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केरल में सरकार गठन तेज, CM पद के लिए दो बड़े नाम चर्चा में, किसे चुनेगी कांग्रेस?
नेशनल डेस्क
केरल चुनाव में कांग्रेस गठबंधन की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर मंथन तेज है। वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला सबसे आगे बताए जा रहे हैं।
केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन की बड़ी जीत के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री पद को लेकर हो रही है। तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। कांग्रेस विधायकों की बैठक भी हो चुकी है, लेकिन अब निगाहें आलाकमान के फैसले पर टिकी हैं। सूत्रों के मुताबिक फिलहाल मुख्यमंत्री पद की रेस में दो नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। इनमें पार्टी के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला शामिल हैं। पार्टी के भीतर दोनों नेताओं को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चा है। ऐसा कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व संतुलन, संगठन और भविष्य की राजनीति तीनों पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहता है।
के. सी. वेणुगोपाल को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है और यही वजह है कि उनका नाम सबसे मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है। वे कांग्रेस संगठन में लंबे समय से अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी के कई बड़े फैसलों और संगठन सृजन अभियान में भी उनकी भूमिका अहम रही है। फिलहाल वे केरल की अलप्पुझा लोकसभा सीट से सांसद हैं। छात्र राजनीति से अपना सफर शुरू करने वाले वेणुगोपाल ने केरल छात्र संघ के जरिए राजनीति में पहचान बनाई थी। बाद में वह राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस संगठन में लगातार सक्रिय रहे। कांग्रेस के भीतर कुछ नेताओं का मानना है कि अगर उन्हें केरल भेजा जाता है तो संगठन स्तर पर पार्टी को दिल्ली में नुकसान हो सकता है, क्योंकि मौजूदा समय में वह केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति का अहम हिस्सा माने जाते हैं। हालांकि दूसरी तरफ यह भी चर्चा है कि केरल में कांग्रेस की वापसी के बाद पार्टी एक ऐसा चेहरा चाहती है जो दिल्ली और राज्य दोनों के बीच बेहतर तालमेल बना सके।
उधर रमेश चेन्निथला का नाम भी मजबूती से सामने आ रहा है। पार्टी के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाने वाले चेन्निथला संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं और इस वक्त महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी हैं। बताया जा रहा है कि कई विधायकों का समर्थन भी उनके साथ माना जा रहा है। हरिपाद सीट से वह लगातार छठी बार विधायक चुने गए हैं, जिसने उनके कद को और मजबूत किया है। इससे पहले वह चार बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं और केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। कांग्रेस के भीतर उनके अनुभव और संगठन पर पकड़ को बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह भी है कि वेणुगोपाल और चेन्निथला दोनों ही नायर समुदाय से आते हैं, इसलिए सामाजिक समीकरणों को लेकर भी पार्टी काफी सतर्क नजर आ रही है।
जानकारी के मुताबिक कांग्रेस आलाकमान जल्द ही अंतिम फैसला ले सकता है। पार्टी किसी तरह का विवाद या शक्ति प्रदर्शन नहीं चाहती, इसलिए बातचीत का दौर शांत तरीके से चल रहा है। केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अकेले 63 सीटें जीती हैं, जबकि सहयोगी IUML को 22 सीटें मिली हैं। भारी बहुमत मिलने के बाद कार्यकर्ताओं में उत्साह है और अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य की कमान आखिर किसे सौंपी जाती है। देर शाम तक दिल्ली में कुछ और दौर की बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है
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केरल में सरकार गठन तेज, CM पद के लिए दो बड़े नाम चर्चा में, किसे चुनेगी कांग्रेस?
नेशनल डेस्क
केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन की बड़ी जीत के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री पद को लेकर हो रही है। तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। कांग्रेस विधायकों की बैठक भी हो चुकी है, लेकिन अब निगाहें आलाकमान के फैसले पर टिकी हैं। सूत्रों के मुताबिक फिलहाल मुख्यमंत्री पद की रेस में दो नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। इनमें पार्टी के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला शामिल हैं। पार्टी के भीतर दोनों नेताओं को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चा है। ऐसा कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व संतुलन, संगठन और भविष्य की राजनीति तीनों पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहता है।
के. सी. वेणुगोपाल को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है और यही वजह है कि उनका नाम सबसे मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है। वे कांग्रेस संगठन में लंबे समय से अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी के कई बड़े फैसलों और संगठन सृजन अभियान में भी उनकी भूमिका अहम रही है। फिलहाल वे केरल की अलप्पुझा लोकसभा सीट से सांसद हैं। छात्र राजनीति से अपना सफर शुरू करने वाले वेणुगोपाल ने केरल छात्र संघ के जरिए राजनीति में पहचान बनाई थी। बाद में वह राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस संगठन में लगातार सक्रिय रहे। कांग्रेस के भीतर कुछ नेताओं का मानना है कि अगर उन्हें केरल भेजा जाता है तो संगठन स्तर पर पार्टी को दिल्ली में नुकसान हो सकता है, क्योंकि मौजूदा समय में वह केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति का अहम हिस्सा माने जाते हैं। हालांकि दूसरी तरफ यह भी चर्चा है कि केरल में कांग्रेस की वापसी के बाद पार्टी एक ऐसा चेहरा चाहती है जो दिल्ली और राज्य दोनों के बीच बेहतर तालमेल बना सके।
उधर रमेश चेन्निथला का नाम भी मजबूती से सामने आ रहा है। पार्टी के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाने वाले चेन्निथला संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं और इस वक्त महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी हैं। बताया जा रहा है कि कई विधायकों का समर्थन भी उनके साथ माना जा रहा है। हरिपाद सीट से वह लगातार छठी बार विधायक चुने गए हैं, जिसने उनके कद को और मजबूत किया है। इससे पहले वह चार बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं और केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। कांग्रेस के भीतर उनके अनुभव और संगठन पर पकड़ को बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह भी है कि वेणुगोपाल और चेन्निथला दोनों ही नायर समुदाय से आते हैं, इसलिए सामाजिक समीकरणों को लेकर भी पार्टी काफी सतर्क नजर आ रही है।
जानकारी के मुताबिक कांग्रेस आलाकमान जल्द ही अंतिम फैसला ले सकता है। पार्टी किसी तरह का विवाद या शक्ति प्रदर्शन नहीं चाहती, इसलिए बातचीत का दौर शांत तरीके से चल रहा है। केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अकेले 63 सीटें जीती हैं, जबकि सहयोगी IUML को 22 सीटें मिली हैं। भारी बहुमत मिलने के बाद कार्यकर्ताओं में उत्साह है और अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य की कमान आखिर किसे सौंपी जाती है। देर शाम तक दिल्ली में कुछ और दौर की बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है
