही वह इटली में पंजीकृत कंपनी है जिसने एस्टोनिया के साथ अनुबंध किया था।
EU फंडिंग से बढ़ी चिंता
सौदे का वित्तपोषण यूरोपीय संघ के European Peace Facility से किया गया था। यह फंड यूक्रेन की सैन्य जरूरतों और सदस्य देशों के माध्यम से सैन्य सहायता उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।
इस कारण विवाद का असर केवल एस्टोनिया के राष्ट्रीय रक्षा बजट तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि अग्रिम भुगतान की रकम वापस नहीं मिलती है तो EPF के जरिए मिली धनराशि के संबंध में एस्टोनिया की क्या जिम्मेदारी होगी।
यूरोपीय आयोग की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ऐसी स्थिति में एस्टोनिया को फंड वापस करना पड़ेगा या नहीं।
यदि भुगतान की वसूली नहीं होती है तो संभावित नुकसान का बोझ एस्टोनिया के राष्ट्रीय बजट पर भी पड़ सकता है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एस्टोनिया ने अपनी रक्षा तैयारियों और रक्षा खर्च में वृद्धि की है।
ऑडिट में खुली खरीद की खामियां
गोला-बारूद सौदे का विवाद एस्टोनिया के रक्षा क्षेत्र में वित्तीय प्रबंधन और खरीद प्रक्रियाओं को लेकर व्यापक सवालों के बीच सामने आया।
राष्ट्रीय लेखा परीक्षा कार्यालय ने रक्षा मंत्रालय, एस्टोनियाई रक्षा बलों और RKIK की गतिविधियों की जांच की। ऑडिट से जुड़े अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि संगठन यह सुनिश्चित नहीं कर सका कि €70 मिलियन का अनुबंध ऑडिटरों को उपलब्ध कराया जाए, जबकि इसके लिए बार-बार अनुरोध किए गए थे।
विपक्षी दलों ने पेवकुर के इस्तीफे की मांग की थी। इससे मंत्री पर राजनीतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने का दबाव और बढ़ गया।
ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए मुद्दों को लेकर आपराधिक जांच भी शुरू की गई है। इससे मामले की कानूनी गंभीरता और बढ़ गई है।
यूक्रेन समर्थन की भी परीक्षा
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब एस्टोनिया खुद को यूक्रेन के प्रमुख यूरोपीय समर्थकों में शामिल करता रहा है।
मूल सौदे का उद्देश्य यूक्रेन की लगातार बनी हुई तोपखाने के गोला-बारूद की जरूरत को पूरा करना था। लेकिन अनुबंध में देरी और गुणवत्ता विवाद ने युद्धकालीन परिस्थितियों में तेजी से सैन्य सामग्री खरीदने की कोशिश कर रही सरकारों के सामने मौजूद जोखिमों को उजागर किया है।
एस्टोनिया के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं अग्रिम भुगतान की रकम की वसूली, कंपनी के साथ अनुबंध विवाद का समाधान और रक्षा खरीद व्यवस्था में निगरानी को मजबूत करना हैं।
भारतीय रक्षा उद्योग के लिए भी इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि आपूर्तिकर्ता कंपनी का स्वामित्व Neco Defence Munitions के पास है। हालांकि, कंपनी का अलग पक्ष सामने आने के कारण पूरे वाणिज्यिक और कानूनी विवाद का अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं निकला है।
पेवकुर का इस्तीफा इस राजनीतिक विवाद के एक अध्याय को समाप्त करता है, लेकिन €70 मिलियन के सौदे से जुड़े वित्तीय नुकसान, कानूनी विवाद और रक्षा खरीद प्रक्रिया पर उठे सवाल अभी अनसुलझे हैं।
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