- Hindi News
- देश विदेश
- नेपाल बाढ़: लापता लोगों की पहचान के लिए भारत ने DNA टेस्ट की पेशकश की
नेपाल बाढ़: लापता लोगों की पहचान के लिए भारत ने DNA टेस्ट की पेशकश की
Digital Desk
नेपाल की बाढ़ और हिमस्खलन के बाद लापता लोगों की पहचान के लिए भारत ने परिजनों के DNA टेस्ट और फॉरेंसिक सहायता की पेशकश की है।
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और बर्फ-चट्टान हिमस्खलन के बाद लापता लोगों की पहचान में मदद के लिए भारत ने DNA प्रोफाइलिंग सहायता की पेशकश की है। इस पहल के तहत भारत में रहने वाले लापता लोगों के प्रथम-श्रेणी के जैविक रिश्तेदार निर्धारित सरकारी फॉरेंसिक संस्थानों में DNA सैंपल दे सकेंगे।
इन सैंपलों से तैयार DNA प्रोफाइल की तुलना नेपाल में आपदा प्रभावित इलाकों से बरामद अज्ञात शवों और मानव अवशेषों से प्राप्त DNA से की जाएगी। इसका उद्देश्य उन पीड़ितों की पहचान करना है जिनकी पहचान पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं हो पा रही है।
यह पहल केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के समन्वय से शुरू की गई है। भारतीय अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, प्राकृतिक आपदा में 1,200 से अधिक लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
परिजन दे सकेंगे DNA सैंपल
नई व्यवस्था के तहत लापता लोगों के माता-पिता, बच्चे और भाई-बहन अपने जैविक नमूने DNA प्रोफाइलिंग के लिए दे सकेंगे।
प्रथम-श्रेणी के रिश्तेदारों के DNA प्रोफाइल को संदर्भ नमूने के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। इसके बाद इन प्रोफाइल की तुलना नेपाल में बरामद अज्ञात मानव अवशेषों से प्राप्त DNA से की जाएगी।
इस प्रक्रिया से उन परिवारों को मदद मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से अपने परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। खासकर ऐसे मामलों में जहां शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हों और फोटो या अन्य पहचान के तरीके काम न कर रहे हों, DNA जांच महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
अधिकारियों द्वारा नमूनों और DNA प्रोफाइल को निर्धारित फॉरेंसिक प्रक्रियाओं के तहत सुरक्षित तरीके से संभालने और तुलना करने की व्यवस्था की जाएगी।
भारत की सरकारी लैब तैयार
DNA सैंपल लेने और प्रोफाइल तैयार करने के लिए भारत के मौजूदा सरकारी फॉरेंसिक नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसमें चयनित Central Forensic Science Laboratories (CFSLs), State Forensic Science Laboratories (SFSLs), National Forensic Sciences University (NFSU) और उसके क्षेत्रीय परिसरों की प्रयोगशालाएं तथा अन्य NABL-मान्यता प्राप्त सार्वजनिक फॉरेंसिक संस्थान शामिल हैं।
इन संस्थानों में पात्र परिजनों के DNA प्रोफाइल तैयार किए जाएंगे। इसके बाद संबंधित प्रोफाइल नेपाल में काम कर रही अधिकारियों और आपदा पीड़ित पहचान टीमों के साथ साझा किए जाएंगे।
इससे नेपाल में बरामद अज्ञात शवों के लिए उपलब्ध संदर्भ DNA नमूनों का दायरा बढ़ेगा।
Autosomal STR तकनीक से जांच
इस पहल में Autosomal Short Tandem Repeat (STR) DNA प्रोफाइलिंग का इस्तेमाल किया जाएगा।
STR विश्लेषण DNA के कुछ विशेष हिस्सों की जांच करता है और फॉरेंसिक पहचान में इसका व्यापक इस्तेमाल किया जाता है। लापता व्यक्तियों और आपदा पीड़ितों की पहचान में भी यह तकनीक उपयोगी है।
प्रथम-श्रेणी के रिश्तेदारों में काफी मात्रा में आनुवंशिक समानता होती है। इसलिए जब लापता व्यक्ति का अपना DNA नमूना उपलब्ध नहीं होता, तब माता-पिता, बच्चों या भाई-बहनों के DNA को संदर्भ के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
