गाजा शांति योजना: कुश्नर बोले, 30 दिन में शुरू हो सकता है हमास का निरस्त्रीकरण

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गाजा शांति योजना के तहत कुश्नर ने 30 दिनों में हमास के निरस्त्रीकरण की दिशा में प्रगति की उम्मीद जताई, लेकिन इजरायल-हमास मतभेद कायम हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत जेरेड कुश्नर ने कहा है कि हमास के निरस्त्रीकरण और गाजा शांति योजना के अगले चरण पर 30 दिनों के भीतर प्रगति शुरू हो सकती है। हालांकि, इजरायल और हमास के बीच हथियार सौंपने, इजरायली सैनिकों की वापसी और गाजा के पुनर्निर्माण के क्रम को लेकर मतभेद अभी कायम हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत जेरेड कुश्नर ने 17 अगस्त को कहा कि हमास के निरस्त्रीकरण की दिशा में शुरुआती कदम अगले 30 दिनों में शुरू हो सकते हैं। कुश्नर ने यह बयान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से यरुशलम में मुलाकात के बाद दिया। इससे एक दिन पहले उन्होंने मिस्र में हमास के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की थी।

कुश्नर ने फॉक्स न्यूज से कहा कि 30 दिनों के भीतर कुछ हथियार हटाने और हमास की सुरंगों को बंद करने की दिशा में काम शुरू हो सकता है। हालांकि, उनकी क्षेत्रीय कूटनीतिक कोशिशें किसी अंतिम समझौते तक नहीं पहुंच सकीं।

कुश्नर ने बताई समयसीमा

कुश्नर की 30 दिन वाली समयसीमा अमेरिकी प्रशासन की उस कोशिश का हिस्सा है, जिसके तहत गाजा शांति योजना को राजनीतिक सहमति से आगे बढ़ाकर जमीन पर लागू करने की कोशिश की जा रही है।

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अमेरिकी प्रस्ताव में हमास के निरस्त्रीकरण को इजरायली सैन्य वापसी और गाजा के पुनर्निर्माण से जोड़ा गया है। लेकिन दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हैं कि इन कदमों को किस क्रम में लागू किया जाए।

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इजरायल की शर्त स्पष्ट

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि हमास के पूरी तरह निरस्त्रीकरण से पहले इजरायल गाजा से अपनी सेना नहीं हटाएगा।

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कुश्नर और नेतन्याहू की बातचीत के बाद एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि गाजा में सैन्य पुनर्विन्यास या पुनर्निर्माण हमास के पूरे क्षेत्र में निरस्त्रीकरण से पहले नहीं होगा। प्रस्तावित व्यवस्था में एक अमेरिकी जनरल हथियारों के निष्क्रियकरण की निगरानी कर सकता है।

अमेरिकी जनरल करेगा निगरानी

प्रस्तावित व्यवस्था में हमास द्वारा सौंपे जाने वाले हथियारों के स्थायी निष्क्रियकरण की निगरानी के लिए अमेरिकी सैन्य अधिकारी की भूमिका तय करने पर चर्चा हुई है।

गाजा के लिए प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल को भी सुरक्षा और हथियारों के निष्क्रियकरण की प्रक्रिया में भूमिका मिल सकती है। अमेरिकी मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को इस बल के कमांडर के तौर पर नामित किया गया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य हथियारों को केवल जमा कराने के बजाय उन्हें स्थायी रूप से इस्तेमाल के लायक नहीं रहने देना है।

हमास पर बढ़ा दबाव

कुश्नर ने मिस्र में हमास नेता खलील अल-हय्या और अन्य प्रतिनिधियों से बातचीत की। रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत का मुख्य उद्देश्य हमास से निरस्त्रीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाने की प्रतिबद्धता हासिल करना था।

हमास ने अमेरिकी योजना के व्यापक ढांचे के प्रति प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन वह इजरायली सैन्य वापसी और स्थायी युद्धविराम सहित अन्य शर्तों पर भी जोर देता रहा है। हमास के लिए हथियारों का मुद्दा गाजा के भविष्य के शासन और व्यापक राजनीतिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।

पुनर्निर्माण भी जुड़ा

गाजा के पुनर्निर्माण को भी प्रस्तावित शांति व्यवस्था से जोड़ा गया है। अमेरिकी योजना में सैन्य गतिविधियों को कम करने, हमास के हथियारों को निष्क्रिय करने और गाजा में एक नई नागरिक प्रशासन व्यवस्था स्थापित करने की परिकल्पना है।

