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Gentrification क्या है? नए कैफे-टेक हब से शहर का विकास या पुराने बाशिंदों का विस्थापन?
Priyanka Mathur
किसी पुराने या कम किराए वाले इलाके में निवेश और नए कारोबार आने से सुविधाएं बढ़ सकती हैं, लेकिन महंगे किराए और बदलती अर्थव्यवस्था स्थानीय लोगों के लिए मुश्किल भी खड़ी कर सकती है।
किसी पुराने इलाके में नए कैफे, को-वर्किंग स्पेस और टेक कंपनियां आने लगें तो यह शहर के विकास का संकेत लग सकता है। कारोबार बढ़ता है, नई सुविधाएं आती हैं और इलाके की पहचान बदलने लगती है। लेकिन बढ़ती मांग के साथ मकानों और दुकानों के किराए भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में वर्षों से वहां रहने वाले परिवारों और छोटे कारोबारियों के लिए उसी इलाके में रहना या कारोबार जारी रखना मुश्किल हो सकता है। इसी बदलाव को gentrification कहा जाता है। आसान भाषा में, जब किसी पुराने या कम महंगे इलाके में नया निवेश और अधिक आय वाले लोग आते हैं और इसके साथ संपत्ति की कीमत, किराया तथा सामाजिक ढांचा बदलने लगता है, तो उसे gentrification कहा जाता है।
Gentrification की शुरुआत कैसे होती है?
किसी पुराने बाजार, बेहतर कनेक्टिविटी या कलाकारों और युवा पेशेवरों की मौजूदगी से किसी इलाके की लोकप्रियता बढ़ सकती है। इसके बाद कैफे, रेस्तरां, जिम, को-वर्किंग स्पेस और नए ऑफिस खुलने लगते हैं। समस्या तब पैदा होती है जब इलाके का आर्थिक बदलाव वहां रहने वाले पुराने समुदाय की आय से कहीं तेज हो जाता है।
विकास का फायदा, लेकिन किस कीमत पर?
नए निवेश से जर्जर इमारतों का इस्तेमाल, रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार हो सकता है। स्थानीय दुकानदारों को नए ग्राहकों का फायदा भी मिल सकता है। दूसरी ओर, बढ़ते किराए से पुराने किरायेदार और छोटे कारोबारी प्रभावित हो सकते हैं। किसी दुकान का किराया बढ़ने पर लंबे समय से चल रही स्थानीय दुकान को बंद करना या दूसरे इलाके में जाना पड़ सकता है।
सिर्फ किराया नहीं, संस्कृति भी बदलती है
Gentrification का असर इलाके की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान पर भी पड़ सकता है। स्थानीय दुकानों और पारंपरिक बाजारों की जगह ऐसे कारोबार ले सकते हैं जो नए और अधिक खर्च करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर चलाए जाते हैं। हालांकि हर नया कैफे या कारोबार स्थानीय संस्कृति के लिए खतरा नहीं है। कई जगह पुराने और नए समुदाय मिलकर इलाके की नई पहचान बनाते हैं। सवाल यह है कि बदलाव के बाद पुराने समुदाय की जगह और भागीदारी कितनी बनी रहती है।
हर बदलाव gentrification नहीं
सिर्फ नए कारोबार खुलना या प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ना gentrification नहीं कहलाता। आमतौर पर इसमें आर्थिक निवेश बढ़ने के साथ अधिक आय वाले नए लोगों का आना और पुराने या कम आय वाले निवासियों पर बढ़ता दबाव शामिल होता है। इसलिए शहरी विकास के साथ किफायती आवास, छोटे कारोबारों की सुरक्षा और स्थानीय लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। किसी शहर की तरक्की केवल नई इमारतों और महंगे इलाकों से नहीं, बल्कि इस बात से भी मापी जानी चाहिए कि पुराने निवासी उस बदलते शहर में अपनी जगह बनाए रख पाते हैं या नहीं।
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