नेपाल में अज्ञात अवशेषों से प्राप्त DNA की इन संदर्भ प्रोफाइल से तुलना कर संभावित जैविक संबंधों की पहचान की जा सकेगी।
भारत ने DVI टीम भेजी
भारत ने DNA प्रोफाइलिंग के अलावा नेपाल में 19 सदस्यीय Disaster Victim Identification (DVI) टीम भी भेजी है।
इस टीम में National Forensic Sciences University और CFSL दिल्ली के फॉरेंसिक वैज्ञानिक और DNA विशेषज्ञ शामिल हैं। भारतीय विशेषज्ञ काठमांडू स्थित नेपाल पुलिस की Central Forensic Science Laboratory के अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं।
टीम फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने, DNA विश्लेषण और लापता लोगों से संबंधित संदर्भ प्रोफाइल की अज्ञात मानव अवशेषों से तुलना में तकनीकी सहायता दे रही है।
इससे आपदा के बाद भारत की व्यापक राहत और तकनीकी सहायता के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण फॉरेंसिक आयाम जुड़ गया है।
दृश्य पहचान हो सकती है मुश्किल
बड़े पैमाने पर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के बाद पीड़ितों की पहचान करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
बाढ़ का पानी, भूस्खलन और लंबे समय तक प्राकृतिक परिस्थितियों में पड़े रहने से मानव अवशेष गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे मामलों में तस्वीर, उंगलियों के निशान या केवल दृश्य पहचान के आधार पर व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
DNA प्रोफाइलिंग ऐसी परिस्थितियों में वैज्ञानिक पहचान का अधिक विश्वसनीय तरीका उपलब्ध करा सकती है।
फॉरेंसिक विशेषज्ञ उपयुक्त जैविक सामग्री से DNA निकालकर उसे परिजनों के संदर्भ नमूनों से मिलाते हैं। पर्याप्त मजबूत आनुवंशिक समानता मिलने पर पहचान की पुष्टि में मदद मिल सकती है।
नेपाल के सामने बड़ी चुनौती
आपदा का बड़ा पैमाना नेपाल के सामने लापता लोगों की तलाश और बरामद शवों की पहचान की चुनौती को और गंभीर बना रहा है।
परिजन पुलिस के पास अपने लापता रिश्तेदारों की जानकारी दर्ज करा रहे हैं और पहचान प्रक्रिया में मदद के लिए जैविक नमूने भी उपलब्ध करा रहे हैं।
भारत में मौजूद परिजनों से DNA नमूने लेने की सुविधा से नेपाल के जांचकर्ताओं को अतिरिक्त संदर्भ प्रोफाइल मिल सकेंगे। इससे उन मामलों को सुलझाने में भी मदद मिल सकती है जिनमें परिवार के सदस्यों के लिए नेपाल पहुंचना मुश्किल है।
यह पहल बड़ी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भारत-नेपाल फॉरेंसिक सहयोग के महत्व को भी रेखांकित करती है।
परिवारों को जल्द मिल सकती जानकारी
लापता लोगों के परिवारों के लिए DNA पहचान केवल एक वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपने प्रियजनों के बारे में निश्चित जानकारी हासिल करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
किसी व्यक्ति की औपचारिक पहचान होने के बाद प्रशासन उसकी मृत्यु का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार कर सकता है। इससे परिवारों को कानूनी, प्रशासनिक और अंतिम संस्कार से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने में भी मदद मिलती है।
भारत द्वारा अपने सरकारी फॉरेंसिक नेटवर्क को इस प्रक्रिया के लिए उपलब्ध कराना आपदा प्रतिक्रिया के सबसे कठिन चरणों में से एक को तेज करने की कोशिश है।
नेपाल में फॉरेंसिक टीमें अपना काम जारी रखे हुए हैं। भारत में परिजनों से लिए गए DNA नमूनों और नेपाल में बरामद अज्ञात मानव अवशेषों से मिले साक्ष्यों का संयोजन अधिक से अधिक पीड़ितों की पहचान करने और लंबे समय से जवाब का इंतजार कर रहे परिवारों को स्पष्ट जानकारी देने में मदद कर सकता है।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