इजरायल का रुख है कि पुनर्निर्माण से पहले सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी होनी चाहिए। वहीं, हमास और उसके समर्थक पक्ष इजरायली सैन्य वापसी और गाजा में हमलों को रोकने को प्रक्रिया का अहम हिस्सा मानते हैं।

बातचीत में नहीं निकला रास्ता

कुश्नर की दो दिन की कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद इजरायल और हमास के बीच मुख्य मतभेद दूर नहीं हुए। इजरायल पूर्ण निरस्त्रीकरण पर जोर दे रहा है, जबकि हमास योजना के विभिन्न हिस्सों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मांग कर रहा है।

कुश्नर की नेतन्याहू से बातचीत को सकारात्मक बताया गया, लेकिन इजरायल ने अमेरिकी प्रस्ताव के लिए कोई अंतिम प्रतिबद्धता नहीं दी। दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

नेतन्याहू पर घरेलू दबाव

नेतन्याहू को गाजा नीति पर घरेलू राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनकी सरकार के कट्टरपंथी सहयोगी हमास को लेकर किसी भी रियायत का विरोध कर रहे हैं।

दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन शांति योजना को आगे बढ़ाने के लिए इजरायल और हमास दोनों से व्यावहारिक कदम उठाने की मांग कर रहा है। इसी वजह से अमेरिकी मध्यस्थता के सामने राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी दोनों तरह की चुनौतियां हैं।

अब आगे क्या होगा

आने वाले 30 दिन इस योजना की वास्तविक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण होंगे। हथियारों का हस्तांतरण, उनका स्वतंत्र सत्यापन, इजरायली सैनिकों की वापसी और गाजा के पुनर्निर्माण का क्रम तय करना सबसे बड़ी चुनौतियां रहेंगी।

फिलहाल गाजा शांति योजना के तहत हमास के निरस्त्रीकरण की दिशा में शुरुआती प्रगति की उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन इजरायल और हमास के बीच मूलभूत मतभेद दूर नहीं हुए हैं। आने वाले दिनों में किसी वास्तविक हथियार हस्तांतरण या सत्यापित निरस्त्रीकरण की शुरुआत ही यह स्पष्ट करेगी कि 30 दिन की समयसीमा कूटनीतिक घोषणा से आगे बढ़कर जमीन पर लागू होती है या नहीं।

www.dainikjagranmpcg.com
18 Aug 2026 By Sandeep.P

गाजा शांति योजना: कुश्नर बोले, 30 दिन में शुरू हो सकता है हमास का निरस्त्रीकरण

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत जेरेड कुश्नर ने कहा है कि हमास के निरस्त्रीकरण और गाजा शांति योजना के अगले चरण पर 30 दिनों के भीतर प्रगति शुरू हो सकती है। हालांकि, इजरायल और हमास के बीच हथियार सौंपने, इजरायली सैनिकों की वापसी और गाजा के पुनर्निर्माण के क्रम को लेकर मतभेद अभी कायम हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत जेरेड कुश्नर ने 17 अगस्त को कहा कि हमास के निरस्त्रीकरण की दिशा में शुरुआती कदम अगले 30 दिनों में शुरू हो सकते हैं। कुश्नर ने यह बयान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से यरुशलम में मुलाकात के बाद दिया। इससे एक दिन पहले उन्होंने मिस्र में हमास के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की थी।

कुश्नर ने फॉक्स न्यूज से कहा कि 30 दिनों के भीतर कुछ हथियार हटाने और हमास की सुरंगों को बंद करने की दिशा में काम शुरू हो सकता है। हालांकि, उनकी क्षेत्रीय कूटनीतिक कोशिशें किसी अंतिम समझौते तक नहीं पहुंच सकीं।

कुश्नर ने बताई समयसीमा

कुश्नर की 30 दिन वाली समयसीमा अमेरिकी प्रशासन की उस कोशिश का हिस्सा है, जिसके तहत गाजा शांति योजना को राजनीतिक सहमति से आगे बढ़ाकर जमीन पर लागू करने की कोशिश की जा रही है।

अमेरिकी प्रस्ताव में हमास के निरस्त्रीकरण को इजरायली सैन्य वापसी और गाजा के पुनर्निर्माण से जोड़ा गया है। लेकिन दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हैं कि इन कदमों को किस क्रम में लागू किया जाए।

इजरायल की शर्त स्पष्ट

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि हमास के पूरी तरह निरस्त्रीकरण से पहले इजरायल गाजा से अपनी सेना नहीं हटाएगा।

कुश्नर और नेतन्याहू की बातचीत के बाद एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि गाजा में सैन्य पुनर्विन्यास या पुनर्निर्माण हमास के पूरे क्षेत्र में निरस्त्रीकरण से पहले नहीं होगा। प्रस्तावित व्यवस्था में एक अमेरिकी जनरल हथियारों के निष्क्रियकरण की निगरानी कर सकता है।

अमेरिकी जनरल करेगा निगरानी

प्रस्तावित व्यवस्था में हमास द्वारा सौंपे जाने वाले हथियारों के स्थायी निष्क्रियकरण की निगरानी के लिए अमेरिकी सैन्य अधिकारी की भूमिका तय करने पर चर्चा हुई है।

गाजा के लिए प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल को भी सुरक्षा और हथियारों के निष्क्रियकरण की प्रक्रिया में भूमिका मिल सकती है। अमेरिकी मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को इस बल के कमांडर के तौर पर नामित किया गया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य हथियारों को केवल जमा कराने के बजाय उन्हें स्थायी रूप से इस्तेमाल के लायक नहीं रहने देना है।

हमास पर बढ़ा दबाव

कुश्नर ने मिस्र में हमास नेता खलील अल-हय्या और अन्य प्रतिनिधियों से बातचीत की। रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत का मुख्य उद्देश्य हमास से निरस्त्रीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाने की प्रतिबद्धता हासिल करना था।

हमास ने अमेरिकी योजना के व्यापक ढांचे के प्रति प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन वह इजरायली सैन्य वापसी और स्थायी युद्धविराम सहित अन्य शर्तों पर भी जोर देता रहा है। हमास के लिए हथियारों का मुद्दा गाजा के भविष्य के शासन और व्यापक राजनीतिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।

पुनर्निर्माण भी जुड़ा

गाजा के पुनर्निर्माण को भी प्रस्तावित शांति व्यवस्था से जोड़ा गया है। अमेरिकी योजना में सैन्य गतिविधियों को कम करने, हमास के हथियारों को निष्क्रिय करने और गाजा में एक नई नागरिक प्रशासन व्यवस्था स्थापित करने की परिकल्पना है।

इजरायल का रुख है कि पुनर्निर्माण से पहले सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी होनी चाहिए। वहीं, हमास और उसके समर्थक पक्ष इजरायली सैन्य वापसी और गाजा में हमलों को रोकने को प्रक्रिया का अहम हिस्सा मानते हैं।

बातचीत में नहीं निकला रास्ता

कुश्नर की दो दिन की कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद इजरायल और हमास के बीच मुख्य मतभेद दूर नहीं हुए। इजरायल पूर्ण निरस्त्रीकरण पर जोर दे रहा है, जबकि हमास योजना के विभिन्न हिस्सों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मांग कर रहा है।

कुश्नर की नेतन्याहू से बातचीत को सकारात्मक बताया गया, लेकिन इजरायल ने अमेरिकी प्रस्ताव के लिए कोई अंतिम प्रतिबद्धता नहीं दी। दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

नेतन्याहू पर घरेलू दबाव

नेतन्याहू को गाजा नीति पर घरेलू राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनकी सरकार के कट्टरपंथी सहयोगी हमास को लेकर किसी भी रियायत का विरोध कर रहे हैं।

दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन शांति योजना को आगे बढ़ाने के लिए इजरायल और हमास दोनों से व्यावहारिक कदम उठाने की मांग कर रहा है। इसी वजह से अमेरिकी मध्यस्थता के सामने राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी दोनों तरह की चुनौतियां हैं।

अब आगे क्या होगा

आने वाले 30 दिन इस योजना की वास्तविक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण होंगे। हथियारों का हस्तांतरण, उनका स्वतंत्र सत्यापन, इजरायली सैनिकों की वापसी और गाजा के पुनर्निर्माण का क्रम तय करना सबसे बड़ी चुनौतियां रहेंगी।

फिलहाल गाजा शांति योजना के तहत हमास के निरस्त्रीकरण की दिशा में शुरुआती प्रगति की उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन इजरायल और हमास के बीच मूलभूत मतभेद दूर नहीं हुए हैं। आने वाले दिनों में किसी वास्तविक हथियार हस्तांतरण या सत्यापित निरस्त्रीकरण की शुरुआत ही यह स्पष्ट करेगी कि 30 दिन की समयसीमा कूटनीतिक घोषणा से आगे बढ़कर जमीन पर लागू होती है या नहीं।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/gaza-peace-plan-kushner-said-disarmament-of-hamas-can-start/article-61663

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